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कॉलेज की परीक्षाओं में अच्छे नंबर प्राप्त करने हेतु प्रभावशाली समय सारणी

स्कूल के बाद अचानक समय सारणी बनाना और उसके अनुकूल कार्य करना थोड़ा कठिन कार्य है l स्कूल के दौरान समय सारणी अभिभावकों एवं शिक्षकों द्वारा तैयार किया जाता है जबकि कॉलेज में आते ही ये सारे उत्तरदायित्व छात्र को स्वयं निभाने होते हैं l अतः छात्रों को कॉलेज की परीक्षाओं के लिए अपना समय सारणी बहुत सोच समझकर एवं अमल करने लायक बनाना चाहिए l

Aug 30, 2018 18:29 IST
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How to make an effective study schedule for college students?
How to make an effective study schedule for college students?

व्यक्ति के जीवन का सबसे सुनहरा समय उसका कॉलेज जीवन होता है l निःसंदेह जीवन में आगे चलकर इन कॉलेज के दिनों को कुछ अविस्मरणीय पलों के रूप में याद किया जाता है l इस समय अप्रत्यक्ष रूप से छात्रों के ऊपर बहुत सारी जिम्मेदारियां आ जाती हैं l चुकि जीवन के इस पल में छात्रों को नई नई स्वंत्रता की प्रकृति का एहसास होता है इसलिए पारिवारिक और सामजिक सन्दर्भ में  उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ जाती हैं l समय के उचित प्रबंधन के अभाव में कॉलेज जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे,मनोरंजन,अध्ययन और अन्य गतिविधियों के साथ परीक्षा में अच्छे नंबर लाना एक मुश्किल कार्य है l अतः इसके लिए छात्रों को एक सही और प्रभावशाली अध्ययन कार्यक्रम या समय सारणी बनाने की आवश्यक्ता होती है l

 

लेकिन जब आप एक सही अध्ययन कार्यक्रम या समय सारणी बनाते हैं तो उसे अत्यंत ही सरल समझने लायक और परिणामोन्मुख होना चाहिए l समय सारणी को ऐसा होना चाहिए कि एकेडमिक जरूरतों को पूरा करने के साथ साथ आपके पास मनोरंजन तथा अन्य गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय बचे l  बेशक अपने दैनिक कार्यों को संतुलित और प्रबंधित करने में बहुत सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा l लेकिन एक बार जब आप सही समय सारणी बनाने में कामयाब हो जायेंगे आप की सारी समस्याएं खुद ब खुद समाप्त हो जाएंगी l

कॉलेज की पढ़ाई के दौरान सभी समेस्टर में अच्छे मार्क्स लाने में सहयोगी कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों का वर्णन यहां किया जा रहा है -

1. अपने सीखने की कला पर ध्यान दें

सबसे पहले आपको यह समझने की आवश्यक्ता है कि किसी चीज को जानने और तथ्य को समझने के दौरान आपको उसे किस रूप में जानना ज्यादा पसंद है l आप उसे पढ़कर, बोलकर, सुनकर या दिमाग में उसकी अवधारणा बनाकर सीखना चाहते हैं या अतिशीघ्र समझ जाते हैं l समय सारणी बनाते समय इस तथ्य का अवश्य ध्यान रखें तथा अपने सीखने की अनुकूल पद्धति पर ज्यादा फोकस करें l

2. अपने अध्ययन का लक्ष्य हमेशा अपनी सीमा के अनुरूप यथार्थवादी रखें

बिना कार्यान्वयन के योजना का निर्माण उसी तरह निरर्थक है जैसे बिना योजना के किसी कार्य का निष्पादन l अतः हमेशा अपना लक्ष्य अपनी क्षमता के अनुरूप और यथार्थवादी रखें l काल्पनिक और असंगत उड़ान से बचें l ऐसा करते समय आपको अपने लिए यथार्थ का अर्थ समझना होगा l अर्थात आप किस सीमा तक परिश्रम कर सकते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं l अगर आप किसी दिन अपनी क्षमता से अधिक कार्य करने की योजना बनाते हैं तो इससे आप अपने लक्ष्यों को तो प्राप्त नहीं ही कर पाएंगे साथ ही साथ हताशा के शिकार भी होंगे तथा इससे आपकी भविष्य की योजनायें भी प्रभावित होंगी l शुरूआती दिनों में अपना लक्ष्य छोटा रखें तथा इसे धीरे धीरे बढ़ाते हुए अपना वर्कलोड बढ़ाएं l लक्ष्य तक पहुँचने के लिए  अपने छोटे छोटे आवश्यक कार्यों की सूची बनाएं l

