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भारत में टॉप 5 इंजीनियरिंग स्पेशलाइजेशन

Aug 20, 2018 12:24 IST

भारत में इंजीनियरिंग सबसे ज्यादा पसंदीदा करियर ऑप्शन है. अक्सर ऐसा कहा जाता है कि, ‘भारत में पहले आप इंजीनियर बन जायें और फिर पता करें कि अब अपने जीवन में आपको क्या करना है?’ शुरू में जबकि यह एक जोक की तरह प्रतीत होता है लेकिन जब हम किसी इंजीनियरिंग स्पेशलाइजेशन के चयन के बारे में बात करते हैं तो यह कहावत एक सच्चाई बन जाती है. एक इंजीनियर के तौर पर आपके लिए अपना सफल करियर बनाने के लिए सही इंजीनियरिंग स्पेशलाइजेशन कोर्स का चयन करना काफी महत्वपूर्ण है. आइये पता करें कि भारत में कौन से टॉप 5 इंजीनियरिंग स्पेशलाइजेशन कोर्सेज हैं? इन सभी स्पेशलाइजेशन कोर्सेज से संबद्ध करियर विकल्प सहित अन्य महत्वपूर्ण सूचना यहां पेश की जा रही है.   

5. केमिकल इंजीनियरिंग

परंपरागत तौर पर, केमिकल इंजीनियरिंग एक बहुत पसंदीदा इंजीनियरिंग स्पेशलाइजेशन कोर्स है जिसका श्रेय इस कोर्स की प्रकृति और इस कोर्स द्वारा प्रस्तुत करियर के ढेरों अवसरों को जाता है. पिछले कुछ वर्षों में इस इंजीनियरिंग स्पेशलाइजेशन कोर्स की तरफ स्टूडेंट्स की धारणा में काफी बदलाव आया है जिसका श्रेय इस स्पेशलाइजेशन कोर्स द्वारा ऑफर किये जा रहे नये उप-विषयों और इनोवेटिव करियर प्रॉस्पेक्ट्स को जाता है.

एक अध्ययन विषय के रूप में, यह विषय केमिकल्स इंजीनियरिंग और केमिकल्स को उपयोगी उत्पादों में बदलने की प्रोसेसेज की पहचान से संबद्ध है. इस स्पेशलाइजेशन कोर्स के अध्ययन के दौरान, आप विभिन्न केमिकल्स, पॉलीमर्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स, फार्मास्युटिकल्स आदि के बारे में सीखते हैं. आप नई और उन्नत केमिकल इंजीनियरिंग प्रोसेसेज के विकास के लिए कंप्यूटर्स और इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बारे में भी पढ़ेंगे. जो स्टूडेंट्स ऑर्गेनिक और इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री में रूचि लेते हैं, उनके लिए यह कोर्स बिलकुल उपयुक्त है क्योंकि यह कोर्स उन स्टूडेंट्स को ढेरों शानदार करियर विकल्प ऑफर करता है.   

4. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग

क्या आप इलेक्ट्रिसिटी के बिना अपने जीवन की कल्पना कर सकते हैं? नहीं, ठीक है ना! अब इलेक्ट्रिसिटी हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है. अगर आप लेटेस्ट टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन्स जैसेकि, टीवीज, लैपटॉप्स और स्मार्टफ़ोन्स पर पूरी तरह निर्भर हो गये हैं तो आप इसके लिए इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स को जरुर धन्यवाद देना चाहेंगे.

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एक अन्य कोर-इंजीनियरिंग फील्ड है जो इंडियन इंजीनियरिंग कैंडिडेट्स के बीच काफी पसंदीदा कोर्स है. इस विषय के तहत इलेक्ट्रिसिटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रोमैगनेटिज्म के अध्ययन और एप्लीकेशन के बारे में जानकारी दी जाती है. आसान शब्दों में, इस स्पेशलाइजेशन कोर्स के तहत पॉवर, कंट्रोल सिस्टम्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिग्नल प्रोसेसिंग, टेलीकम्यूनिकेशन्स और अन्य संबद्ध टॉपिक्स के माध्यम से इलेक्ट्रिकल सिस्टम्स के डिज़ाइन, डेवलपमेंट और मेंटेनेंस के बारे में सारी जानकारी दी जाती है. नये तकनीकी विकास के साथ ही, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के तहत कई नए उप-विषय और अध्ययन विषय जैसेकि, मेकाट्रोनिक्स भी पढ़ाये जाते हैं.

एक स्पेशलाइजेशन कोर्स के तौर पर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की बढ़ती लोकप्रियता का एक महत्वपूर्ण कारण यह है कि इस कोर्स के तहत कैंडिडेट्स को जॉब के ढेरों अवसर मिलते हैं. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त करने के बाद, स्टूडेंट्स को विप्रो, इनफ़ोसिस, एक्सेंचर, एनटीपीसी, एसएआईएल और ओएनजीसी जैसी कई महत्वपूर्ण टॉप टेक-फर्म्स में जॉब मिल सकती है.

