Search

विजन के साथ बिजनेस

Jul 16, 2018 18:48 IST
How to develop a Business with a Vision?
श्रुति गोचवाल
सह-संस्थापक - जैपफ्रेश

देश की मीट इंडस्ट्री गैर-संगठित है। उस पर पुरुषों का ही दबदबा रहा है। लेकिन गुरुग्राम की श्रुति गोचवाल ने इस धारणा को तोड़कर इंडस्ट्री में प्रवेश किया। ऑनलाइन फ्रेश मीट डिलीवरी स्टार्टअप जैपफ्रेश के जरिये वह ग्राहकों तक फ्रेश रॉ एवं रेडी टु कुक मीट पहुंचा रही हैं। हाल ही में डाबर इंडिया एवं सिडबी वेंचर कैपिटल ने इसमें 20 करोड़ रुपये का निवेश किया है। कंपनी की सह-संस्थापक श्रुति के अनुसार उद्यमिता में विजन बहुत अहमियत रखता है...

मेरे पिता बैंकिंग सर्विस में थे, लेकिन वीआरएस लेकर रीयल एस्टेट कारोबार में आ गए। मैं भी हमेशा से कुछ अपना क्रिएट करना चाहती थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग करने के बाद 2012 में एथनिक वियर का बिजनेस शुरू किया। अच्छा रिस्पॉन्स मिला। लेकिन एक वर्ष बाद ही मुझे बोन ट्यूमर डायग्नोस हुआ। दो सर्जरी के बाद उसे हटाया जा सका। इससे कारोबार बंद करना पड़ा। यही वह समय था, जिसने मुझे और मजबूत बनाया। ठीक होने पर थोड़े समय के लिए मैंने मोबीक्विक कंपनी ज्वाइन की। यहीं दीपांशु मनचंदा से मुलाकात हुई और मैं दोबारा से अपने सपने को पूरा करने में जुट गई।

पापा के सपोर्ट से बढ़ी

एक दिन मैं यूं ही गाजीपुर मुर्गा मंडी गई, जो देश का सबसे बड़ा चिकेन मार्केट है। वहां रोजाना लाखों मुर्गे काटे जाते हैं। लेकिन वहां का चक्कर लगाने के बाद लगा कि बस भाग जाऊं। कई अन्य स्थानीय बूचड़खानों का दौरा करने पर वहां की स्थिति भी संतोषप्रद नहीं मिली। तभी लोगों तक फ्रेश मीट पहुंचाने का आइडिया आया और 2015 में मैंने दीपांशु के साथ मिलकर ‘जैपफ्रेश’ लॉन्च किया। मेरे फैसले पर लोगों ने सवाल उठाए। रिश्तेदारों का कहना था कि शादी की उम्र में बिजनेस क्यों करना और वह भी मांस से जुड़ा हुआ? लेकिन तब पापा ने सपोर्ट किया। हालांकि वे स्टार्टअप में जोखिम को देखते हुए थोड़े पसोपेश में थे। हमारे बीच लंबी बहस एवं विचार-मंथन हुए। आखिर में उन्हें राजी होना पड़ा। आज वे मेरे मेंटर के साथ-साथ कंपनी के शेयरहोल्डर भी हैं। वे हमेशा यही कहते हैं कि कभी किसी को धोखा मत देना और न ही गलत करना।

महिलाएं होती हैं जन्मजात उद्यमी

देश की मीट इंडस्ट्री पुरुष प्रधान रही है। यहां स्क्रैच से कुछ भी शुरू करना आसान नहीं था। सही फार्म का चुनाव करना या ऑपरेशन का ब्लू प्रिंट तैयार करना चुनौती रहा। वेंडर्स को मुझे स्वीकार करने में समय लगा, क्योंकि वे किसी महिला से डील करने के आदी नहीं थे। शुरुआत में मैं हर स्तर पर सक्रिय रही। मैं मानती हूं कि प्रत्येक महिला जन्मजात उद्यमी होती है। वह जिस तरह से अपने घर-परिवार एवं प्रोफेशनल लाइफ को मैनेज करती है, वही उसे एक परफेक्ट बिजनेस वूमन बनाती है। इसके लिए उन्हें सिर्फ भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचना चाहिए।

क्वालिटी एवं टेक्नोलॉजी पर फोकस

मीट इंडस्ट्री के ज्यादातर संगठित खिलाड़ी यानी कंपनियां एक्सपोर्ट पर ध्यान देती हैं। घरेलू बाजार पर उनका अधिक फोकस नहीं है। हमने इसी कमी को पूरा करने का निर्णय लिया। कंज्यूमर ड्रिवन कंपनी होने के नाते प्रोडक्ट की क्वालिटी के साथ किसी प्रकार का समझौता नहीं कर सकते। इसलिए अलग-अलग फॉम्र्स से ताजे एवं रसायनमुक्त मीट खरीदे जाते हैं। फिर उसे गुरुग्राम के स्टोरेज एवं प्रोसेसिंग यूनिट में रखा जाता है। प्रोडक्ट की ताजगी बनी रहे, वह हाइजनिक हो, इसके लिए इनोवेटिव पैकेजिंग टेक्निक का इस्तेमाल करते हैं। कोल्डचेन लॉजिस्टिक कंपनी के साथ टाईअप है, जिससे फ्रेश मीट डिलीवर होती है। टेक्नोलॉजी की मदद से हम किसानों, वेंडर्स एवं रिटेल चैनल्स को रियल टाइम में जोड़ने में सफल रहे हैं। सप्लाई चेन में उपयुक्त मानदंड एवं पारदर्शिता होने के कारण ही बाजार में विश्वसनीयता बनी है।

बातचीत : अंशु सिंह

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK