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कैसे बने ऑनलाइन गुरु ?

Sep 6, 2018 12:34 IST
    How to become an online tutor?
    How to become an online tutor?

    आज पढ़ने-पढ़ाने का तरीका तेजी से बदल रहा है। नई पीढ़ी का रुझान भी किताबों से ज्यादा एप से पढ़ने और सीखने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पारंपरिक तरीके से पढ़ा रहे गुरुओं से भी वक्त के साथ बदलने की अपेक्षा की जा रही है। हाल के वर्षों में तेजी से उभरे कुछ ऑनलाइन टीचिंग प्लेटफॉम्र्स पर एक नजर......

    केरल के बायजू रविंद्रन ने अपने विजन से भारत की सबसे बड़ी एडु-टेक कंपनी बायजू स्थापित की है। साथ ही विकसित किया है देश का सबसे बड़ा के-12 लर्निंग ‘बायजू एप’, जिसके माध्यम से छात्रों को जेईई, आइएएस, नीट, जीआरई, जीएमएटी, कैट आदि परीक्षा के लिए तैयार किया जाता है। प्रख्यात चेन-जुकरबर्ग इनिशिएटिव ने इनके वेंचर में निवेश किया है। बायजू संयोग से इंजीनियर और उद्यमी बने, पसंद से अध्यापक। केरल के कन्नूर जिले के एक छोटे से गांव एजीकोड से स्कूली पढ़ाई करने वाले बायजू के अभिभावक मलयालम माध्यम के एक स्कूल में अध्यापक थे, जहां बायजू खुद भी पढ़ते थे। बड़े होकर इंजीनियरिंग की और विदेश में नौकरी करने चले गए। फिर ब्रेक लेकर भारत लौटे और कैट की परीक्षा दी। कम तैयारी के बावजूद जब 100 फीसदी अंक मिले, तो हैरान रह गए। दोबारा अपनी परीक्षा लेना तय किया। फिर से 100 फीसदी अंक मिले। इसके बाद दोस्तों ने स्टूडेंट्स को कैट परीक्षा की तैयारी करवाने के लिए प्रोत्साहित किया। बायजू ने नौकरी छोड़ दी और स्टूडेंट्स को पढ़ाने अलग-अलग शहरों में जाने लगे। जल्द ही इनके वर्कशॉप में छात्रों की संख्या 35-40 तक पहुंच गई। वे बड़े ऑडिटोरियम और स्टेडियम में हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स को एक साथ पढ़ाने लगे। इसी दौरान महसूस हुआ कि उनके पढ़ाने का तरीका अपने आप में अलग है, जो स्टूडेंट्स को सीखने में बेहतर मदद करता है और उन्हें संतुष्टि भी देता है। बायजू ने कभी कारोबार करने की योजना नहीं बनाई थी। लेकिन ऑनलाइन वीडियो क्लासेज से एक शुरुआत हुई। फिर इन्होंने एक ऐसा एप बनाया, जिसमें ओरिजनल कंटेंट, वॉच ऐंड लर्न वीडियो, एनिमेशन और इंटरैक्टिव वीडियो की सुविधा हो। जो स्टूडेंट्स की उनकी खास लर्निंग स्टाइल के अनुरूप काम कर सके। आज इस एप के कई लाख  डाउनलोड्स हो चुके हैं। स्कूल से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र इसका प्रयोग कर रहे हैं। करीब 93 फीसदी अभिभावकों के अनुसार, एप के इस्तेमाल के बाद से उनके बच्चों के परिणाम बेहतर हुए हैं।

    क्लासरूम में बनता है देश का फ्यूचर...

