भारत में आपके लिए उपलब्ध हैं ये विशेष सेल्फ एम्प्लॉयमेंट कोर्सेज

जो स्टूडेंट्स या पेशेवर कहीं जॉब नहीं करना चाहते, वे अगर कोई सेल्फ-एम्पलॉयमेंट कोर्स कर लें तो अच्छी कमाई कर सकेंगे. यह आर्टिकल पढ़कर इन कोर्सेज के बारे में और ज्यादा जानकारी प्राप्त करें.

Created On: Nov 20, 2020 20:03 IST
Know about Some Good Self Employment Courses
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आजकल देश-दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के कारण लगने वाले लॉकडाउन के साथ-साथ जॉब मार्केट में लगातार बढ़ते कॉम्पीटीशन के कारण भारत सहित पूरी दुनिया में यंगस्टर्स के लिए अपनी काबिलियत, स्किल-सेट, टैलेंट और इंटरेस्ट के मुताबिक कोई सूटेबल जॉब तलाश करना काफी मुश्किल हो गया है. जो स्टूडेंट्स या पेशेवर कहीं जॉब नहीं करना चाहते, वे अगर कोई सेल्फ-एम्पलॉयमेंट कोर्स कर लें तो अच्छी कमाई कर सकेंगे. यह आर्टिकल पढ़कर इन कोर्सेज के बारे में और ज्यादा जानकारी प्राप्त करें.

भारत में सेल्फ-एम्पलॉयमेंट के लिए करें ये प्रमुख डिग्री कोर्सेज   

यहां हम भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों/ कॉलेजों और इंस्टीट्यूट्स द्वारा ऑफर किये जा रहे कुछ ऐसे विशेष डिग्री कोर्सेज की चर्चा कर रहे हैं जिन्हें पूरा करने के बाद आप संबद्ध फील्ड में अपना कारोबार बड़ी आसानी से शुरू कर सकते हैं. अगर आप कहीं जॉब भी करेंगे तो वह जॉब सेल्फ-एम्पलॉएड  पेशे के समान ही होगी. आइये आगे पढ़ें:

  • बैचलर डिग्री – एग्रीकल्चर

हमारे देश के किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय/ कॉलेज या इंस्टीट्यूट से एग्रीकल्चर में बैचलर डिग्री कोर्स पूरा करने के बाद व्यक्ति एग्रीकल्चर की सभी संबद्ध फ़ील्ड्स में से अपनी पसंद के मुताबिक अपना काम शुरू कर सकते हैं. स्टूडेंट्स एग्रीकल्चर से संबद्ध किसी फर्म या कंपनी में एग्रीकल्चर मैनेजर के तौर पर भी काम कर सकते हैं. इस डिग्री को प्राप्त करने के बाद लगभग 70% व्यक्ति सेल्फ-एम्पलॉएड होते हैं. 

  • बैचलर डिग्री – आर्ट्स

जब आप किसी कॉलेज या विश्वविद्यालय से आर्ट्स (बैचलर ऑफ़ फाइन आर्ट्स) में डिग्री प्राप्त करते हैं तो आप डिज़ाइन, पेंटिंग, फोटोग्राफी, प्रिंटमेकिंग, स्कल्पटिंग और डिजिटल डिजाइनिंग से संबंध अपना कोई कारोबार शुरू कर सकते हैं. यह डिग्री प्राप्त करने के बाद अनुमानतः लगभग 50% व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करते हैं. आप किसी म्यूजियम या आर्ट की फील्ड से संबद्ध किसी कंपनी या इंस्टीट्यूट में आर्ट डायरेक्टर, एनिमेटर या मल्टीमीडिया आर्टिस्ट की जॉब भी कर सकते हैं.

  • बैचलर डिग्री – मोर्चूअरी साइंस

मोर्चूअरी साइंस में बैचलर डिग्री हासिल करने के बाद व्यक्ति डेडबॉडीज को अंतिम संस्कार या मेमोरियल सर्विसेज/ ब्यूरिअल्स के लिए तैयार करने के लिए टेक्निकल स्किल्स हांसिल कर लेते हैं. यह डिग्री प्राप्त करने के बाद अनुमानतः लगभग 50% व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करते हैं. आप एक फनरल सर्विस मैनेजर या फनरल डायरेक्टर के तौर पर भी जॉब कर सकते हैं.

  • बैचलर डिग्री – एक्सरसाइज फिजियोलॉजी

इस विषय में डिग्री प्राप्त करने के बाद स्टूडेंट्स स्पोर्ट्स इंजरी मैनेजमेंट, फिटनेस, सर्टिफाइड क्लिनिकल एक्सरसाइज फिजियोलॉजिस्ट या रजिस्टर्ड क्लिनिकल एक्सरसाइज फिजियोलॉजिस्ट के तौर पर जॉब या अपना पेशा शुरू कर सकते हैं. यह डिग्री प्राप्त करने के बाद अनुमानतः लगभग 50% व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करते हैं.

