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भारतीय वायु सेना के कमीशन और नॉन-कमीशन अधिकारियों के बीच अंतर

भारतीय वायु सेना (IAF) देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं में से एक है। आकर्षक वेतन और अन्य लाभ के साथ IAF करियर के अच्छे अवसर प्रदान करता है। भारतीय वायु सेना (IAF) अधिकारियों और अधिकारी रैंक से नीचे के पदों पर नियुक्तियां करता है जिन्हें पर्सन बिलो ऑफिसर रैंक (PBOR) कहते हैं। भारतीय वायुसेना में नियुक्ति या तो कमीशन अधिकारी या जूनियर कमीशन अधिकारी या नॉन-कमीशन अधिकारी के रूप में की जाती है।

Feb 12, 2019 10:46 IST
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commissioned and non commisioned officers of IAF
commissioned and non commisioned officers of IAF

कमीशन और नॉन-कमीशन अधिकारी अपनी ड्यूटी, रैंक, अथॉरिटी और वेतन से पहचाने जाते हैं। नॉन-कमीशन अधिकारी मुख्यतः सैनिक होते हैं जो प्रशिक्षण, भर्ती जैसे विशिष्ट कौशल और तकनीकी कुशलता वाले होते हैं। उन्हें " बैकबोन" भी कहा जाता है। कमीशन अधिकारी प्रबंधन का हिस्सा होते हैं। वे नॉन -कमीशन अधिकारियों और निचले रैंक वालों को उनके मिशन, असाइनमेंट और आदेश प्रदान करते हैं। नॉन -कमीशन अधिकारी निचले रैंक वालों की निगरानी भी करते हैं ताकि दिए गए असाइनमेंट ठीक से पूरे किये जा सकें।

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भारतीय वायु सेना में कितने प्रकार के कमीशन होते हैं

जो उम्मीदवार भारतीय वायु सेना में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें भारतीय वायु सेना में कमीशन के प्रकार के बारे में जानना चाहिए। उन्हें प्रत्येक प्रकार के कमीशन में एंट्री के विभिन्न तरीकों को भी जानना चाहिए। भारतीय वायु सेना में केवल दो प्रकार के कमीशन हैं। य़े निम्नलिखित हैं:

स्थायी कमीशन (PC)

एक स्थायी कमीशन का मतलब है कि अधिकारी रिटायरमेंट की उम्र तक काम कर सकते हैं। पुरुष और महिला दोनों ही स्थायी कमीशन में शामिल हो सकते हैं।

पुरुष

फ्लाइंग ब्रांच

10+2 के बाद उम्मीदवार राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के माध्यम से IAF के फ्लाइंग ब्रांच में शामिल हो सकते हैं या स्नातक पूरा होने के बाद, वे UPSC द्वारा आयोजित CDS परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।

टेक्निकल ब्रांच और ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच

स्नातक पूरा होने के बाद उम्मीदवार IAF की टेक्निकल ब्रांच और ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच में हर साल IAF द्वारा आयोजित एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) के माध्यम से शामिल हो सकते हैं।

महिला

अभी तक, केवल शिक्षा और लेखा शाखा की महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन के लिए योग्य माना जाता है।

शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC)

यदि उम्मीदवार शॉर्ट सर्विस कमीशन का विकल्प चुनते हैं तो वे सीमित अवधि के लिए ही अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। यह उनके द्वारा चुनी गई ब्रांच के आधार पर 10 से 14 वर्ष तक हो सकता है। पुरुष और महिला दोनों ही शॉर्ट सर्विस कमीशन का विकल्प चुन सकते हैं।

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फ्लाइंग ब्रांच

सभी ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट AFCAT के माध्यम से फ्लाइंग ब्रांच में शामिल हो सकते हैं। सेवा की अवधि कमीशन की तारीख से 14 वर्ष तक होती  है और यह विस्तार योग्य नहीं होती है।

