साइकोमेट्रिक टेस्ट क्या हैं और कैसे ये आपको नौकरी प्राप्त करने में मदद करते हैं?

आज के समय में साइकोमेट्रिक टेस्ट नौकरी खोज रहे सभी उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य टेस्ट बन चुका है. यह लगभग सभी नौकरियों के लिए आवश्यक हो गया है. ऐसे उम्मीदवार, जो केवल यह सोचते हैं कि नौकरी के लिए रिज्यूम और इंटरव्यू की जरूरत होती है, को अब साइकोमेट्रिक टेस्ट की तैयारी भी करनी होगी.  

लेकिन, इससे पहले कि आप साइकोमेट्रिक टेस्ट्स  को पास करने के  बारे में सोचना शुरू करें, आपको यह जानने की जरूरत है कि साइकोमेट्रिक टेस्ट  क्यों  महत्वपूर्ण है? साइकोमेट्रिक टेस्ट  और इसके साथ जुड़े सभी चीजों को समझने में आपकी सहायता के लिए, हमने आपके लिए नीचे एक व्यापक गाइड तैयार किया है:

 साइकोमेट्रिक टेस्ट क्या हैं?

साइकोमेट्रिक टेस्ट एक नयी घटना है जो विभिन्न निजी और कुछ सरकारी संगठनों में भर्ती प्रक्रिया में एक नियमित मापदंड बन गई है. इस टेस्ट को उम्मीदवार की जांच के लिए अतिरिक्त  मापदंड के रूप में तैयार किया गया है जो नौकरी के लिए उनकी पात्रता को सिद्ध करता है. ऐसे विभिन्न प्रकार के साइकोमेट्रिक टेस्ट हैं, जिनका उपयोग रिक्रूटर्स और एचआर पेशेवरों द्वारा उनके व्यक्तित्व, कौशल, बुद्धि और भावनात्मक चीजों के विभिन्न पहलुओं का परीक्षण करने के लिए किया जाता है. साइकोमेट्रिक टेस्ट के परिणाम के आधार पर उम्मीदवार को भर्ती के बारे में सूचित किया जाता है.

 

साइकोमेट्रिक टेस्ट का उपयोग क्यों किया जाता है ?

आजकल साइकोमेट्रिक टेस्ट का उपयोग कॉर्पोरेट नियोक्ताओं द्वारा बहुत ही बड़े पैमाने पर उम्मीदवारों को सेलेक्ट करने के लिए किया जाता है. कंपनियों के पास ऐसे तीन मुख्य कारण है जिनको  साइकोमेट्रिक टेस्ट की ऐसी उच्च लोकप्रियता के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है.

1. उम्मीदवारों का ऑब्जेक्टिव आकलन

नियोक्ताओं के बीच साइकोमेट्रिक टेस्ट की उच्च स्वीकृति दर के मुख्य कारणों में से एक है नौकरी चाहने वालों के ज्ञान और व्यक्तित्व के गुणों का सही मूल्यांकन करने की इसकी क्षमता. इस टेस्ट के माध्यम से सामान्य जागरूकता, तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, अन्य टीम के सदस्यों के साथ काम करने की क्षमता और विषयपरक और व्यवहारिक पहलुओं की अच्छी से जांच की जा सकती है.

2. भर्ती प्रक्रिया को और अधिक कुशल बनाता है

 साक्षात्कार के उम्मीदवारों या नौकरी तलाशने वालों की इस टेस्ट के माध्यम से परीक्षा ली जाती है क्योंकि यह कंपनी की भर्ती प्रक्रिया के दौरान बहुत अधिक समय और संसाधनों को बचाता है.

 3. ऑन-जॉब प्रदर्शन का विश्वसनीय निरीक्षक

 साइकोमेट्रिक टेस्ट्स का उपयोग करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इन टेस्ट्स  द्वारा किये गए  मूल्यांकन में नियोक्ताओं को कर्मचारी के भविष्य के प्रदर्शन का अनुमान लगाने में मदद मिलती है. कई अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि साइकोमेट्रिक टेस्ट नियोक्ताओं को सही उम्मीदवारों का चयन करने में मदद करते हैं  जो भविष्य में अपनी असाधारण प्रदर्शन के साथ अपनी भूमिका के लिए एक आदर्श कर्मचारी साबित होते हैं.

 साइकोमेट्रिक टेस्ट्स  क्या जांच करते हैं?

 साइकोमेट्रिक शब्द दो शब्दों की संधि से बना है .

1. साइको = मानसिक और मीट्रिक = मापन

इसलिए, साइकोमेट्रिक टेस्ट नौकरी चाहने वालों की मानसिक क्षमता और कौशल का परीक्षण करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. ये टेस्ट यह समझने में मदद करते हैं कि वे नौकरी के लिए फिट हैं या नहीं. यह मनोविज्ञान जैसी जटिल चीज को समझने के लिए एक बहुत सरल दृष्टिकोण है.

साइकोमेट्रिक टेस्ट को उम्मीदवारों के पेशेवर कौशलों के साथ-साथ व्यक्तिगत कौशलों  के परीक्षण करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

 संक्षेप में, इन परीक्षणों टेस्ट्स के बारे में आप एचआर पेशेवरों की मदद से अपनी नौकरी से जुड़े कौशल, व्यक्तित्व और अन्य व्यक्तिपरक जानकारी को प्राप्त कर सकते हैं.