  • बैचलर डिग्री – म्यूजिक

इंस्ट्रुमेंटल म्यूजिक या सिंगिंग में डिग्री करने पर व्यक्ति इंस्ट्रुमेंटल म्यूजिक या सिंगिंग सिखा सकते हैं, लाइव म्यूजिक परफॉरमेंस दे सकते हैं, अपना डीजे या ऑर्केस्ट्रा शुरू कर सकते हैं. यह डिग्री प्राप्त करने के बाद अनुमानतः लगभग 40% व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करते हैं. आप किसी म्यूजिकल कंपनी में म्यूजिक डायरेक्टर या म्यूजिशियन के तौर पर जॉब भी कर सकते हैं.

  • डॉक्टोरल डिग्री – साइकोलॉजी

उक्त डिग्री हासिल करने के बाद व्यक्ति अपना क्लिनिक खोल सकते हैं. यह डिग्री प्राप्त करने के बाद अनुमानतः लगभग 33% व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करते हैं लेकिन इस पेशे के लिए उपयुक्त ऑथोरिटी से लाइसेंस जरुर प्राप्त करना चाहिए. सेल्फ-एम्पलॉएड साइकोलोजिस्ट्स मानसिक रोगों का इलाज करते हैं. इसी तरह, विभिन्न कंपनियों और फर्मों में साइकोलोजिस्ट्स एम्पलॉईज की मानसिक समस्याओं का समाधान करने के साथ ही एम्पलॉईज का मोरेल बढ़ाने की तरकीब करना, एम्पलॉईज को जरुरी सलाह आदि देने जैसे महत्पवूर्ण काम करते हैं.

  • डिग्री - डॉक्टर ऑफ़ चिरोप्रेक्टिक (डीसी)

ये डॉक्टर (डीसी) स्पाइनल एडजस्टमेंट की आर्ट में ट्रेंड होते हैं यह डिग्री 4 वर्ष की अवधि की होती है जिसमें स्टूडेंट्स को चिरोप्रक्टिक टेक्निक्स को प्रैक्टिकल तौर पर इस्तेमाल करना सिखाया जाता है. ये चिरोप्रेक्टर्स आमतौर पर पेशेंट्स की सुविधा के मुताबिक अपॉइंटमेंट फिक्स करते हैं. यह डिग्री प्राप्त करने के बाद अनुमानतः लगभग 33% व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करते हैं.

  • बैचलर डिग्री - हॉस्पिटैलिटी

अगर आप टूरिज्म की फील्ड में काम करना चाहते है और अपने लीडरशिप कौशल को भी निखारना चाहते हैं तो हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट आपके लिए एक सूटेबल वर्क फील्ड साबित होगी. हॉस्पिटैलिटी में डिग्री हासिल करने पर आप टूरिज्म की फील्ड से संबद्ध कई जॉब्स कर सकते हैं. हॉस्पिटैलिटी में डिग्री हासिल करके आप लॉजिंग मैनेजर और फ़ूड सर्विस मैनेजर के तौर पर अपना सफल करियर शुरू कर सकते हैं. यह डिग्री प्राप्त करने के बाद अनुमानतः लगभग 33% व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करते हैं.

  • बैचलर डिग्री – इंटीरियर डिजाइन

इंटीरियर डिज़ाइन में डिग्री हासिल करने के बाद स्टूडेंट्स इंडोर स्पेसेस को डेकोरेट करने के साथ ही उस स्पेस के बेहतरीन इस्तेमाल के लिए सारी व्यवस्था करने में कुशल हो जाते हैं. ये पेशेवर रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्लेसेस में अपना हुनर दिखाते हैं. यह डिग्री प्राप्त करने के बाद अनुमानतः लगभग 25% व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करते हैं.

  • डिग्री ऑफ़ डॉक्टरेट - वेटरनरी मेडिसिन

डॉक्टर ऑफ़ वेटरनरी मेडिसिन (डीवीएम या वीएमडी) की 4 वर्ष की डिग्री प्राप्त करना आसान नहीं है और इस डिग्री कोर्स में एडमिशन लेने के लिए आपने साइंस की बैकग्राउंड के साथ अपनी 12 वीं क्लास पास की हो. यह डिग्री प्राप्त करके ये पेशेवर पालतू पेट्स और फार्म एनिमल्स सहित सभी जानवरों की विभिन्न बीमारियों का इलाज कर सकते हैं. ये पेशेवर अपने क्लिनिक्स खोल सकते हैं या वेटरनरी हॉस्पिटल में जॉब कर सकते हैं. यह डिग्री प्राप्त करने के बाद अनुमानतः लगभग 17% व्यक्ति अपना कारोबार शुरू करते हैं.