    अध्यापन का पेशा सबसे ज्यादा रिस्पॉन्सिबल प्रोफेशन है, क्योंकि बाकी सारे प्रोफेशन को प्रोड्यूस टीचिंग प्रोफेशन ही करता है। सभी प्रोफेशन का ब्रेन यही प्रोफेशन है। चाहे आइएएस ऑफिसर्स हों, डॉक्टर्स हों या इंजीनियर्स हों, इन्हें बनाने के पीछे टीचर्स ही होते हैं। उनकी क्वालिटी कैसी है, यह भी टीचर्स पर ही निर्भर करता है। इस लिहाज से इतनी बड़ी नैतिक जिम्मेदारी किसी और प्रोफेशन में नहीं मिलती। इसलिए जो टीचिंग प्रोफेशन में आते हैं, वे सिर्फ पैसे के लिए नहीं आते। किसी ने सही कहा है कि देश का फ्यूचर क्लासरूम में बनता है। टीचिंग को उसी नजरिए से देखना चाहिए और दूसरे देशों की तरह टीचिंग में देश के बेस्ट माइंड/इंटेलेक्चुअल्स को आना चाहिए। वैसे यह प्रोफेशन पहले से बहुत अट्रैक्टिव है, लेकिन इस तरह इसे और अट्रैक्टिव बनाया जा सकता है, ताकि ज्यादा लोग इस प्रोफेशन में आएं और वे आगे आकर जिन स्टूडेंट्स को आगे बढ़ाएं,वे क्वालिटी के लोग हों और जो अपने देश को आगे बढ़ाने में योगदान करें।

    प्रो. एके बख्शी
    वाइस चांसलर, पीडीएम यूनिवर्सिटी, हरियाणा

    ऑनलाइन टेस्ट प्रिपरेशन प्लेटफॉर्म ‘ऑलिव बोर्ड’

    टेक्नोलॉजी के जरिये स्टूडेंट्स को पर्सनलाइज एजुकेशन उपलब्ध कराने के विजन के साथ अभिषेक पाटिल ने ऑलिव बोर्ड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की नींव रखी। आज 10 लाख से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स के साथ यह एक विश्वसनीय प्लेटफॉर्म बन चुका है, जो स्टूडेंट्स को एमबीए से लेकर बैंकिंग एवं गवर्नमेंट जॉब के लिए होने वाली परीक्षाओं की तैयारी में मदद करता है। ऑलिव बोर्ड के सह-संस्थापक एवं सीईओ अभिषेक एक बिजनेस परिवार से आते हैं। इनकी ख्वाहिश भी हमेशा एक उद्यमी बनने की ही रही। बेंगलुरु से टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग करने के बाद करीब दो वर्ष फैमिली बिजनेस में सहयोग दिया। इसके बाद अमेरिका की नोट्रे डेम यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। 2012 में अपने पूर्व सहकर्मी सतीश के साथ मिलकर इन्होंने ऑलिव बोर्ड डॉट कॉम लॉन्च किया। अभिषेक कहते हैं कि वे उन स्टूडेंट्स के लिए कुछ करना चाहते थे जो दूर-दराज के इलाकों से क्वालिटी एजुकेशन व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहर आते हैं।

    टीचर बन निखारे टैलेंट

    सबसे सम्मानित पेशे टीचिंग के प्रति आकर्षण एक बार फिर बढ़ रहा है। पढ़ने-पढ़ाने से मिलने वाले सुकून और नए-नए अवसरों को देखकर टैलेंटेड और इनोवेटिव युवा इस पेशे में आगे रहे हैं। आज देश को समर्पित शिक्षकों की बहुत जरूरत है, पर इस पेशे में उसी को आना चाहिए जिसमें पढ़ने-पढ़ाने का पैशन हो। जो बदलते जमाने की जरूरतों को समझते हुए बच्चों का मार्गदर्शन कर सकें। न्यू एज शिक्षकों को टेक-सेवी होना भी बहुत आवश्यक हो गया है, ताकि वे ई-लर्निंग प्लेटफॉम्र्स का इस्तेमाल कर क्लासरूम में बच्चों को और दिलचस्प अंदाज में शिक्षा दे सकें। आइए जानते हैं प्राइमरी, अपर प्राइमरी, सेकंडरी या फिर कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में पढ़ाने के लिए किस तरह के स्पेशलाइजेशन की जरूरत होती है...

    टीचर्स ट्रेनिंग कोर्सेज

    बीएड (बैचलर ऑफ एजुकेशन): अपर प्राइमरी तथा माध्यमिक स्तर के स्कूलों में पढ़ाने के इच्छुक युवाओं के बीच यह कोर्स सबसे अधिक लोकप्रिय है। पहले यह कोर्स एक साल का था, लेकिन वर्ष 2015 से इसकी अवधि बढ़ाकर दो वर्ष कर दी गई है। इसका महत्व देखते हुए अगले सत्र से इसे बीटेक की तरह चार साल का करने पर विचार किया जा रहा है। इस कोर्स में दाखिला एंट्रेंस एग्जाम के आधार पर होता है, जो हर साल राज्य स्तर पर किसी विश्वविद्यालय की देख-रेख में होता है। इसके अलावा, इग्नू, काशी विद्यापीठ और दिल्ली यूनिवर्सिटी से भी बीएड किया जा सकता है। यहां का कोर्स भी हर जगह मान्य है। बीएड करने के बाद आगे चलकर इसी में मास्टर ऑफ एजुकेशन (एमएड) भी कर सकते हैं। बीएड करने के लिए किसी भी स्ट्रीम में 50 प्रतिशत अंकों से ग्रेजुएशन होना जरूरी है, तभी आप इस कोर्स के एंट्रेंस एग्जाम में शामिल हो सकते हैं।

