LLB और LLM: भारत में लॉ की विभिन्न फ़ील्ड्स में उपलब्ध जॉब प्रोस्पेक्टस

अगर आप LLB और LLM डिग्री होल्डर्स हैं लेकिन आपको यह समझ नहीं आ रहा है कि लॉ की फ़ील्ड में LLB/ LLM की डिग्री लेने के बाद अब कौन-सा करियर ज्वाइन करें?......तो इस आर्टिकल में हम आपके लिए लॉ के खास करियर ऑप्शन्स की महत्त्वपूर्ण जानकारी पेश कर रहे हैं.

Created On: Nov 11, 2020 19:49 IST
Modified On: Nov 12, 2020 17:02 IST
Know the job prospects after LLB and LLM
Know the job prospects after LLB and LLM

बीते वर्षों में, भारत सहित पूरी दुनिया में लॉ की विभिन्न फ़ील्ड्स में उपलब्ध करियर ऑप्शन्स और करियर ग्राफ में बहुत बदलाव आया है.  भारत में LLB और LLM सर्वोच्च प्रोफेशनल लॉ डिग्रीज़ हैं. भारत की विभिन्न लॉ यूनिवर्सिटीज में 3 साल की LLB में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल करने के बाद ही एडमिशन मिलता है, जबकि 5 साल के LLB डिग्री कोर्स में स्टूडेंट्स अपनी 12 वीं क्लास पास करने के बाद एडमिशन ले सकते हैं. लेकिन इसके लिए उन्हें लॉ का एंट्रेंस टेस्ट पास करना होता है. LLB की डिग्री लेने के बाद लॉ स्टूडेंट्स 2 साल के LLM कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं.

यंग प्रोफेशनल लॉ की फील्ड में LLB और LLM की डिग्री हासिल करने के बाद, बार काउंसिल में अपना नाम रजिस्टर करवाकर, भारत की किसी भी अदालत में विभिन्न सिविल, क्रिमिनल या अन्य मुकदमों की पैरवी कर सकते हैं. लॉ की फील्ड में वकील और जज के करियर के अलावा भी अनेक करियर ऑप्शन्स मौजूद हैं. इस बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए आइये आगे ध्यान से पढ़ें यह आर्टिकल:

भारत में लॉ एंट्रेंस टेस्ट्स

किस लॉ कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, स्टूडेंट्स को विभिन्न एंट्रेंस टेस्ट्स जैसेकि, कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट - सीएलएटी (क्लैट), एलएसएटी इंडिया, एलएटी (लैट), जेएमआई लॉ एंट्रेंस एग्जाम, डीयू LLB एंट्रेंस एग्जाम, एआईबीई, बीएचयू यूईटी लॉ आदि में से कोई एक टेस्ट पास करना होता है. ये टेस्ट्स राष्ट्रीय और राज्य के लेवल्स पर आयोजित किये जाते हैं.

भारत में आप ज्वाइन कर सकते हैं ये प्रमुख लॉ में ग्रेजुएशन/ पोस्टग्रेजुएशन डिग्री कोर्सेज

LLB - बैचलर ऑफ़ लॉज़

हमारे देश में LLB कोर्स करने के लिए 2 ऑप्शन्स उपलब्ध हैं. पहला ऑप्शन 3 वर्ष की अवधि का कोर्स है और इस कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री है. दूसरा ऑप्शन अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट्स के लिए 5 वर्ष की अवधि का इंटीग्रेटेड कोर्स है.


LLB - बैचलर ऑफ़ लॉज़ (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स)

यह एक 3 वर्ष की अवधि का कोर्स है जिसके तहत 6 सेमेस्टर शामिल होते हैं और इस कोर्स के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री है.


LLM - मास्टर ऑफ़ लॉ

यह कोर्स 1 वर्ष या उससे अधिक वर्षों की अवधि का हो सकता है जिसमें 4 या उससे अधिक सेमेस्टर्स हो सकते हैं. इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए, स्टूडेंट्स के पास किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी से कम से कम 50% मार्क्स के साथ LLB की डिग्री होनी चाहिए.