टेक्निकल ब्रांच और ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच

सभी ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट AFCAT के माध्यम से टेक्निकल ब्रांच और ग्राउंड ड्यूटी ब्रांच में शामिल हो सकते हैं। सेवा की अवधि 10 साल के लिए है। सेवा में 4 साल का विस्तार दिया जा सकता है।

भारतीय वायु सेना में अधिकारियों की कमीशनिंग

भारत की रक्षा सेवा की वायु शाखा, भारतीय वायु सेना में रॉयल एयर फोर्स की संरचना के आधार पर रैंक संरचना होती है। भारतीय वायु सेना में तीन प्रकार के कमीशन अधिकारी होते हैं। ये हैं: कमीशन अधिकारी, जूनियर कमीशन अधिकारी और नॉन-कमीशन अधिकारी।

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भारतीय वायुसेना के नॉन-कमीशन अधिकारी

एयरक्राफ्टसमैन

यह भारतीय वायुसेना का सबसे निचला रैंक है। एयरमैन भारतीय वायुसेना में केवल इस रैंक पर शामिल होते हैं। प्रोमोशन के बाद, एयरक्राफ्ट्समैन लीडिंग एयरक्राफ्टमैन बन जाता है। एयरक्राफ्टमैन को जो वेतन मिलता है वह पे मैट्रिक्स 3 में मिलता है।

लीडिंग एयरक्राफ्टमैन

तकनीकी रूप से लीडिंग एयरक्राफ्टमैन एक रैंक नहीं है बल्कि यह भारतीय वायुसेना में नॉन-कमीशन अधिकारियों को दिया गया एक टाइटल है। जब एयरक्राफ्ट्समैन लीडिंग एयरक्राफ्टमैन बन जाता है तो पे मैट्रिक्स नहीं बदलता है। प्रमोशन मिलने पर, लीडिंग एयरक्राफ्टमैन कॉर्पोरल बन जाता है।

कॉर्पोरल

यह एक सैन्य रैंक है जो सैनिकों के एक वर्ग या दस्ते से मेल खाती है। कॉर्पोरल बनने के लिए एयरमैन को न्यूनतम 5 साल की सेवा आवश्यक रूप से करनी होती है। प्रमोशन के बाद वे पे मैट्रिक्स 4 में आ जाते हैं।

सर्जेंट

सर्जेंट का रैंक जूनियर वारंट ऑफिसर के ठीक नीचे है। सर्जेंट बनने के लिए एयरमैन को न्यूनतम 13 साल और 6 महीने की सेवा की आवश्यकता होती है। प्रमोशन के बाद वे वेतन मैट्रिक्स 5 में आते हैं।

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भारतीय वायुसेना के जूनियर कमीशन अधिकारी

जूनियर वारंट ऑफिसर

आम तौर पर तकनीकी विशेषज्ञता वाले एयरमैन के पास जूनियर वारंट ऑफिसर का पद होता है। जूनियर वारंट ऑफिसर बनने के लिए एयरमैन को न्यूनतम 17 वर्ष की सेवा की आवश्यकता होती है। प्रमोशन के बाद, वे पे मैट्रिक्स 6 में आ जाते हैं।

वारंट ऑफिसर

यह जूनियर कमीशंड ऑफिसर रैंक में दूसरी सबसे ऊंची रैंक है। वारंट ऑफिसर बनने के लिए एयरमैन को न्यूनतम 23 वर्ष की सेवा की आवश्यकता होती है। प्रमोशन के बाद, वे पे मैट्रिक्स 7 में आ जाते हैं।

मास्टर वारंट ऑफिसर

इस रैंक में, अधिकारी को वारंट द्वारा नामित किया जाता है न कि कमीशन अधिकारियों की तरह जो कमीशन द्वारा नामित होते हैं। यह जूनियर कमीशन अधिकारियों में सर्वोच्च रैंक होता है। मास्टर वारंट ऑफिसर बनने के लिए एयरमैन को न्यूनतम 28 वर्ष की सेवा की आवश्यकता होती है। प्रमोशन के बाद वे पे मैट्रिक्स 8 में आ जाते हैं।

भारतीय वायुसेना के कमीशन अधिकारी

फ्लाइंग ऑफिसर

फ्लाइंग ऑफिसर एक कमीशन रैंक होता है, जो न केवल विमान उड़ाने वाले अधिकारी होते हैं बल्कि ग्राउंड ड्यूटी ऑफिसर या एयर क्रू अधिकारी भी होते हैं। फ्लाइंग ऑफिसर का पद टाइम स्केल प्रमोशन के तहत आता है। प्रमोशन होने पर फ्लाइंग ऑफिसर फ्लाइंग लेफ्टिनेंट बन जाता है।

फ्लाइंग लेफ्टिनेंट

यह भी एक कमीशन रैंक है। इस रैंक के अधिकारी को केवल "लेफ्टिनेंट" के रूप में संबोधित नहीं किया जाता है। फ्लाइंग लेफ्टिनेंट का पद टाइम स्केल प्रमोशन के तहत आता है। प्रमोशन होने पर फ्लाइंग लेफ्टिनेंट स्क्वाड्रन लीडर बन जाता है।

स्क्वाड्रन लीडर

स्क्वाड्रन लीडर विंग कमांडर के पद से नीचे का पद है। सेवा के कुल 6 साल पूरे होने पर अधिकारी को स्क्वाड्रन लीडर का पद दिया जाता है। स्क्वाड्रन लीडर का पद टाइम स्केल प्रमोशन के तहत आता है। प्रमोशन होने पर स्क्वाड्रन लीडर विंग कमांडर बन जाता है।

विंग कमांडर

विंग कमांडर का रैंक ग्रुप कैप्टन के रैंक से कम होता है लेकिन यह एक सीनियर कमीशन रैंक है। अधिकारी 12 साल की सेवा पूरी करने के बाद विंग कमांडर बन जाता है। विंग कमांडर बनने के लिए अधिकारियों को प्रमोशन परीक्षा ’C’ पास करनी पड़ती है। प्रमोशन होने पर,विंग कमांडर ग्रुप कैप्टन बन जाता है।

ग्रुप कैप्टन

यह एक सीनियर कमीशन रैंक है जो सेना के कर्नल के बराबर होता है। विंग कमांडर का पद प्राप्त करने के बाद प्रमोशन वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर होती है। फ्लाइंग ब्रांच का अधिकारी 16 साल की सेवा पूरी करने के बाद ग्रुप कैप्टन के पद पर प्रमोशन पाने का पात्र बन जाएगा।

एयर कमोडोर

यह एकल स्टार (Single Star) रैंक है जो स्टार श्रेणी में सबसे जूनियर रैंक है। एयर कमोडोर ऑफिसर का कार्य कमांडिंग एयर ऑफिसर के कार्य में उनकी मदद करना है।

एयर वाइस मार्शल

एयर वाइस मार्शल भारतीय वायु सेना में एक दो-सितारा (Two Star) अधिकारी रैंक है। यह रैंक एयर मार्शल के रैंक से नीचे होता है।

एयर मार्शल

यह भारतीय वायुसेना में एक तीन सितारा (Three Star) रैंक है और यह उन अधिकारियों के पास होता है जो आमतौर पर बहुत वरिष्ठ पद पर होते हैं। यह रैंक एयर चीफ मार्शल के रैंक से नीचे होता है।

एयर चीफ मार्शल

यह भारतीय वायुसेना में दूसरी सबसे बड़ी और चार सितारा (Four Star) रैंक है। एयर चीफ मार्शल, चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (CAS) का पद संभालता है, जो भारतीय वायुसेना का प्रमुख और कमांडर होता है।

मार्शल ऑफ़ द एयरफोर्स

मार्शल ऑफ़ द एयरफोर्स भारतीय वायुसेना का सर्वोच्च रैंक होता है जो एक आनरेरी वॉर टाइम रैंक है। यह पांच सितारा (Five Star) रैंक है। यह रैंक कई देशों में है लेकिन सभी देश इसका उपयोग नहीं करते हैं।

इन सभी रैंक से ऊपर भारत का राष्ट्रपति है जो भारतीय वायुसेना का सर्वोच्च कमांडर होता है।

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