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असफलता से न घबराएं

Aug 30, 2018 12:56 IST
    Failure – the stepping stone to success
    Failure – the stepping stone to success

    आज के युवा स्कूलों और कॉलेजों से बाहर निकलते ही मायूस हो जाते हैं और अपनी शख्सियत को भूल बैठते हैं। वे यह सबक लेने की कोशिश नहीं करते कि सबसे महान और सबसे ज्यादा ताकतवर लोगों ने भी कमजोरियां या चुनौतियां झेली हैं। विनीत टंडन बता रहे हैं कि अगर आपकी जिंदगी दिशाहीन है या आपको मालूम नहीं है कि आप कहां जा रहे हैं, तो जानें कैसे जोश के साथ आगे बढ़ा जाए...

    हाल ही में डेविड मैक्नेली की किताब ‘ईवन ईगल्स नीड अ पुश’में चीलों के बारे में एक रोचक कहानी पढ़ी। सुनहरी और गंजी चील दुनिया में सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा शक्तिशाली चिड़िया होती है, जो शक्ति, बहादुरी, निर्भयता और स्वाभिमान की प्रतीक भी है। लेकिन इनके लिए भी अपनी स्वतंत्रता को सीखना अनिवार्य होता है यानी अगर चील के छोटे बच्चों को अपने दम पर जीवित रहना है, तो उन्हें घोंसले के आराम को छोड़ना और उड़ना सीखना होता है। दरअसल, जब चील के बच्चे छोटे होते हैं, तब उनका घोंसला आरामदायक, अहानिकर और सुरक्षित रहे, चीलें इस बात का पूरा ख्याल रखती हैं। लेकिन बच्चों को यह विश्वास दिलाने के लिए कि उनके रवाना होने का समय अब आ गया है, माता-पिता अपने पंजों से बिछौने को फाड़कर घोंसले को तकलीफदेह बना देते हैं। हर बार मां अपने छोटे बच्चे को घोंसले से नीचे धकेल देती है, ताकि वह सीख सके और उड़ना शुरू कर सके। हालांकि फिर भी जब मां देखती है कि छोटा बच्चा नीचे गिरकर मरने वाला है, तो वह नीचे झपट्टा मारती है, उसे उसकी पीठ से पकड़ लेती है और आसमान में ऊपर की ओर ऊंची उड़ान भरती है। बार-बार इस प्रक्रिया को दोहराया जाता है, जब तक कि चील का छोटा बच्चा वायु की उठती धाराओं को पकड़ना और हवा की सवारी करना सीख नहीं जाता। बाद में इस तरह उसके पंख शक्तिशाली बन जाते हैं और जल्दी ही चील का छोटा बच्चा धरती के बहुत ऊपर उड़ान भरने लगता है। लेकिन चील के कुछ छोटे बच्चे जो अपने पंख का इस्तेमाल करने और उड़ने से इंकार करते हैं, किस्मत से हार मान लेते हैं, वे मर जाते हैं। हमारी कहानी भी कमोबेश इसी तरह है। जब हम छोटे होते हैं, तब हमारे माता-पिता, बुजुर्ग और शिक्षक हमारी देखभाल करते हैं। वे हमें सिखाते हैं, हमें शिक्षित करते हैं । लेकिन जैसे ही हम स्कूल और कॉलेज से बाहर निकलते हैं, हम पूरी तरह से मायूस हो जाते हैं और अपनी शख्सियत को भूल बैठते हैं। अगर आपकी जिंदगी दिशाहीन है या आपको मालूम नहीं है कि आप कहां जा रहे हैं, तो यहां जिंदगी के कुछ सबक आपके लिए उपयोगी हो सकते हैं:

    धैर्यपूर्वक सोच-विचार

    उस गहरी अंदरूनी आवाज को ध्यानपूर्वक सुनिये जो स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ बोलने की कोशिश हमेशा करती रहती है। अपनी असफलताओं को ध्यानपूर्वक सुनिये। आलोचकों को ध्यानपूर्वक सुनिये। अपनी समस्याओं और चुनौतियों की स्क्रिप्ट और भाषा को समझिये। उनके साथ दोस्ती बनाइये। ढेर सारे उत्तर केवल हमारे मस्तिष्क में, बल्कि हमारे चेतना में भी मौजूद होते हैं।

    पहचानें अपनी अस्मिता

    चील हमेशा एक चील होती है, न कि एक तोता। याद कीजिये कि आप कौन हैं। स्कूल के अपने सबकों को याद कीजिये। अपने माता-पिता या बुजुर्गों को देखिये जो आपके लिए अनुकरणीय व्यक्ति रहे हैं। अपने चारों ओर के संसार से प्रेरणा प्राप्त कीजिए। जिंदगी कभी-कभी मुश्किल हो सकती है। यहां तक कि सबसे महान और सबसे ज्यादा ताकतवर लोगों ने भी कमजोरियां या चुनौतियां झेली हैं। इसलिए जब मायूसी भरे दौर से गुजर रहे हों, तो गर्व के अपने बीते हुए पलों को याद कीजिए।

    प्रयास करते रहें

    एक बात यह भी समझनी होगी कि हमारा वर्तमान हमारा भविष्य नहीं है। प्रत्येक दिन अलग है और इसलिए अगर आज आप सफल नहीं है, तो आशा का दामन मत छोड़िए। अपना तरीका बदलिये, अपनी कार्यनीति बदलिये, हर उस चीज को बदलिये जिसे बदलने की जरूरत है।

    दिल-दिमाग की सुनें

    ढेर सारे लोगों का जब किसी असफलता या चुनौती से सामना होता है तब अक्सर वे वहीं अटक जाते हैं। इसलिए किसी भी चीज के लिए आधे मन से प्रतिबद्ध मत होइये। या तो किसी भी चीज में पूरे मन से तल्लीन होइये या यह पता लगाइए कि आपका नाता कहां से है।

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