आपके लिए भारत में उपलब्ध हैं ये प्रमुख लॉ स्पेशलाइजेशन:

  • सिविल लॉ:सिविल लॉ एक ऐसी लॉ की फील्ड है जिसके तहत इंडिविजुअल्स के प्राइवेट राइट्स, डाइवोर्स, चाइल्ड कस्टडी, प्रॉपर्टी ओनरशिप, कॉन्ट्रैक्ट्स से असहमति, पर्सनल और/ या प्रॉपर्टी डैमेज आदि से संबद्ध झगड़े सुलझाए जाते हैं. सिविल लॉ के मामले अधिकतर पब्लिक लॉ के बजाय प्राइवेट लॉ से संबंधित होते हैं.
  • क्रिमिनल लॉ:जिन लोगों को क्राइम्स को सॉल्व करने, इन्वेस्टीगेशन्स और एविडेंस इक्कट्ठे करने का शौक होता है, यह फील्ड उनके लिए बहुत उपयुक्त है. एक क्रिमिनल लॉयर का काम क्रिमिनल मामलों में आरोपित अपने क्लाइंट को रिप्रेजेंट या डिफेंड करना होता है. इस फील्ड में काफी अच्छी कमाई होती है लेकिन यह कुछ टेंशन वाली जॉब है.
  • इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ:इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी लॉ पेटेंट्स, कॉपीराइट्स और ट्रेडमार्क्स से संबद्ध मामलों को सुलझाता है. पेटेंट्स ऐसे खास राइट्स होते हैं जो किसी इन्वेंशन को सुरक्षित करते हैं. कॉपीराइट्स एक्सप्रेसिव आर्ट्स की सुरक्षा करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. इसी तरह, ट्रेडमार्क्स नामों के साथ ही प्रोडक्ट्स तथा कंपनियों के आइडेंटिफाइंग मार्क्स को सुरक्षित करते हैं.
  • कॉर्पोरेट लॉ:कॉर्पोरेट लॉ में डिग्री प्राप्त करने पर पेशेवर को बड़े कॉर्पोरेट ऑर्गेनाइजेशन्स के साथ कॉन्ट्रैक्ट्स, आर्डिनेंसेज, कॉर्पोरेट प्रिविलेजेज और अन्य संबद्ध टॉपिक्स पर सलाह मशवरा करने के अवसर मिलते हैं. किसी कॉर्पोरेट लॉयर की जिम्मेदारियों में मर्जर और एक्वीजीशन्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों में अपने क्लाइंट को एडवाइस देना या क्लाइंट के लीगल वर्क को हैंडल करना और कोर्ट की कारवाई के दौरान डिफेंस और प्रॉसिक्यूशन शामिल है.
  • साइबर लॉ:लॉ की फील्ड में साइबर लॉ अभी एक नया स्पेशलाइजेशन है. साइबर लॉ एक ऐसी फील्ड है जो गैर-कानूनी एक्टिविटीज या इंटरनेट के माध्यम से किये जाने वाले साइबर क्राइम्स से संबद्ध है.

टॉप इंडियन लॉ कॉलेज:

भारत के टॉप लॉ कॉलेजों की लिस्ट निम्नलिखित है:
• फैकल्टी ऑफ़ लॉ, दिल्ली विश्वविद्यालय
• एमिटी लॉ स्कूल, दिल्ली
• गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई
• नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया युनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू), बैंगलोर
• बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी
• अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़
• सिम्बायोसिस सोसायटी लॉ कॉलेज (एसएसएलसी), पुणे
• आईएलएस लॉ कॉलेज, पुणे
• नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, जोधपुर
• नेशनल लॉ इंस्टिट्यूट युनिवर्सिटी (एनएलआईयू), भोपाल

