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स्टार्टअप में जॉब ज्वाइन करने से पहले जांच लें ये 7 खास प्वाइंट्स

स्टार्टअप एक ऐसा एंटरप्रिनियोर वेंचर है जिसका विकास होना हाल ही में शुरू हुआ है. ये नई उभरती हुई कंपनियां ऐसे आकर्षक और उत्साहवर्धक ऑफर पेश कर रही हैं जो सुस्थापित कंपनियां भी नहीं दे सकती हैं. जॉब डिस्क्रिप्शन्स में आमतौर पर लुभावने फ्रेजेस जैसेकि, “केजुअल, फन ऑफिस एनवायरनमेंट” और “करियर में जल्दी तरक्की की संभावना” जोड़ दिए जाते हैं. इससे किसी स्टार्टअप में काम करना ज्यादा उत्साहवर्धक और दिलचस्प लगता है.

Feb 25, 2019 16:16 IST
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career guidance optionsस्टार्टअप एक ऐसा इंटरप्रेन्योर वेंचर है जिसका विकास होना हाल ही में शुरू हुआ है. ये नई उभरती हुई कंपनियां ऐसे आकर्षक और उत्साहवर्धक ऑफर पेश कर रही हैं जो सुस्थापित कंपनियां भी नहीं दे सकती हैं. जॉब डिस्क्रिप्शन्स में आमतौर पर लुभावने फ्रेजेस जैसेकि, “केजुअल, फन ऑफिस एनवायरनमेंट” और “करियर में जल्दी तरक्की की संभावना” जोड़ दिए जाते हैं. इससे किसी स्टार्टअप में काम करना ज्यादा उत्साहवर्धक और दिलचस्प लगता है. लेकिन एक अन्य प्वाइंट पर ध्यान देना चाहिए और वह प्वाइंट यह है कि, कोई स्टार्टअप एक ऐसी कंपनी है जो किसी ऐसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने की कोशिश कर रही है जिस प्रॉब्लम का सॉलूशन अभी स्पष्ट नहीं है और शुरू-शुरू में कंपनी को मिलने वाली सफलता के बावजूद कपनी के सफल कारोबार की कोई गारंटी नहीं ली जा सकती है. अगर हम किसी स्टार्टअप कंपनी को देखें तो हमें अच्छी तरह विचार करने पर रिस्क और रिवार्ड्स, दोनों ही नजर आते हैं. इसलिए, अगर आप किसी ऐसी ही स्टार्टअप कंपनी को ज्वाइन करने वाले हैं तो आपको यह सलाह दी जाती है कि इस बारे में अपनी रिसर्च कर लें और यह सुनिश्चित कर लें कि जिस कंपनी में आप काम करने जा रहे हैं, उस कंपनी के अपनी फील्ड में सफल रहने के काफी अच्छे चांसेज हैं.


यहां आपकी सहूलियत के लिए हम 7 ऐसे प्रमुख प्वाइंट्स पेश कर रहे हैं जिनकी जांच आपको अपनी स्थाई कॉर्पोरेट आईटी जॉब छोड़ने से पहले कोई नया और आकर्षक स्टार्टअप ज्वाइन करने से पहले जरुर करनी चाहिए.

1.   एम्पलॉयर की उम्मीदें:

आमतौर पर किसी स्टार्टअप के शुरुआती दिनों में कम रिसोर्सेज के साथ काम चलाने की वजह से वह स्टार्टअप कंपनी अपने सभी उपलब्ध रिसोर्सेज का पूरी कुशलता से उपयोग करती है. इसके साथ कई जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं. इसलिए, किसी स्टारअप कंपनी में जॉब ज्वाइन करने से पहले यह जरुरी है कि आप अपनी जॉब डिस्क्रिप्शन और महत्वपूर्ण रिजल्ट एरियाज की जानकारी हासिल कर लें. जॉब टाइटल्स, डेस्क असाइनमेंट्स और प्रोजेक्ट्स प्लान अक्सर तेज़ी से बदलते रहते हैं. इस कारण, जो लोग अनिश्चितता पसंद नहीं करते हैं, वे स्टार्टअप्स से दूर ही रहें. अगर आप अपने निर्धारित केआरए से आगे भी काम करना चाहते हैं तो इस बारे में फाउंडर्स से खुल कर बात करें, खासकर सीईओ से कंपनी में अपने जॉब रोल के बारे में जरुर चर्चा करें. आमने-सामने की गई इस बातचीत से आपको ज्यादा अच्छी तरह समझ आएगा कि एम्पलॉयर आपसे क्या उम्मीद रखते हैं?

