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हाउसकीपिंग: बढ़ाएं हॉस्पिटैलिटी की चमक

Sep 6, 2018 13:01 IST
    Housekeeping: Shortcut to Success in Hospitality Industry
    Housekeeping: Shortcut to Success in Hospitality Industry

    स्वच्छता के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच होटल, रेस्टोरेंट से लेकर मॉल या घर-ऑफिस, हॉस्पिटल्स जैसी हर जगहों पर साफ-सफाई पर खासा ध्यान दिया जाने लगा है। होटलों को तो और ज्यादा उम्दा किस्म की देखभाल की जरूरत होती है, क्योंकि यहां ठहरने वाले ग्राहक अन्य सुविधाओं की अपेक्षा साफ-सफाई को अधिक तरजीह देते हैं। यही वजह है कि सभी होटलों में इस कार्य के लिए बकायदा हाउसकीपिंग विभाग होता है। यही विभाग सभी कमरों, मीटिंग हॉल, बैंक्वेट हॉल, लाउंज, लॉबी, रेस्तरां इत्यादि की साफ-सफाई की जिम्मेदारी उठाता है। हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के अन्य विभागों की तरह हाउसकीपिंग की सेवाओं की मांग भी इन दिनों बढ़ रही है, क्योंकि पर्यटन को बढ़ावा मिलने से लोग इसमें अपना सुनहरा भविष्य देख रहे हैं। हाउसकीपिंग में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव, हाउस कीपर, क्लीनर, फ्लोर सुपरवाइजर और वैलेट मैनेजर जैसे अलग-अलग पदों पर काम कर सकते हैं।

    मल्टी टॉस्किंग स्टाफ

    नई दिल्ली स्थित द होटल स्कूल के डायरेक्टर अनिल बट के अनुसार, यह शारीरिक मेहनत वाला फील्ड है। इस नौकरी में व्यक्ति को साफ-सफाई से लेकर पूरे इंटीरियर की साज-सज्जा का ध्यान रखना होता है, ताकि हर चीजें करीने से लगी दिखें। आमतौर पर इस प्रोफेशन को लेकर लोगों के मन में गलतफहमी भी होती है, जैसे-हाउसकीपर का काम केवल साफ-सफाई, रूम व बाथरूम की सफाई करना होता है, पर ऐसा बिल्कुल नहीं है।

    प्रमुख संस्थान

    • दिल्ली पैरामेडिकल ऐंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली www.dpmiindia.com
    • लक्ष्य भारती इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल होटल मैनेजमेंट, नई दिल्ली  www.lbiihm.com
    • होटल स्कूल, नई दिल्ली www.thehotelschool.com

    जॉब्स के अवसर

    दिल्ली स्थित डीपीएमआइ की प्रिंसिपल अरुणा सिंह के अनुसार, हाउसकीपिंग का कोर्स करने के बाद होटल, रेस्तरां, क्लब, क्रूजशिप, रिसॉर्ट तथा हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री से जुड़ी अन्य जगहों पर आसानी से जॉब मिल जाती है। कॉरपोरेट कंपनियों, निजी हॉस्पिटल्स में भी हमेशा जरूरत होती है।

    कोर्स एवं योग्यता

    एलबीआइआइएचएम के डायरेक्टर कमल कुमार बताते हैं कि हाउस कीपिंग फील्ड सेवाभावी लोगों के लिए ज्यादा उपयुक्त है। यह कोर्स दसवीं या बारहवीं के बाद किया जा सकता है। इसमें एक साल से लेकर तीन साल तक के कोर्स उपलब्ध हैं।

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