3. सिविल इंजीनियरिंग

सिविल इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग के सबसे पुराने विषयों में से एक है. इसका संबंध लार्ज-स्केल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसेकि, रोड्स, बिल्डिंग्स, ब्रिजेज आदि की डिजाइनिंग, प्लानिंग, कंस्ट्रक्शन, मेंटेनेंस और ऑपरेशन से है.

सिविल इंजीनियरिंग में स्पेशलाइज्ड कोर्स करने से आप एनवायरनमेंट और लोगों के कम से कम हस्तक्षेप सहित लार्ज-स्केल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तैयार करने के लिए जानकारी और ट्रेनिंग से लैस हो जायेंगे. यह स्पेशलाइजेशन कोर्स कई विषयों में बंटा हुआ है जैसेकि, आर्किटेक्चरल इंजीनियरिंग, एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग, स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन इंजीनियरिंग आदि. सिविल इंजीनियरिंग को अक्सर इंजीनियरिंग के एक सदाबहार विषय के तौर पर जाना जाता है क्योंकि किसी भी देश के विकास में इन्फ्रास्ट्रक्चरल डेवलपमेंट एक महत्वपूर्ण रोल होता है. सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स लार्ज-स्केल बिल्डिंग्स के कंस्ट्रक्शन, इन्फ्रास्ट्रक्चर और आर्किटेक्चर संबंधी कार्यों में रूचि रखने वाले स्टूडेंट्स के लिए एक बेहतरीन चयन साबित होता है.

2. मैकेनिकल इंजीनियरिंग

एक अन्य महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग विषय मैकेनिकल इंजीनियरिंग है. यह मैकेनिकल सिस्टम्स के डिज़ाइन, एनालिसिस, मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस से संबद्ध है. यह विषय मैकेनिकल सिस्टम्स के डिज़ाइन, डेवलपमेंट, असेसमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस के लिए इंजीनियरिंग, मटीरियल साइंस और फिजिक्स के सिद्धांतों का इस्तेमाल करता है. कार्यक्षेत्र के मामले में, यह इंजीनियरिंग की व्यापक फ़ील्ड्स में से एक फील्ड है जिसके तहत ऑटोमोबाइल्स और कंस्ट्रक्शन से लेकर सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री तक सभी कुछ शामिल किया जा सकता है.

पिछले कुछ वर्षों में, इंडस्ट्री की जरूरतों को पूरा करने के लिए मैकेनिकल इंजीनियरिंग में से कई उप-विषय उभरे हैं जैसेकि मरीन इंजीनियरिंग, मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग आदि. इसे भी एक सदाबहार फील्ड कहा जाता है क्योंकि मार्केट ट्रेंड्स में निरंतर परिवर्तन होने के बावजूद इस फील्ड में हमेशा ढेरों अवसर मौजूद रहते हैं. कोई भी मैकेनिकल इंजीनियर इसरो, डीआरडीओ, इंडियन रेलवे, पोपुलर ऑटोमोबाइल कम्पनीज़ आदि जैसे अन्य कई संगठनों में जॉब के बढ़िया अवसर प्राप्त कर सकता है.

1. कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग

कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग देश में सबसे ज्यादा पसंदीदा इंजीनियरिंग विषयों में से एक विषय है. इस कोर्स में हरेक वर्ष बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग कैंडिडेट्स एडमिशन लेते हैं क्योंकि इस कोर्स में ग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद स्टूडेंट्स के पास जॉब के ढेरों अवसर मौजूद होते हैं. स्टार्ट-अप कल्चर में बढ़ोतरी से भी स्टूडेंट्स के बीच यह कोर्स काफी लोकप्रिय होता जा रहा है. एक कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग स्टूडेंट के तौर पर, व्यक्ति कंप्यूटर ग्राफ़िक्स, कंप्यूटर थ्योरी, प्रोग्रामिंग लैंग्वेजेज, ऑपरेटिंग सिस्टम्स, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग आदि के बारे में सीखता है. यह कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर, दोनों इनफॉर्मेशन सिस्टम्स के डिज़ाइन, इम्प्लीमेंटेशन और मैनेजमेंट के बारे में सीखते और जानकारी हासिल करते हैं. यह फील्ड गूगल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल इंक., इनफ़ोसिस, डेल इंक. आदि जैसी ड्रीम कम्पनीज में काम के अवसर प्रदान करती है.

इसलिए अगर आप इंजीनियर बनना चाहते हैं तो आपके लिए यह बेहतर होगा कि पहले आप यह पता लगायें कि उक्त 5 टॉप स्पेशलाइजेशन्स में से आप कौन-सा स्पेशलाइजेशन करना चाहते हैं. आप ऐसा इसलिए करें क्योंकि:

‘आपको पहले इंजीनियर बनकर बाद में यह कदापि पता न करना पड़े कि अब आप अपने जीवन में क्या करें?’

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