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अगर करनी है स्टार्टअप में जॉब तो अपनाएं ये लीडरशिप क्वालिटीज़

कुछ ऐसी लीडरशिप क्वालिटीज़ हैं जो हरेक स्टार्ट-अप एम्पलॉयी के लिए जरुरी हैं. ये लीडरशिप क्वालिटीज़ एम्पलॉयी की पर्सनल और करियर ग्रोथ के साथ-साथ संबंधित स्टार्टअप फर्म के सम्पूर्ण विकास के लिए भी सहायक होती हैं.   

Jul 5, 2019 12:25 IST
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If you want to work in a Startup then develop these Leadership Qualities
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नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज (NASSCOM) के मुताबिक भारत में वर्ष 2017 से वर्ष 2018 तक 108% तक विकास हुआ है. वर्ष 2017 में स्टार्टअप्स के लिए 2 बिलियन अमरीकी डॉलर टोटल फंडिंग की गई और वर्ष 2018 के दौरान 4.2 बिलियन अमरीकी डॉलर तक यह टोटल फंडिंग पहुंच गई. वर्ष 2018 में हमारे देश में 1200 से अधिक स्टार्टअप्स शुरू हुए. NASSCOM के मुताबिक भारत में कुल 7200 स्टार्टअप फर्म्स हैं. इसी तरह, इन स्टार्टअप कंपनियों में 40 हजार नई डायरेक्ट जॉब्स क्रिएट हुई और इनडायरेक्ट जॉब्स में 3 गुना तक बढ़ोतरी हुई. इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि, पूरी दुनिया में 400 से अधिक स्टार्टअप्स का विस्तार हुआ है. इनमें प्रमुख कंपनियां ट्रेवल एंड हॉस्पिटैलिटी कंपनी ओयो, कैब एग्रीगेटर ओला, एजुटेक बीजू’स और ज़ोमेटो आदि हैं. हमारे देश में अभी लगभग 5500 स्टार्टअप्स हैं और ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि वर्ष 2020 तक भारत में स्टार्टअप्स की संख्या लगभग 11500 हो जायेगी जो कम से कम 2.5 लाख लोगों को रोज़गार उपलब्ध करवाएंगे. आपको यह जानकर भी काफी प्रसन्नता होगी कि पॉलिसी बाज़ार, पाइन लैब्स, स्विग्गी, ओयो रूम्स, फ्रेशवर्क्स, बाईजू, बिग बास्केट, पेटीएम मॉल और रिविगो जैसे स्टार्टअप्स अब  भारत के क्लब ऑफ़ यूनीकॉर्न्स फॉर स्टार्टअप्स में शामिल हो चुके हैं. इन बातों से हमें अपने देश सहित दुनिया भर में आज स्टार्ट-अप्स का महत्व पता चलता है.

अब, यह भी सच है कि किसी भी कंपनी या फर्म का विकास उसकी ‘मैन पॉवर’ अर्थात एम्पलॉईज़ की योग्यता, काबिलियत, वर्क एक्सपीरियंस और उनके काम करने के जोश पर काफी हद तक निर्भर करता है. किसी स्टार्टअप फर्म में न्यू वेंचर, आउटसाइड इन्वेस्टमेंट और कैपिटल क्रंच जैसे कई कारणों से एक ही एम्पलॉयी को एक से अधिक जॉब प्रोफाइल्स का काम संभालना पड़ता है जैसेकि फ्रंट डेस्क एम्पलॉयी किसी स्टार्टअप फर्म में बिलिंग, इनवॉयस या एकाउंट्स का काम भी संभाल सकते हैं और सेल्स एंड मार्केटिंग मैनेजर प्रोडक्ट हेड का काम भी संभाल सकते हैं. ऐसे अनेक कारणों से आजकल स्टार्टअप फर्म्स के एम्पलॉयर्स अपने यहां ऐसे एम्पलॉईज़ को जॉब पर हायर करना चाहते हैं जो एक से ज्यादा जॉब प्रोफाइल्स का काम संभाल सकें और इन एम्पलॉईज़ में कुछ लीडरशिप क्वालिटीज़ हों जैसेकि:

  • सही निर्णय और जोखिम उठाने की क्षमता

अब, चूंकि स्टार्टअप्स एक नए आईडिया को साकार करने के लिए कोशिश करते हैं इसलिए, हरेक स्टार्टअप के एंटरप्रिनियोर अपनी टीम में ऐसे एम्पलॉईज़ को शामिल करना चाहते हैं जो कारोबार और वर्क फील्ड में आने वाली सभी चुनौतियों का डटकर सामना करने में सक्षम हों और फर्म की जरूरत तथा परिस्थियों के अनुसार सही निर्णय ले सकें. ऐसे एम्पलॉईज़ किसी भी फर्म की ‘रियल एज़ेट’ होते हैं.

  • एकाउंटेबिलिटी और कॉस्ट कटिंग्स

किसी भी एम्पलॉयी से अपने काम के प्रति पूरी जिम्मेदारी और एकाउंटेबिलिटी की उम्मीद रखी जाती है. अपनी जॉब प्रोफाइल के प्रति ईमानदार रवैया रखना और निर्धारित समय सीमा में अपना हरेक काम पूरा करना हरेक एम्पलॉयी का पहला फर्ज़ होता है. एम्पलॉईज़ की एकाउंटेबिलिटी उनकी वर्क परफॉरमेंस को निखारती है इसलिए आप अपनी जॉब प्रोफाइल में एकाउंटेबिलिटी की क्वालिटी को जरुर शामिल कर लें.

इसी तरह, कॉस्ट कटिंग्स हरेक कंपनी और विशेष रूप से स्टार्टअप फर्म्स के लिए बहुत फायदेमंद होती हैं. जो एम्पलॉईज़ कम खर्च पर ज्यादा काम और प्रोडक्शन करते हैं उनसे कंपनी को दोहरा फायदा होता है. इसलिए, आप अपने काम करने के तरीके में कॉस्ट कटिंग के आस्पेक्ट को भी अवश्य शामिल कर लें.

  • प्रॉब्लम सॉल्विंग एटीट्यूड

किसी भी स्टार्टअप फर्म में आपके एम्पलॉयर्स आपसे केवल उन्हीं प्रॉब्लम्स के बारे में चर्चा करना चाहते हैं, जिन प्रॉब्लम्स के सॉल्यूशन्स भी आपके पास हों. जो एम्पलॉईज़ अपने एम्पलॉयर्स को विभिन्न प्रॉब्लम्स के सॉल्यूशन्स सुझाते हैं और जरूरत पड़ने पर समुचित निर्णय लेते हैं, वास्वत में वे अपने एम्पलॉयर्स की सिरदर्दी (परेशानी) काफी कम कर देते हैं. यह ठीक है कि, अपने काम या फर्म के कारोबार के सामने आने वाली प्रॉब्लम्स के बारे में चर्चा करना बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण है उन प्रॉब्लम्स को प्रभावी ढंग से सॉल्व करने के तरीके सुझाना.  

  • फंक्शनल नॉलेज और मैनेजरियल स्किल्स

हरेक स्टार्टअप फर्म ऐसे एम्पलॉईज़ की तलाश करती है जो अपनी फील्ड की फंक्शनल नॉलेज रखने के साथ-साथ अन्य संबंधित जॉब प्रोफाइल्स के कामकाज को निपटाने में भी कुशल हों. यंग स्टार्टअप एंटरप्रिनियोर ऐसे लोग होते हैं जो अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 24x7 वर्किंग स्टाइल में काम करने को तैयार रहते हैं इसलिए, वे ऐसे एम्पलॉईज़ को परेफरेंस देते हैं जो उनकी फर्म को अपने दिन-रात देने को तैयार रहें और अपनी वर्क टीम्स तैयार करके फर्म के टारगेट्स को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने में कुशल हों. दूसरे शब्दों में, स्टार्टअप फर्म्स में कोई भी जॉब ज्वाइन करने के लिए आपके पास अपनी वर्क फील्ड की फंक्शनल नॉलेज और अच्छे मैनेजरियल स्किल्स होने ही चाहिए.