भारत में LLB और LLM डिग्री होल्डर्स के लिए करियर प्रोस्पेक्टस

LLB और LLM डिग्री होल्डर कैंडिडेट्स विभिन्न प्राइवेट और पब्लिक ऑर्गेनाइजेशन्स में लीगल एडवाइजर के तौर पर काम कर सकते हैं, विभिन्न कॉलेजों/ यूनिवर्सिटीज की लॉ फैकल्टी में पढ़ा सकते हैं, किसी एनजीओ के साथ काम कर सकते हैं और विभिन्न न्यूज़पेपर्स या टेलीविज़न चैनल्स में एक लीगल रिपोर्टर या लीगल एडिटर के तौर पर काम कर सकते हैं. ये लॉ ग्रेजुएट्स/ पोस्ट ग्रेजुएट्स किसी कॉर्पोरेट फर्म में किसी  बिजनेस लॉयर के तौर पर काम कर सकते हैं या किसी कोर्ट में वकील के तौर पर भी प्रैक्टिस कर सकते हैं. कोई लॉ ग्रेजुएट/ पोस्ट ग्रेजुएट कैंडिडेट विभिन्न लोक सेवा आयोगों द्वारा आयोजित एंट्रेंस एग्जाम्स पास करने के बाद देश की किसी अदालत में जज भी बन सकता है. कुछ वर्षों के वर्क-एक्सपीरियंस के बाद, लॉ ग्रेजुएट्स/ पोस्ट ग्रेजुएट्स पब्लिक प्रॉसीक्यूटर, सोलिसिटर जनरल या विभिन्न सरकारी विभागों और मंत्रालयों में भी काम कर सकते हैं. लॉ ग्रेजुएट्स विभिन्न एकेडेमिक्स और एनजीओ संस्थानों में टीचर्स और कंसलटेंट्स के तौर पर भी काम कर सकते हैं.

भारत में विभिन्न लॉ फ़ील्ड्स में जॉब प्रोफाइल्स

हमारे देश में लॉ में LLB और LLM की डिग्री होल्डर्स निम्नलिखित जॉब्स ज्वाइन कर सकते हैं:

