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जानें कौन सी कक्षा से शुरू करनी चहिये प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

Aug 27, 2018 14:55 IST
When to start preparing for JEE/NEET
When to start preparing for JEE/NEET

इंजीनियरिंग हो या मेडिकल दोनों ही फील्ड कुछ ऐसे हैं जिनमें एडमिशन के लिए छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है. तथा जब भी बात इन परीक्षाओं की तैयारी पर आती है तो छात्रों के अन्दर सबसे पहले ये सवाल उठता है कि आखिर सबसे उचित समय इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए क्या हो सकता है?

कई बार ये भी देखा गया है कि छात्र इन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कक्षा 6, 7 और 8वीं से ही शुरू कर देते हैं, जहाँ उन्हें स्कूल के बाद अपना वीकेंड कोचिंग क्लासेज में व्यतित करना पड़ता है. तथा जिस कारण छात्र कहीं न कहीं बचपन के असली पहचान को खोने लगते हैं. दरअसल यहाँ यह कहने का मतलब केवल इतना है कि कक्षा 6, 7 या 8वीं में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बच्चों के अलग से कोचिंग क्लासेज की जगह हमें केवल इस बात पर ध्यान देना चाहिए की छात्रों के ग्रोथ पर कोई फर्क न पड़े तथा साथ ही साथ उनके पाठ्यक्रम में जो भी उपलब्ध है वह उन्हें अच्छी तरह समझ आ रहा है या नहीं?

आइये अब जानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षा के तैयारी का उचित समय एक छात्र के लिए क्या होना चाहिए?

अक्सर कहा जाता है किसी भी काम को जितनी जल्दी शुरू करो उतना ही अच्छा होता है. यहाँ हम आपको बतायेंगे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का सही समय या एक छात्र की एक आइडियल ऐज जब वे अपनी तैयारी शुरू कर सकते हैं.

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कक्षा 9वीं से शुरुआत करें:

कक्षा 9वीं के छात्र को अपने रूचि और करियर मार्ग को चुनना तथा समझना कक्षा 6,7 या 8वीं के छात्रों की तुलना में आसान होता है. यह एक ऐसा समय है जब छात्र अपने रूचि के अनुसार करियर की दिशा सुनिश्चित करने में समक्ष होते हैं. साथ ही यदि किसी छात्र के बेसिक्स पिछली कक्षाओं के क्लियर हैं तो वह आसानी से कक्षा 9वीं से अपने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू कर सकता है. अर्थात मेडिकल तथा इंजीनियरिंग प्रतियोगी परीक्षा के बेसिक्स कक्षा 9वीं से ही शुरू होते हैं.

यहाँ हम छात्रों के लिए कक्षा 9वीं से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के ख़ास फायदे भी अंकित कर रहे हैं:

1. छात्र अपने कोर्स तथा तैयारी को लेकर ज्यादा फोकस होते हैं.

2. कक्षा 9वीं से प्रतियोगी परीक्षा की शुरुआत करने से आपके सभी विषयों के बेसिक्स क्लियर आसानी से हो जाते हैं जिन्हें आप विस्तार रूप में मेडिकल या इंजीनियरिंग की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में भी पढेंगे.

3. सभी विषयों पर अपनी अच्छी पकड़ बनाने के लिए कक्षा 9वीं के छात्रों के पास पर्याप्त समय होता है.

4. कठिन सवालों पर प्रैक्टिस, टाइम मैनेजमेंट, छोटी-छोटी होने वाली गलतियों इत्यादि को सुधारने के लिए भी पर्याप्त समय होता है.

5. सभी पढ़ें हुए टॉपिक्स को अच्छी तरह दोहराने के लिए भी काफी समय मिलता है.

दरअसल किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए यह ज़रूरी नहीं की छात्र कोचिंग क्लासेज ज्वाइन करें या पूरे-पूरे दिन पढ़ाई में ही अपना दे. बस छात्रों को यह ध्यान में रखना चाहिए की कक्षा में जो भी पढ़ाया जा रहा है उसे अच्छी तरह समझें. जो विषय या टॉपिक कठिन लग रहें हैं उसे समझने की कोशिश करें तथा साथ ही साथ उन टॉपिक्स पर आधारित प्रश्नों को अच्छी तरह प्रैक्टिस करें ताकि उनका कांसेप्ट उन टॉपिक्स पर अच्छी तरह क्लियर हो.

कक्षा 9वीं से जब छात्र अपने करियर का मार्गदर्शन तय कर उसकी तैयारी शुरू कर देते हैं तो कक्षा 10वीं की परीक्षा के बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को उसकी दिशा तक लेजाने में कक्षा 11वीं तथा 12वीं का समय एक अहम भूमिका निभाती है. मेडिकल/ इंजीनियरिंग के प्रतियोगी परीक्षा का सिलेबस कक्षा 11वीं तथा 12वीं के ही पूरे पाठ्यक्रम पर आधारित होता है. तो यह एक ऐसा समय होता है जब छात्र कक्षा 11वीं की परीक्षा के साथ-साथ अपने इंजीनियरिंग/मेडिकल की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी को ज्यादा अच्छी तरह समय दे सकते हैं.

यहाँ हम कक्षा 11वीं तथा 12वीं के छात्रों के लिए कुछ खास टिप्स भी बताने जा रहे हैं जोकि छात्रों के प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में काफी हद तक मददगार साबित होंगे:

1. अपने किताबों को लेकर ज्यादा कंफ्यूज न रहें, ncert की किताबों को अच्छी तरह पढ़ें. रेफ़रेंस बुक्स किसी भी विषय के लिए एक या दो से अधिक न चयन करें वरना आपकी दुविधा और बढ़ेगी.

2. गत-वर्षों के प्रश्न-पत्रों को अच्छी तरह हल करें इससे आपको काफी मदद मिलेगी.

3. समय-समय पर पढ़ें हुवे टॉपिक्स को अच्छी तरह दोहराएँ.

4. पढ़ाई करने के लिए एक समय सरणी तैयार करें.

5. आप जिस भी विषय में कमज़ोर हैं उसे अधिक समय दें, तथा जहाँ भी दुविधा है उसे समझने की कोशिश करें.

6. सभी महत्वपूर्ण सूत्रों तथा पॉइंट्स की एक सूचि बनाएं ताकि यदि आप कोई पॉइंट्स या कोई सूत्र भूल रहें हैं तो उसे दोहराना आसान हो.

7. जितना हो सके समय सीमा के अनुसार प्रैक्टिस पेपर्स, सैंपल पेपर्स आदि की प्रैक्टिस ज़रूर करें.

निष्कर्ष: आशा है कि आज हमारे द्वारा बताए गएँ सुझाव आपके लिए काफी हद तक मददगार साबित होंगे. ज़रूरत है तो बस इतनी की आप अपने करियर के लिए जो भी मार्ग चुने उसमें पूरी तरह से खुद को मोटीवेट रखें. सफलता तक पहुँचने के लिए जितनी मेहनत और प्रयास करना है उसे दृढनिश्चय के साथ करें. सफलता आपके कदम चूमेगी फिर चाहे वह कोई प्रतियोगी परीक्षा हो या आपके करियर से जुड़ा कोई और अहम फैसला.

शुभकामनाएं!!

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