  • कम्युनिकेशन एंड सोशल मीडिया एक्सपर्ट

स्टार्टअप फर्म्स की सेल्स और मार्केटिंग का दारोमदार एम्पलॉईज़ की कम्युनिकेशन स्किल्स पर बहुत हद तक निर्भर करता है. इसी तरह, आजकल फेसबुक, ट्विटर और इन्स्टाग्राम सहित सोशल मीडिया का जमाना है. इसलिए, हरेक स्टार्टअप फर्म को अपने बिजनेस इंटरेस्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए ऐसे एम्पलॉईज़ की आवश्यकता होती है जो स्ट्रोंग कम्यूनिकेटर होने के साथ-साथ सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स भी हों.

  • कंपनी और कस्टमर्स के हितों का रक्षक

आजकल के इस दौर में कस्टमर को किंग का दर्जा मिला हुआ है और हरेक कंपनी अपने कस्टमर्स की जरूरतों के मुताबिक अपने कारोबार में बदलाव करती रहती हैं. जो कंपनी अपने कस्टमर्स के हितों को जितना ज्यादा महत्व देती है, वह कंपनी अपने कस्टमर्स के बीच उतनी अधिक लोकप्रिय हो जाती है. इसी तरह, एम्पलॉईज़ अपनी फर्म या कंपनी के हितों को भी अनदेखा नहीं कर सकते हैं. इसलिए, वे एम्पलॉईज़ ही मोस्ट सूटेबल एम्पलॉईज़ साबित होते हैं जो अपनी कंपनी और कंपनी के कस्टमर्स के हितों को बराबर महत्व दें.

  • रिसर्च, इनोवेशन एंड लर्निंग एटीट्यूड

आजकल टेक्नोलॉजिकल एडवांसमेंट किसी भी कारोबार में तरक्की की पहली शर्त है. रोज़ाना साइंस और टेक्नोलॉजी में नए-नए एक्सपेरिमेंट्स होते ही रहते हैं जो हमारे कारोबार में तरक्की के परिचायक हैं. एक समय केवल फ़ोन कॉल्स और मैसेज करने के लिए बने मोबाइल फ़ोन्स अब स्मार्ट फ़ोन्स बन चुके हैं जो हमारे लिए मिनि कंप्यूटर, ई-वॉलेट, कैलकुलेटर, वाच, टीवी, रेडियो, सिनेमा, वीडियोज़, गेम्स एंड एंटरटेनमेंट, 24x7 सोशल मीडिया कनेक्टर जैसे कई काम एक-साथ कर रहे हैं. यह रिसर्च और इनोवेशन का ही नतीजा है. अब, स्टार्टअप फर्म्स भी क्योंकि नए आइडियाज को साकार करती हैं, इसलिए इनके एम्पलॉईज़ में रिसर्च, इनोवेशन और लर्निंग एटीट्यूड जैसी क्वालिटीज़ जरुर होनी चाहिए. वास्तव में, किसी स्टार्टअप की सफलता उसके एम्पलॉईज़ के टैलेंट और वर्क परफॉरमेंस का ही परिणाम होता है.

  • टीम लीडर, फ्लेक्सिबल और काम के प्रति जोशीला रवैया

एक सफल टीम लीडर बनने के लिए आपको अपनी टीम के सभी सदस्यों के प्रति एक जैसा नजरिया और व्यवहार रखना चाहिए. आपको अपनी टीम के हर सदस्य को व्यक्तिगत-तौर पर जानना और समझना चाहिए. इससे आप अपनी टीम के सदस्यों में टीम-स्पिरिट का विकास करने में सफल हो जाते हैं. ऐसे प्रोफेशनल्स जो हमेशा अपनी टीम को मोटीवेट करते हैं, अन्य टीम लीडर्स की तुलना में अपना टारगेट बड़ी आसानी से पूरा कर लेते हैं. स्टार्टअप वर्क कल्चर में काम को लेकर फ्लेक्सिबल रवैया अपनाना भी बहुत जरुरी है. आपको सनडेज़ और होलिडेज़ में भी काम करना पड़ सकता है.  