2.   फाउंडर्स की बैकग्राउंड:

किसी स्टार्टअप को ज्वाइन करने से पहले, आप फाउंडर्स की बैकग्राउंड जरुर चेक करें. फाउंडर्स की इंडस्ट्री एक्सपर्टाइज़, एकेडेमिक बैकग्राउंड, नेटवर्क, स्किल्स और अनुभव के साथ ही उनके द्वारा जीते गए अवार्ड्स और अन्य जानकारी पर विशेष ध्यान दें. आपको चेक करना चाहिए कि फाउंडर्स ने स्टार्टअप में कितनी इन्वेस्टमेंट की है? ये खास बातें फाउंडर्स से सीधी बात करके या कंपनी में पहले से काम कर रहे कर्मचारियों से पता की जा सकती हैं. आप गूगल का इस्तेमाल करके भी लीडरशिप टीम के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं. आपको यह भी पता करना चाहिए कि कोई मामला या स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए तो फाउंडर्स कैसे इस स्थिति को हैंडल करते हैं? इन सभी बातों से उनकी भावी सफलता के बारे में अनुमान लगाने में आपको सहायता मिल सकती है.

3.   फंडिंग रिसोर्सेज:

किसी स्टारअप कंपनी को ज्वाइन करते समय सबसे महत्वपूर्ण प्वाइंट ‘धन’ है. यह धन या पैसा कहां से आया है? कोई स्टार्टअप कंपनी वेंचर-बैक्ड हो सकती है और उसके बैंक अकाउंट में कई मिलियन रुपये हो सकते हैं या फिर स्टार्टअप कंपनी बूटस्ट्रेप्ड हो सकती है अर्थात उस कंपनी का कोई इन्वेस्टर ही न हो. स्टार्टअप कंपनी में इन्वेस्टर्स की बैकिंग के बारे में पूछताछ करना जरुरी होता है ताकि यह पता चल सके कि क्या कंपनी किसी बुरे समय में आपको फाइनेंशियल असिस्टेंस दे सकती है? मजबूत और विश्वसनीय इन्वेस्टर्स द्वारा समर्थित किसी स्टार्टअप कंपनी की अपनी फील्ड में सफल होने की ज्यादा संभावना है बनिस्पत उस स्टार्टअप कंपनी के जिसके पास इन्वेस्टर्स की फाइनेंशियल सपोर्ट नहीं हो. इसी तरह, किसी कारोबार में अपना पैसा इन्वेस्ट करने से पहले इन्वेस्टर्स इस बारे में काफी रिसर्च करते हैं. इसलिए, अगर किसी स्टार्टअप कपनी के पास ऐसे प्रतिष्ठित स्पोंसर्स हैं जो इसे आर्थिक तौर पर समर्थन दे रहे हैं, तो ऐसी स्टार्टअप कंपनी का कारोबार बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं.

4.   वर्किंग स्टेज:

जीवन में रिस्क लेना ही वास्तव में जीवन है. जीवन में ऐसे रिवार्ड्स या खुशियां बहुत कम होती हैं जो आपको बिना कोई रिस्क उठाये मिल सकती हैं. अगर आप कोई रिस्क लेना चाहते हैं तो जरुर आगे बढ़ें लेकिन किसी अंधे की तरह नहीं. इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि कोई रिस्क उठाने से पहले आप कोई अनुमान न लगाएं. जिस स्टार्टअप कंपनी को आप ज्वाइन करना चाहते हैं, वह कंपनी किस फेज या स्थिति में है? जिस स्टार्टअप कंपनी की मार्केट में अपनी कोई जगह नहीं बनी है और उस कंपनी के पास मूलधन भी कम है तो ऐसी स्टार्टअप कंपनी को ज्वाइन करना जुआ खेलने की तरह साबित हो सकता है. दूसरी तरफ, अगर किसी स्टार्टअप कंपनी के प्रोडक्ट को शुरू में कस्टमर्स काफी पसंद करते हैं और कस्टमर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है तो आप तुरंत उस कंपनी को ज्वाइन कर सकते हैं.