3. प्रतिदिन अध्ययन करें

किसी भी कार्य की नियमितता अवश्य ही सकारात्मक परिणाम देती है l अतः लक्ष्य प्राप्ति हेतु अपने अध्ययन में नियमितता रखें अर्थात रोज पढ़ाई करें l यह अध्ययन प्रक्रिया आपको परीक्षा के अंतिम दिनों में सभी तथ्यों को एक साथ रटने या यद् करने की परेशानी से दूर रखते हुए बेहतर परिणाम देगी l वे छात्र जो परीक्षा के दौरान तनाव में आ जाते हैं तथा सही परिणाम नहीं आने की आशंका से भयभीत होते हैं उन्हें भी प्रतिदिन अध्ययन करना चाहिए l यह जानने की कोशिश करें कि किस समय पढ़ना आपको ज्यादा अच्छा लगता है  अर्थात आपके लिए पढ़ने का सबसे सही समय कौन सा है ? आप देर रात तक जग कर पढ़ें या सुबह जल्दी जगकर यह आपकी प्रकृति पर निर्भर करता है l आप इन दोनों में से किसी भी समय का चुनाव अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते हैं l आप अपने दैनिक कार्यक्रम में अध्ययन के घंटे को भी समायोजित कर सकते हैं l

4. विराम हेतु उचित समय का विभाजन

यदि आपका मन पढाई में नहीं लग रहा है और अपनी मौलिक सुविधाओं और आराम से समझौता कर आप लगातार 6-7 घन्टे तक पढ़ते जा रहें हैं तो ऐसे अध्ययन का कोई फायदा नहीं है l पढ़ाई  तभी करनी चाहिए जब आपका मन स्थिर एवं शांत हो l आप प्रारंभिक अवस्था में धीरे धीरे अपने पढ़ने का समय बढ़ाएं तथा 25 मिनट के अन्तराल पर 5 मिनट का ब्रेक लें l वैकल्पिक रूप में आप 52-17 के एल्गोरिथम को अपना सकते हैं अर्थात आप 52 मिनट अध्ययन करने के बाद 17 मिनट का ब्रेक लेकर पुनः अध्ययन कर सकते हैं लेकिन यह तभी संभव है जब आप अपने मन को शत प्रतिशत एकाग्र करने में सक्षम हों l यानि कि आपकी एकाग्रता शक्ति असाधारण हो l

5. अपने अध्ययन क्षेत्र का निर्माण करें

छात्रों को अपने सीखने की कला से सम्बंधित पद्धतियों से जुड़े  अध्ययन क्षेत्र का निर्माण या चुनाव करना चाहिए l यदि आप किसी चीज को देखकर समझने में अधिक रूचि रखते हैं तो आपको ऐसे स्थान का चुनाव करना चाहिए जहाँ प्रकाश की सही व्यवस्था हो,इलेक्ट्रीसिटी की पूरी व्यवस्था हो तथा कम से कम शोर गुल हो l ऐसे दरवाजे जहाँ लोगों का आना जाना बार बार लगा हो, के पास बैठकर कभी भी पढ़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए इससे आपकी एकाग्रता भंग होती है l समय के सही सदुपयोग के लिए पढ़ते समय मोबाइल,वीडियोगेम तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल न करें l

6. अपने विकास पर नजर रखें (अपना मूल्यांकन करें)

पढ़ाई करने के साथ साथ अपने पिछले कार्यों का भी मूल्यांकन करें तथा यह जानने की कोशिश करें कि आप अपने द्वारा बनाये गए समय सारणी के अनुसार कितना काम कर रहें है और उस दिशा में आपने कितना विकास किया है ? अगर परिणाम अनुकूल नहीं दिखे तो यह सोचने की आवश्यक्ता है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ ? अपनी आवश्यक्ता के अनुकूल आप अपने समय सारणी में कुछ बदलाव कर सकते हैं l उदाहरण के लिए अगर आपको लगता है कि 25 मिनट की पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक थोड़ा कम है या लगातार 25 मिनट तक पढ़ना मुश्किल है तो आप अपनी एकाग्रता शक्ति और क्षमता के अनुसार इसमें कुछ फेरबदल कर सकते हैं l

अध्ययन कार्यक्रम बनाना छात्रों के शैक्षणिक कार्यों का एक अभिन्न अंग है l यदि छात्र अपने द्वारा बनाये गए समय सारणी का सख्ती और ईमानदारी से पालन करते हैं तो वे अवश्य ही बिना किसी  तनाव के अपनी कार्य क्षमता का विकास करने और मनोनुकूल परिणाम प्राप्त करने में कामयाबी हासिल करेंगे l

अंततः एंथोनी जे डी एंजेलो के इस कथन “सीखने के लिए जुनून विकसित करें” पर अगर छात्र काम  करें तो वे सतत अपने जीवन में प्रगति पथ पर अग्रसर रहेंगे l जिज्ञासु बने रहें, बिना जिज्ञसा के अच्छी  योजनायें भी आपको अपेक्षित परिणाम तक पहुँचाने में मदद नहीं कर सकती हैं l साथ साथ आप निराशा और हताशा जैसी प्रवृति के शिकार भी हो सकते हैं l 

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