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कैसे करें कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स पास?

Aug 1, 2018 19:06 IST
How to crack competitive exams
How to crack competitive exams

भारत में बहुत अधिक कॉम्पीटिटिव माहौल है, खासकर जब कॉलेज में एडमिशन लेना हो तो यह कॉम्पिटीशन का स्तर देखते ही बनता है जैसेकि, साइंस स्ट्रीम में, इंजीनियरिंग, मेडिकल या फार्मेसी विषय में स्टूडेंट्स टॉप इंस्टिट्यूट्स में एडमिशन लेने के लिए काफी स्ट्रगल करते हैं. इस साल, 11.5 लाख स्टूडेंट्स ने जेईई मेन एग्जाम दिया है जबकि विभिन्न आईआईटीज में कुल 11,300 सीट्स उपलब्ध हैं. एनईईटी के माध्यम से, 13.5 लाख स्टूडेंट्स विभिन्न सरकारी कॉलेजों में एडमिशन लेना चाहते हैं जबकि, इन कॉलेजों की कुल क्षमता लगभग 26,000 स्टूडेंट्स तक सीमित है. सिर्फ साइंस ही नहीं, कॉमर्स, विभिन्न कॉलेजों में आर्ट्स और सोशल साइंस से संबद्ध अन्य कोर्सेज या सीए और सिविल सर्विसेज (यूपीएससी) जैसे पेशेवर एग्जाम्स को पास करना भी आजकल काफी कठिन हो गया है. यह कॉम्पिटीशन दिन-ब-दिन काफी मुश्किल होता जा रहा है इसलिये, स्टूडेंट्स को काफी छोटी उम्र से ही इन कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स में पास होने के लिए तैयारी शुरू करनी पड़ती है. इससे बेहतर  स्किल-सेट वाले स्टूडेंट्स और कट-ऑफ लिस्ट में निरंतर वृद्धि हो रही है. इस वजह से एग्जामिनर्स भी अपने एग्जाम्स का डिफिकल्टी लेवल लगातार बढ़ा रहे हैं. असल में, काफी मुश्किल कॉम्पिटीशन के कारण स्टूडेंट्स पर बढ़ते हुए प्रेशर की वजह से एचआरडी मिनिस्ट्री को आईआईटी काउंसिल को जेईई मेन एग्जाम का डिफिकल्टी लवले कम करने के लिए कहना पड़ा ताकि बढ़ते हुए कॉम्पिटीशन के बावजूद स्टूडेंट्स पर एक्स्ट्रा प्रेशर न पड़े. 

एंट्रेंस एग्जाम्स में काफी सख्त कॉम्पिटीशन के कारण, स्टूडेंट्स को डायरेक्शन और एडवाइस की आवश्यकता पड़ती है. आपकी सहूलियत के लिए नीचे कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं ताकि आप कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स में आसानी से पास हो जायें:

1. जल्दी शुरुआत रहेगी बेहतर

किसी भी एग्जाम की तैयारी करने में सबसे बड़ा फर्क इस बात से पड़ता है कि हम कितनी जल्दी उस एग्जाम के लिए अपनी तैयारी शुरू कर देते हैं?. इससे यह तय होगा कि नये कॉन्सेप्ट्स सीखने के लिए और जटिल प्रश्नों की प्रैक्टिस करने के लिए आपको कितना समय मिलेगा. ‘टॉपर’ के एक्सपर्ट्स सुझाव देते हैं कि किसी अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए आपको अपनी 10वीं क्लास के दौरान या फिर उसके तुरंत बाद अपनी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. ऐसा करने पर आपको बेसिक कॉन्सेप्ट्स समझने के लिए काफी समय मिलेगा और फिर, आपको एडवांस्ड कॉन्सेप्ट्स सीखने के लिए भी काफी समय मिल जायेगा. अपने फाइनल एग्जाम से 2-3 वर्ष पहले तैयारी शुरू कर देने पर आपको अपनी तैयारी करने के लिए काफी समय मिल जाता है.