    बीएड (स्पेशल एजुकेशन): सरकारी या प्राइवेट स्कूलों में स्पेशल एजुकेशन टीचर बनने के लिए देश के विभिन्न संस्थानों में दो नामों से ये कोर्सेज संचालित हो रहे हैं, जैसे कि डीएड इन स्पेशल एजुकेशन और बीएड इन स्पेशल एजुकेशन। डीएड डिप्लोमा प्रोग्राम है, जिसे 12वीं के बाद किया जा सकता है, जबकि बीएड कोर्स करने के लिए बैचलर डिग्री होनी चाहिए।

    बीटीसी (बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट): यह दो वर्षीय कोर्स केवल उत्तर प्रदेश में कराया जाता है। इसे करने के बाद आप प्राइमरी तथा अपर प्राइमरी यानी कक्षा एक से 8वीं तक के स्कूलों में टीचर बन सकते हैं। कोर्स में दाखिला 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएशन की मेरिट के आधार पर दिया जाता है। इसके लिए हर साल ऑनलाइन आवेदन निकलते हैं, जिसका फॉर्म भरने के बाद जिले के डायट सेंटर्स पर काउंसिलिंग होती है और फिर यहां पर चयनित होने वाले उम्मीदवारों को ही बीटीसी कॉलेजों में दाखिला मिलता है। यह कोर्स करने के लिए अनिवार्य योग्यता ग्रेजुएशन है तथा उम्र सीमा 18 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

    एनटीटी (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग): यह कोर्स दिल्ली जैसे बड़े राज्यों में ज्यादा प्रचलित है। इसकी अवधि दो साल है। कोर्स में प्रवेश 12वीं के अंकों के आधार पर दिया जाता है। कुछ जगहों पर इसके लिए प्रवेश परीक्षाएं भी आयोजित की जाती हैं। यह कोर्स करने के बाद  नगर निगमों और राज्य सरकार के प्राइमरी स्कूलों में टीचर के पदों पर अप्लाई कर सकते हैं।

    प्रमुख संस्थान

    • इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली www.ignou.ac.in
    • दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली <http://cie.du.ac.in
    • टीचर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, दिल्ली सोसाइटी फॉर वेलफेयर ऑफ स्पेशल चिल्ड्रेन, दिल्ली http://dswspecialchildren.org

    जेबीटी (जूनियर टीचर ट्रेनिंग): जूनियर टीचर ट्रेनिंग कोर्स के लिए न्यूनतम योग्यता 12वीं है। इस कोर्स को करने के बाद उम्मीदवार प्राइमरी टीचर बनने के लिए योग्य हो जाते हैं।

    डीएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन): यह दो वर्षीय कोर्स बिहार और मध्य प्रदेश में प्राइमरी शिक्षक बनने के लिए कराया जाता है। इसमें दाखिला 12वीं के अंकों के आधार पर दिया जाता है।

    बीपीएड (बैचलर इन फिजिकल एजुकेशन): अगर आपकी रुचि खेल में है, तो यह कोर्स करके स्कूलों में फिजिकल टीचर (खेल शिक्षक) बन सकते हैं। 12वीं में फिजिकल एजुकेशन विषय से पढ़ाई करने वाले छात्र यह कोर्स कर सकते हैं।

    पात्रता परीक्षाएं

    टीजीटी/पीजीटी: टीजीटी (ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर) तथा पीजीटी (पोस्ट ग्रेजुएट टीचर) परीक्षाएं मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली में आयोजित की जाती हैं। टीजीटी के लिए ग्रेजुएट और बीएड होना जरूरी है, जबकि पीजीटी के लिए पोस्ट ग्रेजुएट और बीएड होना आवश्यक है। टीजीटी पास शिक्षक कक्षा 6 से 10वीं तक के स्कूलों में पढ़ाते हैं, जबकि पीजीटी के शिक्षक सेकंडरी तथा सीनियर सेकंडरी की कक्षाओं में पढ़ाते हैं।

