Positive India: 103 डिग्री बुखार में दी थी UPSC मेंस परीक्षा फिर भी पहले ही एटेम्पट में 9वीं रैंक हासिल कर बनीं IAS - जानें सौम्या शर्मा की कहानी

AGMUT कैडर के 2018-बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी (IAS) सौम्या शर्मा के पास एक सफल सिविल सेवक होने के वह सभी गुण हैं जो लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला सकते हैं। गंभीर सेंसरिनुरल हियरिंग लॉस (दोनों कानों से बहुत कम सुनने) के बावजूद उन्होंने आरक्षण के लाभों का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला किया और अपने पहले ही प्रयास में UPSC सिविल सेवा परीक्षा को पास कर 9वीं रैंक हासिल की। उनकी जीवन कहानी इस बात का प्रमाण है की बुलंद हौसले और सच्ची लगन से यदि मेहनत की जाये तो सफलता पाना मुश्किल नहीं है।

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दिल्ली की रहने वाली हैं सौम्या 

सौम्या शर्मा अपने माता-पिता और छोटे भाई के साथ दिल्ली में रहती है। उनके माता-पिता दोनों ही डॉक्टर हैं। उनके छोटे भाई मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं। सौम्या शुरुआत से ही पढ़ाई में होनहार रही हैं और उन्होंने 10वीं बोर्ड की परीक्षा में अपने स्कूल में टॉप किया था। बेंगलुरु में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ़ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में प्रवेश पाने के बावजूद सौम्या ने राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU) दिल्ली का विकल्प चुना। 

2010 में अचानक खो दी थी सुनने की शक्ति 

सौम्या बताती हैं की "इसकी शुरुआत अगस्त 2010 में मेरे कानों में बहुत तेज़ गूंज के साथ हुई, लेकिन सुनाई ना देने की हानि अचानक हुई और इस हद तक चली गई जहां मैं अपनी आवाज नहीं सुन पा रही थी। मेरी कक्षा ग्यारहवीं का अधिकांश समय अस्पताल जाने में व्यतीत होता था। लेकिन मेरे परिवार, दोस्तों और आधुनिक तकनीक के समर्थन से मुझे फिर से सुनने का माध्यम मिला।” अब सौम्या हियरिंग ऐड के माध्यम से सुनती हैं।

लॉ की पढ़ाई के दौरान किया UPSC सिविल सेवा परीक्षा देने का फैसला 

सौम्या बताती हैं "एक बार जब आप कानून का अध्ययन करते हैं, तो आपका झुकाव स्वाभाविक रूप से सामाजिक मुद्दों की ओर हो जाता है। आप संवैधानिक कानून, मानवाधिकारों और बहुत सी अन्य चीजों के बारे में पढ़ते हैं, जो आपको समाज के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करती हैं। हालांकि मैंने फरवरी 2017 में परीक्षा लिखने के बारे में अंतिम फैसला किया।  परीक्षा की तैयारी की लिए मेरे पास केवल 4 ही महीने थे। लेकिन सिविल सेवाओं में आने से लोगों के लिए कुछ करने जज़्बे ने मुझे हौसला दिया।"

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बिना कोचिंग के दी UPSC सिविल सेवा की परीक्षा 

सौम्या कॉलेज के अपने अंतिम वर्ष में UPSC की तैयारी करने लगी। उन्होंने इसके लिए किसी भी कोचिंग क्लास का सहारा नहीं लिया। वह अपनी कॉलेज की पढ़ाई के साथ साथ ही प्रीलिम्स की तैयारी करती रहीं। उनकी अंतिम कॉलेज परीक्षा 2 जून, 2017 को हुई और केवल 16 दिन बाद सौम्या ने प्रीलिम्स परीक्षा दी और उसे पास भी किया।

103 डिग्री बुखार में दी मेंस की परीक्षा 

मेंस परीक्षा से कुछ दिन पहले सौम्या को तेज़ बुखार हुआ। इसी बुखार में उन्होंने अपना essay पेपर लिखा और जब वह पेपर दे कर घर लौटीं तो उनका बुखार 103 डिग्री तक पहुँच गया था। सौम्या बताती हैं की उस समय मेरी हालत इतनी ख़राब थी की बेड से उठ पाना भी मुश्किल था। परन्तु उन्होंने मामूली बुखार की वजह से अपनी मेहनत को ज़ाया न जाने देने का फैसला किया और वह 103 डिग्री बुखार में GS पेपर 1 देने गयी। लंच ब्रेक में उन्हें तेज़ बुखार की वजह से IV ड्रिप लगानी पड़ी परन्तु उन्होंने फिर भी हिम्मत से काम लिया और GS पेपर 2 लिखा। हालांकि पेपर के दौरान कई बार उन्हें कमज़ोरी की वजह से चक्कर आए परन्तु उनके बुलंद हौसलों ने उनका साथ नहीं छोड़ा। 

यह सौम्या की मेहनत और हौसले का ही नतीजा था की कठिन परिस्थितिओ को पार करते हुए उन्होंने पहले ही एटेम्पट में बिना किसी कोचिंग का सहारा लिए 9वीं रैंक हासिल की। अगर उस समय बुखार से हार मान कर सौम्या परीक्षा नहीं देती तो आज हम उन्हें IAS सौम्या शर्मा के नाम से नहीं जानते। उनकी मेहनत, आत्म विश्वास और बुलंद हौसला देश के हर युवा के लिए प्रेरणा है। 

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