हालांकि, अगर आप अपनी 10वीं क्लास से तैयारी शुरू नहीं कर पाते हैं तो निराश न हों. हमारे टॉपर इंस्टिट्यूट में ही कई इंजीनियर्स हैं जिन्होंने काफी बाद में अपनी तैयारी शुरू की लेकिन उन्हें विभिन्न आईआईटीज में एडमिशन मिला. लेकिन, अगर आप अपने दोस्तों से काफी बाद में विभिन्न कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स के लिए गंभीरतापूर्वक अपनी तैयारी शुरू करते हैं तो आपको अपने खोये हुए समय के नुकसान को पूरा करने के लिए ज्यादा कठोर मेहनत करनी पड़ेगी.

2. स्टडी प्लान्स और स्ट्रेटेजीज बनाना है जरुरी

किसी भी कॉम्पिटीटिव एग्जाम के लिए तैयारी शुरू करने से पहले आपको अपनी जरूरत के अनुसार एक प्लान और स्ट्रेटेजी अवश्य बना लेनी चाहिए. इसके लिए पहला कदम यह कि आप अपने टारगेट-टेस्ट्स के डिफिकल्टी लेवल से अच्छी तरह परिचित हो जायें. अपना मुल्यांकन करें कि आप इस समय कितने सक्षम हैं और अपेक्षित स्किल्स को प्राप्त करने के लिए आपको कौन-सी एप्रोच अपनानी चाहिए? आपको सेल्फ-स्टडी और प्रैक्टिस के लिए एक दिन में कुल कितने घंटे पढ़ना होगा? इस बात का पूरा ध्यान रखें कि आपका प्लान इतना सख्त न हो कि आप प्रेशर महसूस करें और अपने प्लान के मुताबिक अपनी स्टडीज न कर सकें या फिर, आपका प्लान ऐसा भी न हो कि आपका काफी समय खाली रहे.

आप अपने डिफिकल्ट विषयों के बारे में भी पहले से अच्छी तरह विचार कर लें और उन विषयों के लिए कुछ अधिक समय निर्धारित करें. अगर जरुरी हो तो एक हाई-लेवल प्लान बनाने के साथ ही एक लो-लेवल प्लान भी बनाएं जो हाई लेवल प्लान का ब्रेक-अप हो. आपका हाई-लेवल प्लान आपका ओवरऑल प्लान होना चाहिए जोकि पूरे सिलेबस को 3 फेजेज – लर्निंग, प्रक्टिसिंग और रिवाइजिंग – में बांटे. आपका लो-लेवल प्लान अलग-अलग विषयों, मोड्यूल्स और चैप्टर्स के अनुसार हो और प्रत्येक कार्य के लिए उपयुक्त समय निश्चित करे. आप एक महीने तक लो-लेवल प्लान से शुरू कर सकते हैं और फिर, हर महीने अपने हाई-लेवल प्लान के अनुसार ही लो-लेवल प्लान बना सकते हैं.

3. याद करने के बजाय विषय को समझने पर फोकस करें

जेईई, एनईईटी और सीपीटी जैसे एग्जाम्स बहुत ज्यादा मुश्किल होते हैं जो आपके एनालिटिकल स्किल्स की जांच करते हैं. आप ये एग्जाम्स सिर्फ कुछ कॉन्सेप्ट्स पढ़कर और याद करके पास नहीं कर सकते. आपको न केवल ये कॉन्सेप्ट्स समझने होंगे बल्कि इन कॉन्सेप्ट्स को एनालाइज भी करना होगा और विभिन्न कॉन्सेप्ट्स के आपसी संबंध को समझना होगा. ऐसा करने पर आपको विभिन्न कॉन्सेप्ट्स की काफी अच्छी समझ प्राप्त हो जायेगी.