  • जज: जज कोर्ट प्रोसीडिंग्स पूरी हो जाने और संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हैं.
  • सरकारी वकील: ये प्रोफेशनल्स सरकार के लिए और पुलिस विभाग के साथ मिलजुल कर काम करते हैं.
  • क्रिमिनल लॉयर: ये प्रोफेशनल्स क्रिमिनल लॉज़, आईपीसी, एविडेंस एक्ट और अन्य विभिन्न पीनल लॉज़ में स्पेशलाइज्ड पर्सन्स होते हैं.
  • सिविल लिटिगेशन लॉयर: ये प्रोफेशनल्स सिविल लॉज़ जैसेकि, टैक्सेशन लॉज़ और एक्सरसाइज लॉज़ में स्पेशलाइज्ड पर्सन्स होते हैं.
  •  डॉक्यूमेंट ड्राफ्टिंग लॉयर: ये प्रोफेशनल्स विभिन्न डॉक्यूमेंट्स जैसेकि, टर्म्स एंड कंडीशन्स, एग्रीमेंट्स और केस मटीरियल की ड्राफ्टिंग में स्पेशलाइज्ड पर्सन्स होते हैं.
  • कॉरपोरेट लॉयर: विभिन्न प्रकार के कॉर्पोरेट मसलों के दौरान टैक्स इश्यूज एवं अन्य प्रकार की समस्याओं का समाधान करना इन प्रोफेशनल्स का मुख्य काम होता है.
  • लेबर लॉयर: कर्मचारियों के अधिकार एवं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लेबर लॉ बनाया गया है. इन दिनों इस क्षेत्र से संबंधित समस्याएं अदालत में काफी संख्या में हैं. आप इसमें भी बेहतर करियर बना सकते हैं.
  • एन्वॉयरनमेंटल लॉयर: एन्वॉयरनमेंट लॉ में प्रकृति की तरफ से प्राप्त हुई चीजों जैसेकि, जंगल, पहाड़, नदियां, पेड़-पौधे और पशु-पक्षी आदि को नष्ट होने से बचाने की बात की जाती है. इन मामलों में कई बार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन दायर किये जाते हैं जिसके लिए एन्वॉयरनमेंटल लॉ में कुशल लॉयर्स की डिमांड होती है.
  • इंटरनेशनल लॉयर: इंटरनेशनल लॉ का अर्थ होता है अंतरराष्ट्रीय कानून. इसके तहत विभिन्न देशों  के राष्ट्रीय हितों के मध्य उत्पन्न होने वाली समस्याओं को कानून के द्वारा सुलझाया जाता है. यदि आपकी अंग्रेजी अच्छी है और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में रुचि है, तो यह फील्ड आपके लिए बढ़िया है.
  • एटॉर्नी जनरल: लंबा अनुभव रखने वाले लॉ एक्सपर्ट्स को भारत सरकार महान्यायवादी (एटॉर्नी जनरल) या डिप्टी एटॉर्नी नियुक्त करती हैं. इनका काम सुप्रीम कोर्ट या समकक्ष न्यायालयों में आश्यकतानुसार सरकार का पक्ष रखना और सरकारी मामलों की पैरवी करना होता है. राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर आगे बढ़ते समय उनके कानूनी पहलुओं पर केंद्र और राज्य सरकारें इनसे विचार-विमर्श करती हैं.
  • लीगल एडवाइजर: ये प्रोफेशनल्स लीगल ड्यूटीज, ऑब्लिगेशन्स और अन्य फर्मों के साथ संबद्ध कंपनियों के लीगल रिलेशन्स के संबंध में कंपनियों को  कंसल्टेंसी सर्विसेज ऑफर करते हैं.
  • लीगल एनालिस्ट: ये प्रोफेशनल्स लॉ या कॉर्पोरेट फर्म्स के लिए काम करते हैं और किसी कंपनी के लॉ सिस्टम और इसके ऑपरेशन को एनालाइज करते हैं.
  • लीगल जर्नलिस्ट: लीगल जर्नलिस्ट्स कोर्ट्स, क्राइम बीट्स, आर्बिट्रेशन कोर्ट्स, आर्बिट्रेशन इवेंट्स और इंटरनेशनल कोर्ट्स में लीगल प्रोसीडिंग्स को कवर करते हैं.
  •  साइबर एक्सपर्ट: हाल के वर्षों में ऑनलाइन गतिविधियां और ऑनलाइन बैंकिंग लेन-देन तेजी से बढ़ा है जिस वजह से साइबर क्राइम यानी ऑनलाइन धोखाधड़ी भी तेजी से बढ़ी है. ऐसे में साइबर लॉ के जानकारों की मांग तेजी से बढ़ रही है. इस करियर फील्ड के लिए लॉ ग्रेजुएट्स साइबर लॉ का शॉर्ट-टर्म कोर्स कर सकते हैं.
  • लॉ ऑफिसर: बैंक के सभी लीगल कार्यों के संचालन में लॉ ऑफिसर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं क्योंकि सभी बैंकों का प्रत्येक कार्य भारत सरकार द्वारा लागू बैंकिंग कानून के तहत ही किया जाता है. इसलिए सभी बैंकों में लॉ ऑफिसर को सभी कानूनी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं.

भारत में लॉ एक्सपर्ट्स को मिलने वाला सैलरी पैकेज

लॉ ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट (LLB/ LLM) की डिग्री हासिल करने के बाद जो स्टूडेंट्स किसी कोर्ट में अपनी प्रैक्टिस शुरू करना चाहते हैं, वे जिस एडवोकेट के पास लॉ असिस्टेंट के तौर पर प्रैक्टिस करते हैं, उस एडवोकेट के लेवल के मुताबिक इन्हें रु. 5000/- से रु. 45000/- तक मासिक स्टाइपेंड मिलता है. जो लॉ ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट कैंडिडेट्स लीगल प्रोसेस आउटसोर्सिंग के साथ काम करते हैं, वे रु. 25000 - 55000/- तक प्रति माह कमा सकते हैं. लॉ की फील्ड में कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की जा सकती है बशर्ते कि, लॉ ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट कैंडिडेट्स के पास सही स्किल-सेट तथा किसी फेमस कॉलेज/ यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूट से लॉ की डिग्री हो.

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