 हालांकि, साइकोमेट्रिक टेस्ट खुद को ऐसे सरल मूल्यांकन तक ही  सीमित नहीं करते हैं. साइकोमेट्रिक टेस्ट्स के माध्यम से टेस्ट  किए जाने वाले कारकों की एक  विविध सारणी हैं और मुख्य विशेषताएं हैं:

•क्षमता: साइकोमेट्रिक टेस्ट कौशल और गुणों के संदर्भ में नौकरी तलाशने वालों की क्षमताओं का मूल्यांकन करते हैं

• योग्यता: साइकोमेट्रिक टेस्ट नौकरी के लिए उम्मीद्वार की योग्यता की जांच भी करते हैं जो उनकी रोज़ की जिम्मेदारियों को पूरा करने की क्षमता का पता लगाने के लिए जरूरी हैं. यह टेस्ट्स यह भी जांच करते हैं कि उम्मीदवार एक टीम में अच्छी तरह से भाग ले कर काम करने में सक्षम है या वह तनाव या उच्च दबाव की स्थितियों को नियंत्रित करने में सक्षम हैं .

• व्यक्तित्व: साइकोमेट्रिक टेस्ट का एक अन्य पहलू उम्मीदवार के व्यक्तित्व का परीक्षण करना होता है जिसमें उम्मीदवार की प्रकृति का सामान्य आकलन शामिल है, जैसे कि अंतर्मुखी / बहिर्मुखी प्रकृति या उम्मीदवार के भावनात्मक पक्ष और पेशेवर परिपक्वता का भी परीक्षण करना.

 साइकोमेट्रिक टेस्ट के प्रकार

 जैसा कि ऊपर बताया गया है, साइकोमेट्रिक टेस्ट के कई अलग-अलग प्रकार और प्रारूप हैं जो एचआर और नियोक्ताओं को एक उम्मीदवार के प्रोफाइल का मूल्यांकन और विश्लेषण करने में मदद करता है.

एप्टीटूड  टेस्ट

 आजकल एप्टीटूड  टेस्ट लगभाग हर किसी नौकरी के टेस्ट का अभिन्न ये टेस्ट आपकी नौकरी की प्रकृति के आधार पर विशिष्ट या सामान्य सेट का आकलन करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. ऐसे विभिन्न प्रकार के टेस्ट एप्टीटूड  हैं जिन्हें निम्न वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:

• डायग्रामैटिक रीज़निंग टेस्ट : फ्लो चार्ट और आरेखों का विश्लेषण

• आगमनात्मक तर्क टेस्ट : ग्राफ़ पर आधारित रुझानों या पैटर्न की पहचान करना

• लॉजिकल रीज़निंग टेस्ट

• न्यूमेरिक रीज़निंग टेस्ट: डेटा इंटरप्रिटेशन एंड एनालिसिस

• मौखिक रीजनिंग टेस्ट : टेक्स्ट फॉर्म में लिखित जानकारी का मूल्यांकन करने की क्षमता की जांच

• त्रुटि की जांच : किसी जटिल डेटासेट में त्रुटियों को इंगित करने की क्षमता

• कौशल टेस्ट : साइकोमेट्रिक टेस्ट का दूसरा सबसे आम प्रकार कौशल टेस्ट है जिसके तहत नियोक्ताओं को नई तकनीक के संबंध में उम्मीदवार की सीखने की क्षमता का मूल्यांकन करने में मदद मिलती है.

उदाहरण के लिए, खातों और वित्तपोषण की भूमिका तलाशने वाले उम्मीदवारों को एक बैलेंस शीट का मूल्यांकन करने के लिए कहा जा सकता है. जबकि डिजाइनर और ग्राफिक आर्टिस्ट्स  जैसे रचनात्मक पेशेवरों को उनके कौशल और अनुकूलन क्षमता को प्रदर्शित हेतु एक डिजाइन तैयार करने के लिए भी कहा जा सकता है.

 पर्सनालिटी टेस्ट 

इस प्रकार के  साइकोमेट्रिक टेस्ट का उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के दौरान सामना करना पड़ सकता है. नियोक्ताओं द्वारा ये टेस्ट आम तौर पर इस बात का  आकलन करने के लिए लिया जाता है कि क्या उम्मीदवार संगठन के लिए सांस्कृतिक रूप से  फिट है या नहीं. उदाहरण के लिए, एक समूह में प्रदर्शन करने की किसी उम्मीदवार की क्षमता का आकलन करने के लिए अक्सर नियोक्ताओं द्वारा ग्रुप डिस्कशन का उपयोग किया जाता है.

नौकरी के उम्मीदवारों को स्क्रीनिंग करने के लिए साइकोमेट्रिक टेस्ट्स को अपनाने वाले कॉर्पोरेट संगठनों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वह दिन बहुत दूर नहीं है जब यह हर जगह अनिवार्य हो जायेगा  .

 साइकोमेट्रिक टेस्ट द्वारा दिखाए गए प्रभावी परिणाम ने एसएससी और बैंकिंग संस्थानों जैसे सरकारी एजेंसियों को भी अपनी भर्ती प्रक्रिया के रूप में इस टेस्ट को  शामिल करने के लिए मजबूर किया है. इसलिए, भर्ती प्रक्रिया में   बेहतर तैयारी करने के लिए, उम्मीदवारों को कुछ साइकोमेट्रिक टेस्ट देना चाहिए.

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