    टीईटी: देश के कई राज्यों में अलग-अलग नामों से टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) बीटीसी, एनटीटी, बीएड और डीएड अभ्यर्थियों के लिए हर साल आयोजित की जाती है। दरअसल, शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के अनुसार राज्य स्तरीय स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए टीचर ट्रेनिंग लेने के बाद टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है यानी इसे पास करने के बाद ही आप शिक्षक पद के लिए आवेदन के योग्य माने जाएंगे।

    सीटीईटी (सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट): केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों में शिक्षक बनने के लिए यह परीक्षा पास करनी जरूरी है। सीबीएसई यह परीक्षा साल में दो बार आयोजित करती है। इस परीक्षा में बीटीसी, एनटीटी और बीएड डिग्री वाले अभ्यर्थी भाग ले सकते हैं।

    यूजीसी नेट: कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर बनने के लिए यूजीसी-नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (यूजीसी नेट) परीक्षा पास करना आवश्यक होता है। यह परीक्षा साल में दो बार आयोजित की जाती है। इस एग्जाम में 55 प्रतिशत अंकों से पोस्ट ग्रेजुएट उम्मीदवार ही शामिल हो सकते हैं। पहले यह परीक्षा यूजीसी की ओर से सीबीएसई कराती थी, लेकिन अब इसे एनटीए आयोजित करेगी।

    अंशु सिंह, धीरेंद्र पाठक

    टॉप रैंकर्स’ पोर्टल से बैंकिंग की तैयारी

    बेंगलुरु स्थित ऑनलाइन टेस्ट प्रिपरेशन पोर्टल टॉप रैंकर्स के संस्थापक गौरव गोयल ने उत्तर प्रदेश टेक्निकल यूनिवर्सिटी (अब एकेटीयू) से कंप्यूटर इंजीनियरिंग करने के बाद एक निजी कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर (क्वालिटी एश्योरेंस) काम किया। इसके बाद ब्रेन पुली सॉल्यूशंस कंपनी में बड़ा मौका मिला। यहीं पर देखा कि इंटरनेट एवं कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी ने किस प्रभावी तरीके से क्लासरूम की अवधारणा बदल दी है। जानकारियों के लिए स्टूडेंट्स अब सिर्फ किताबों पर निर्भर नहीं रह गए हैं, बल्कि ऑनलाइन माध्यमों से उनके पास असीमित सूचनाएं पहुंच रही हैं। अपने अध्ययन में इन्होंने यह भी पाया कि करीब 3.5 करोड़ स्टूडेंट्स ऑनलाइन परीक्षाएं देते हैं। लेकिन तैयारी करने के लिए उनके पास पर्याप्त ऑनलाइन स्रोत नहीं हैं। टॉप रैंकर्स के जरिये इसी जरूरत को भरने की कोशिश की गई है। स्टूडेंट्स आइबीपीएस पीओ, आरआरबी, एसएससी, क्लैट, सीजीएल जैसी तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहां से सामग्री प्राप्त कर सकते हैं।

    लॉजिक रूट्स’ भगा रहा मैथ्स का डर

    2011 में कुणाल गांधी एक कंसल्टिंग फर्म में काम कर रहे थे। एक दिन अचानक नौकरी से इस्तीफा दे दिया और ब्रसेल्स छोड़कर अपने शहर जयपुर लौट आए। सेंट जेवियर्स कॉलेज एवं आइआइटी मुंबई के अलावा आइआइएम, अहमदाबाद से पढ़ाई करने वाले कुणाल पहले दुविधा में थे कि क्या करें? लेकिन फिर इन्होंने उद्यमी बनने का निर्णय लिया। आइआइटी बॉम्बे के अपने साथी गुंजन अग्रवाल के साथ मिलकर 2013 में उन्होंने ‘लॉजिक रूट्स’ की नींव रखी। यह कंपनी प्राइमरी स्कूल के बच्चों को गणित सिखाने के लिए बोर्ड गेम्स तैयार करती है। आज भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन एवं कनाडा में इनके बोर्ड गेम्स लोकप्रिय हैं। इनके एप अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं।

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