कुछ अन्य महत्वपूर्ण डिग्री कोर्सेज

  • फिल्म
  • डेंटल डिग्री
  • मास्टर ऑफ़ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन
  • बैचलर ऑफ़ आर्किटेक्चर
  • ग्राफ़िक डिजाइन

सोशल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (सीएसडीओ), दिल्ली के सेल्फ-एम्पलॉयमेंट कोर्सेज

बेरोज़गारी की मार झेल रहे यंगस्टर्स की इस मुश्किल को आसान करने के लिए क्राफ्ट एंड सोशल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (सीएसडीओ), दिल्ली तथा अन्य कई इंस्टीट्यूट्स कई सेल्फ-एम्पलॉयमेंट कोर्सेज ऑफर कर रहे हैं. स्टूडेंट्स ये कोर्सेज किसी भी समय बड़ी आसानी से शुरू कर सकते हैं. सबसे अच्छी बात तो यह है कि आप अपना कारोबार काफी कम कैपिटल में शुरू कर सकते हैं. सीएसडीओ में यंगस्टर्स सेल्फ-एम्पलॉयमेंट के लिए कई उपयोगी कोर्सेज कर सकते हैं जैसेकि, हैंडमेड कॉस्मेटिक्स, चॉकलेट मेकिंग, बॉक्स मेकिंग, गिफ्ट पैकिंग, क्रंची नट/ फ्लेवर्ड एंड स्पाइसी नट मेकिंग, फ्लावर मेकिंग, बेकरी, सोप मेकिंग, सोए वैक्स कैंडल मेकिंग आदि. ये कोर्सेज काफी किफायती हैं और हरेक व्यक्ति की जरूरत के मुताबिक इन कोर्सेज के टाइमिंग्स एडजस्ट किये जा सकते हैं. इन कोर्सेज के साथ कैंडिडेट्स को एक्स्ट्रा सपोर्ट जैसेकि, कन्जूमर को समझना, सप्लायर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के कांटेक्ट डिटेल्स सहित कारोबार हेतु शुरू में लगने वाली लागत, इनकम आदि उपलब्ध करवाई जाती है.

भारत में आपके लिए उपलब्ध कुछ प्रमुख सेल्फ-एम्पलॉएड जॉब ऑप्शन्स

यहां आपकी सहूलियत के लिए हम कुछ प्रमुख सेल्फ-एम्पलॉएड  जॉब्स की एक लिस्ट पेश कर रहे हैं:

  • उबर/ ओला ड्राइविंग
  • ग्रोसरीज डिस्ट्रीब्यूशन
  • चाइल्ड केयर
  • सोशल मीडिया एडवाइजर
  • वीडियो प्रोडक्शन
  • वेब डिजाइनिंग
  • इंटीरियर डेकोरेशन
  • रिज्यूम/ सीवी राइटिंग
  • फ्रीलांस राइटिंग
  • ब्लॉगिंग
  • लाइफ कोचिंग
  • इवेंट कोआर्डिनेशन
  • प्रोफेशनल स्पीकिंग
  • एल्डर केयर
  • कंसल्टिंग
  • रिपेयर वर्क
  • एजुकेशनल ट्यूशन
  • म्यूजिक/ डांस ट्यूशन
  • ई-कॉमर्स
  • सेल्स परचेज

अगर आप कोई जॉब करने के बजाए अपना कारोबार शुरू करना चाहते हैं तो सेल्फ एम्प्लॉयमेंट के इन कोर्सेज को पूरा करने के बाद आप नौकरी हासिल कर सकते हैं और चाहे तो अपना खुद का कारोबार शुरू कर सकते हैं. आज की जरूरत और अपनी रुचि के अनुसार आप मोबाइल रिपेयरिंग, एसी-रेफ्रिजरेटर रिपेयरिंग, टीवी-डीवीडी-एलसीडी-म्यूजिक सिस्टम रिपेयरिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन, पॉटरी डिजाइन, फैशन डिजाइन व टेलरिंग, डीटीपी ऑपरेटर इत्यादि में से अपने लिए कोई भी सूटेबल कोर्स कर सकते हैं. किसी सर्टिफाइड इंस्टीट्यूट से कोर्स करने पर आपको न केवल आसानी से जॉब मिल सकती है, बल्कि आप चाहें तो अपना कारोबार शुरू कर लें क्योंकि आजकल इसके लिए आपको सभी नेशनलाइज्ड बैंकों से लोन भी मिल सकता है.

भारत में सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट की विभिन्न फ़ील्ड्स में सैलरी पैकेज या कमाई

उक्त सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट कोर्सेज करने के बाद अगर आप किसी कंपनी या फर्म में जॉब करते हैं तो आपको संबद्ध जॉब फील्ड के मार्केट-रेट्स के मुताबिक सैलरी पैकेज मिलता है. लेकिन अगर आप अपना कारोबार शुरू कर लें तो फिर आपकी कमाई की अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं की जा सकती क्योंकि आप अपने टैलेंट, बिजनेस स्किल्स और एक्सपीरियंस के आधार पर हरेक माह काफी अच्छी कमाई कर लेंगे.

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