आप अपनी 8 वीं क्लास के बाद पढ़े हुए विषयों के बेसिक कॉन्सेप्ट्स की काफी अच्छी जानकारी प्राप्त करें क्योंकि इन एग्जाम्स में पूछे जाने वाले कॉन्सेप्ट्स की आधारभूत जानकारी यही कॉन्सेप्ट्स हैं. अगर आपने कम उम्र में अपनी तैयारी शुरू कर दी है तो कोर-सब्जेक्ट्स की तैयारी शुरू करने से पहले आपको इन कॉन्सेप्ट्स को रिवाइज करने के लिए काफी समय मिल जाएगा.

इसके अलावा, कॉन्सेप्ट्स को केवल रटने से डिग्री लेवल पर भी आपकी बेसिक जानकारी स्ट्राँग नहीं होगी जिससे अंततः आपके स्टडी संबंधी विकास में बाधा उत्पन्न होगी.

4. प्रैक्टिस सफलता की कुंजी है

अब, जब आपने अपने कॉन्सेप्ट्स को अच्छी तरह समझ कर याद कर लिया है तो आप प्रैक्टिस शुरू कर दें. अपने फ्रेंड्स और पीअर्स को ये कॉन्सेप्ट्स समझाने शुरू करें. इससे आपकी बेसिक जानकारी काफी मजबूत बनेगी.

इसके बाद, आप सब्जेक्ट या टॉपिक वाइज प्रैक्टिस टेस्ट्स शुरू कर सकते हैं. कॉन्सेप्ट्स और अपनी समझ के आधार पर प्रश्नों को सॉल्व करने की कोशिश करें. प्रश्नों को बार-बार सॉल्व करने की प्रैक्टिस करने से आप महारत हासिल कर लेंगे. फिर, आप कम समय में ज्यादा प्रश्न सॉल्व कर सकेंगे.

एक बार सिलेबस खत्म करने के बाद, अधिक से अधिक मॉक टेस्ट और प्रीवियस इयर क्वेश्चन पेपर्स सॉल्व करने की कोशिश करें. ऐसा करने पर आपको वास्तविक एग्जाम्स देने का अनुभव प्राप्त होगा और आप अपनी ओवरऑल एग्जाम स्ट्रेटेजी बना सकेंगे. जितने ज्यादा मॉक टेस्ट आप सॉल्व करेंगे, उतने अधिक वक्त तक आप प्रेशर में ध्यान से काम कर सकेंगे.

5. अपने समय का सदुपयोग करें और प्लान को फॉलो करें

प्लान बनाने के बाद सबसे महत्वपूर्ण होता है अपने प्लान के मुताबिक स्टडीज जारी रखना. इस स्थिति में टाइम-मैनेजमेंट सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है. टाइम-मैनेजमेंट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अपने लिए सबसे उपयुक्त स्ट्रेटेजी तैयार करना है. कुछ स्टूडेंट्स को लगता है कि वे थोड़ी-थोड़ी देर करके अच्छी तरह स्टडीज कर सकते हैं जिससे उन्हें रिलैक्स होने के लिए भी समय मिल जायेगा. आप सुबह या रात में अपनी सुविधा के अनुसार स्टडीज कर सकते हैं. लंबे ब्रेक्स लेने से बचें लेकिन, कुछ समय एक्सरसाइज, मनोरंजन और रिलैक्स होने को जरुर दें. कोई गेम या हॉबी चुनें और कुछ समय अपनी किताबों से दूर रहें. याद रखें कि, फोकस सहित स्टडीज का यह मतलब नहीं है कि आप लगातार पढ़ते ही रहें तथा अन्य एक्टिविटीज को बिलकुल छोड़ ही दें. एक्स्ट्रा करीकुलर एक्टिविटीज और स्टडीज के बीच बढ़िया संतुलन से आप अपनी स्टडीज ज्यादा अच्छी तरह कर सकेंगे.