5.   थकाने वाले लंबे काम के घंटे:

अपने काम के प्रति जोश से भरे फाउंडर पर पैसा कमाने के लिए अपने प्रोडक्ट को लोकप्रिय बनाने के लिए काफी प्रेशर होता है. अगर आप किसी प्रेशर के भीतर काम कर रहे हैं और कामकाज आपके मन के मुताबिक ज्यादा तेज़ी से नहीं हो पा रहा है तो कई घंटे लगातार काम करना इस समस्या का सबसे आसान समाधान हो सकता है. दूसरे शब्दों में, आमतौर पर स्टार्टअप कंपनियों में बड़ी तेज़ गति से काम करने का माहौल होता है और एम्पलॉईज को अपनी भरपूर क्षमता से काम करने के लिए प्रेरित किया जाता है. इसलिए, किसी स्टार्टअप कंपनी के लिए काम करना आपके लिए एक रोलर कॉस्टर राइड हो सकती है. अतः, ऐसे लोग जो अपने पेशे और जीवन में अच्छा संतुलन बनाये रखने को प्राथमिकता देते हैं, शायद कई घंटे लगातार काम करने की शर्त को पसंद न करें.

6.   प्रोडक्ट या सर्विस की भावी सफलता:

स्टार्टअप कंपनी के प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में बाज़ार का रुख जानने की कोशिश करें. पता करें कि कंपनी के प्रोडक्ट या सर्विस को लेकर मार्केट में कस्टमर्स की भीड़ है या नहीं? क्या कंपनी मार्केट में अपनी फील्ड में पहले से कारोबार करने वाली कंपनियों के साथ सीधा कॉम्पीटीशन कर रही है? कपनी कौन से बिजनेस इश्यूज को सॉल्व करने की कोशिश कर रही है? दरअसल, बिना कस्टमर्स या मार्केट्स के कोई भी कंपनी लंबे समय तक अपना कारोबार नहीं चला सकेगी.

7.   स्टार्टअप एग्जिट्स:

आप यह भी पता करें कि टॉप मैनेजमेंट के लेवल पर कितने लोगों ने कंपनी छोड़ी है? कई मामलों में फाउंडर ने भी कंपनी छोड़ दी है जोकि भावी एम्पलॉईज के लिए एक बुरी खबर है. लोग कोई स्टार्टअप कंपनी इसलिए ज्वाइन करते हैं ताकि कंपनी की तरक्की के साथ उनकी भी तरक्की हो सके. जॉब एग्जिट्स अक्सर टॉप मैनेजमेंट में झगड़े का नतीजा होते हैं. फाउंडर्स और इन्वेस्टर्स के बीच आमने-सामने के झगड़े पूरे कारोबार को अपसेट कर सकते हैं और इससे संबद्ध स्टार्टअप कंपनी तथा इसके सभी एम्पलॉईज का भविष्य खतरे में पड़ सकता है. इसलिए, किसी स्टार्टअप कंपनी को ज्वाइन करने से पहले, आप उस कंपनी से होने वाले जॉब एग्जिट्स के बारे में, खासकर पिछले 1 – 2 वर्षों में बोर्ड मेम्बर्स और टॉप मैनेजमेंट द्वारा संबद्ध स्टार्टअप कंपनी से जॉब छोड़ने के बारे में जरुर पता लगायें.

निष्कर्ष:

आप अच्छी कमाई करने और एक सम्मानजनक पोस्ट हासिल करने की उम्मीद में किसी स्टार्टअप कंपनी में जॉब ज्वाइन करने से पहले उपरोक्त सभी प्वाइंट्स पर जरुर ध्यान दें. लेकिन ठीक इस समय आप इस बात का भी ख्याल रखें कि आपकी तरफ से बरती गई पूरी सावधानी किसी स्टार्टअप कंपनी की सफलता की गारंटी नहीं हो सकती. आखिर में आपको केवल इंडस्ट्री में नए कॉन्टेक्ट्स और विभिन्न कार्य-अनुभव ही मिलेंगे जो आपको अतिरिक्त अवसरों का फायदा उठाने में मदद करेंगे.

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