हर कोई ऐसे एम्पलॉईज़ के साथ काम करना पसंद करता है जो अपनी जॉब के प्रति हमेशा उत्साह और जोश से भरे रहें और अपना काम पूरी लगन के साथ करें. एक अच्छे लीडर की पहचान इस बात से भी होती है कि वह अपने इस जोश और लगन को सिर्फ़ अपने तक ही सीमित नहीं रखता बल्कि अन्य सभी एम्पलॉईज़ में भी ये क्वालिटीज़ विकसित करने की पूरी कोशिश करता रहता है.

  • क्रिएटिव, प्रोडक्टिव और पॉजिटिव एटीट्यूड

किसी स्टार्टअप कंपनी में आप पहले से ही कारोबार के उतार-चढ़ाव के बारे में ठोस अनुमान नहीं लगा सकते. नए आइडियाज़ साकार होने से पहले ही पुराने या बेकार साबित हो जाते हैं, वर्क शेड्यूल रोज़ाना एक जैसा नहीं रह पाता है और आपको अपनी जॉब प्रोफाइल से बिलकुल अलग काम करना पड़ सकता है. ऐसे में, क्रिएटिव, प्रोडक्टिव और पॉजिटिव एटीट्यूड रखने वाले एम्पलॉईज़ को परेफरेंस दी जाती है. किसी भी स्टार्टअप फर्म का वर्क कल्चर टिपिकल नहीं होता है इसलिए एम्पलॉयर्स मल्टीटास्कर एम्पलॉईज़ को अच्छे सैलरी पैकेज के साथ अपनी स्टार्टअप फर्म में जॉब ऑफर करते हैं.

  • प्रेशर हैंडलर

जी हां! आजकल पूरी दुनिया में 24x7 का वर्क कल्चर प्रचलित हो रहा है और हमारा देश भी इससे अछूता नहीं है. आपके एम्पलॉयर आपसे यह उम्मीद रखते हैं कि ऑफिस या फर्म के काम के लिए आप 24 घंटे उपलब्ध रहें. इसी तरह, स्टार्टअप्स में एम्पलॉईज़ कम होते हैं और उन्हें कई प्रोजेक्ट्स तथा जॉब प्रोफाइल्स का काम संभालना पड़ सकता है. ऐसे में, काम का प्रेशर और स्ट्रेस महसूस करना बिलकुल सामान्य बात है. आपको निर्धारित समय-सीमा के भीतर कई प्रोजेक्ट्स पूरे करने होते हैं. इसलिए, स्टार्टअप फर्म के एम्पलॉयर्स अपनी फर्म में प्रेशर हैंडलर एम्पलॉईज़ को हायर करना पसंद करते हैं.   

बीते कुछ वर्षों में हमारे देश के साथ-साथ दुनिया-भर में ‘स्टार्टअप वर्क कल्चर’ काफी विकसित हुआ है और अब स्टार्टअप फर्म्स अपने एम्पलॉईज़ को हायर करते समय कई फैक्ट्स पर ध्यान देती हैं. इसलिए, अगर आप भी किसी स्टार्टअप कपनी में जॉब ज्वाइन करने का सपना देख रहे हैं तो ऊपर दी गई लीडरशिप क्वालिटीज़ को अपनी प्रोफेशनल पर्सनैलिटी का जरुरी हिस्सा बना लीजिए. ये लीडरशिप क्वालिटीज़ आपके करियर गोल्स अचीव करने में आपकी मदद करने के साथ ही विभिन्न स्टार्टअप फर्म्स में आपके लिए जॉब हासिल करने के चांसेज बढ़ा देंगी. वास्तव में ये सभी लीडरशिप क्वालिटीज़ एम्पलॉयी – एम्पलॉयर के परस्पर हित पूरे करती हैं.

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