6. अपनी गलतियों से सीखें

अंधाधुंध प्रैक्टिस क्वेश्चन्स या मॉक टेस्ट सॉल्व करना ही काफी नहीं. आप दुबारा से वही गलतियां करते रहेंगे. हरेक टेस्ट के बाद, पता करें कि आपने कहां गलती की है और फिर एक बार उस कॉन्सेप्ट को रिवाइज करें. उन सब्जेक्ट्स और टॉपिक्स का पता लगायें जहां आप अक्सर गलती कर रहे हैं.

वास्तव में, आजकल कई एजुकेशन एप्स टेस्ट्स के दौरान आपके व्यवहार को एनालाइज करके आपकी परफॉरमेंस का गहराई से एनालिसिस करते हैं. इससे आपको अच्छी तरह पता चल जाएगा कि किन टॉपिक्स को आपको फिर रिवाइज करना चाहिये और फिर, आप ज्यादा संबद्ध टॉपिक्स में माहिर हो जायेंगे. इसलिये, अपने सभी डाउट्स और क्वेरीज का समाधान कर लें.

7. अपने कन्सेप्ट्स को रिवाइज करें

अधिक से अधिक मॉक टेस्ट और प्रीवियस इयर क्वेश्चन पेपर्स सॉल्व करने के बाद, कन्सेप्ट्स को रिवाइज करने के लिए फिर समय निकालें. ऐसा करने पर कम पूछे जाने वाले कन्सेप्ट्स को आप एक बार फिर अच्छी तरह समझ लेंगे. अगर फाइनल एग्जाम में उक्त कन्सेप्ट्स से प्रश्न पूछे जायें तो आप उन्हें अच्छी तरह सॉल्व कर सकेंगे. असल में, यहां एजुकेशन एप्स टेस्ट्स स्टूडेंट्स की काफी मदद कर सकते हैं क्योंकि जिन स्टूडेंट्स ने इन एजुटेक प्लेटफॉर्म्स को सब्सक्राइब किया हो, वे हजारों वीडियो लेक्चर्स देख सकते हैं और अपने नोट्स के ढेर को देखे बिना ही अपने कॉन्सेप्ट्स को जितनी बार भी चाहें, उतनी बार रिवाइज कर सकते हैं.

अब, आपके पास भारत के विभिन्न कॉम्पिटीटिव एग्जाम्स को पास करने के लिए एक कम्पलीट स्ट्रेटेजी मौजूद है. ऊपर दी गई स्ट्रेटेजीज और एडवाइस का पालन करके आप निश्चित रूप से भारत के किसी भी कॉम्पिटीटिव एग्जाम के लिए एक सफल ‘स्टडी स्ट्रेटेजी’ बनाने में सक्षम हो जायेंगे.

लेखक के बारे में:

मनीष कुमार ने वर्ष 2006 में आईआईटी, बॉम्बे से मेटलर्जिकल एंड मेटीरियल साइंस में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त की. उसके बाद इन्होंने जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, यूएसए से मेटीरियल्स साइंस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री प्राप्त की और फिर इंडियन स्कूल फाइनेंस कंपनी ज्वाइन कर ली, जहां वे बिजनेस स्ट्रेटेजीज एंड ग्रोथ के लिए जिम्मेदार कोर टीम के सदस्य थे. वर्ष 2013 में, इन्होंने एसईईडी स्कूल्स की सह-स्थापना की. ये स्कूल्स  भारत में कम लागत की के-12 एजुकेशन की क्वालिटी में सुधार लाने पर अपना फोकस रखते हैं ताकि क्वालिटी एजुकेशन सभी को मुहैया करवाई जा सके. वर्तमान में ये टॉपर.कॉम के प्रोडक्ट – लर्निंग एंड पेडागॉजी विभाग में वाईस प्रेसिडेंट हैं.

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