भारत में स्टूडेंट्स के लिए फाइनेंशल मैनेजमेंट में करियर विकल्प

फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्स के तहत फाइनेंशल प्लानिंग, एकाउंटिंग और हरेक बिजनेस संगठन के लाभदायक विकास के लिए बिजनेस स्ट्रेटेजीज़ का अध्ययन किया जाता है. इन कोर्सेज का लक्ष्य स्टूडेंट्स को फाइनेंशल स्किल्स प्रदान करना है ताकि संबद्ध संगठन के फाइनेंशल रिसोर्सेज निर्धारित करने के साथ ही बजट तैयार किया जा सके. इस आर्टिकल में हम भारतीय स्टूडेंट्स के लिए फाइनेंशल मैनेजमेंट में उपलब्ध करियर विकल्पों के बारे में चर्चा कर रहे हैं.

Created On: Mar 3, 2021 14:28 ISTModified On: Mar 3, 2021 14:28 IST

Financial Management

भारत में स्टूडेंट्स के लिए फाइनेंशल मैनेजमेंट के प्रमुख कोर्सेज

आप अपनी 10+2 क्लास पास करने के बाद फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज कर सकते हैं. अगर आप अंडरग्रेजुएट कोर्सेज करने के लिए अपना बहुत ज्यादा समय खर्च नहीं करना चाहते हैं तो आप डिप्लोमा कोर्सेज कर सकते हैं. हालांकि, अगर आप हायर स्टडीज प्राप्त करना चाहते हैं तो आपके लिए अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन लेना काफी बढ़िया निर्णय साबित होगा. फाइनेंशल मैनेजमेंट के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कोर्सेज का विवरण आपकी सहूलियत के लिए नीचे दिया जा रहा है: 

फाइनेंशल मैनेजमेंट डिप्लोमा कोर्सेज

छात्र 10+2 क्लास पास करने के तुरंत बाद डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं. इस कोर्स की अवधि 1 वर्ष है.

फाइनेंशल मैनेजमेंट अंडरग्रेजुएट कोर्सेज

फाइनेंशल मैनेजमेंट में अंडरग्रेजुएट कोर्स की अवधि 3 वर्ष होती है. फाइनेंशल मैनेजमेंट में अंडरग्रेजुएट कोर्स को बीबीए डिग्री के तौर पर जाना जाता है.

फाइनेंशल मैनेजमेंट पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज

फाइनेंशल मैनेजमेंट में पोस्टग्रेजुएट कोर्स की अवधि 2 वर्ष होती है. इस डिग्री को आमतौर पर फाइनेंशल मैनेजमेंट में एमए/ एमबीए की डिग्री के नाम से जाना जाता है.

फाइनेंशल मैनेजमेंट डॉक्टोरल कोर्सेज

आप किसी संबद्ध विषय में पोस्टग्रेजुएशन की डिग्री प्राप्त करने के बाद फाइनेंशल मैनेजमेंट में डॉक्टोरल कोर्स अर्थात डॉक्टरेट ऑफ़ फिलोसोफी (पीएचडी) की डिग्री प्राप्त कर सकते हैं. डॉक्टोरल कोर्स की अवधि 3-4 वर्ष है.

फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्स के बारे में जानकारी

बैंकिंग, फाइनेंशल सर्विसेज, एनबीएफसीज या कॉरपोरेट से संबद्ध हरेक इंडस्ट्री के लिए फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्स के तहत ऐसे सभी विषय और इश्यूज शामिल होते हैं जो अपने स्टूडेंट्स में विभिन्न मैनेजमेंट स्किल्स विकसित करने के साथ-साथ उन्हें संबद्ध कंपनी के सभी फाइनेंशल मैटर्स को बेहतरीन तरीके से हैंडल करना सिखा देते हैं. इसलिए, इस आर्टिकल में हम भारतीय स्टूडेंट्स के लिए फाइनेंशल मैनेजमेंट में उपलब्ध करियर विकल्पों के बारे में चर्चा कर रहे हैं.

भारत में फाइनेंस मैनेजर का जॉब प्रोफाइल

हरेक फाइनेंस मैनेजर का काम फाइनेंशल रिपोर्ट्स पेश करना और फाइनेंशल जानकारी को इन्टरप्रेट करना होता है ताकि संबद्ध संगठन की फाइनेंशल स्थिति के आधार पर टॉप मैनेजमेंट सभी जरुरी निर्णय ले सके. फाइनेंस मैनेजर संगठन की फाइनेंशल हेल्थ या आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए भी स्ट्रेटेजीज बनाने में व्यस्त रहते हैं. उनका काम यहीं समाप्त नहीं होता है, वे कॉस्ट्स, प्राइसिंग, वेरिएबल कॉन्ट्रिब्यूशन्स, सेल्स और रेवेन्यु से संबद्ध सभी कार्य भी करते हैं ताकि संगठन के प्रॉफिट को लगातार बढ़ाया जा सके. किसी भी संगठन के सभी कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए फाइनेंस मैनेजर उस संगठन की ‘लाइफलाइन’ होता है.

भारत में फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया

कई मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटीज और इंस्टिट्यूट्स फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज करवाते हैं. यद्यपि, प्रत्येक कॉलेज/ इंस्टिट्यूट के अपने अलग-अलग एंट्रेंस एग्जाम, एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया और एडमिशन प्रोसेस होते हैं. इसलिये, इन फाइनेंशल कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए इन कोर्सेज से संबद्ध आवश्यक शर्तों के बारे में जानकारी प्राप्त करना आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है.

एडमिशन प्रोसेस में पहला कदम एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया है. अगर आपको इस सेक्शन में उल्लिखित क्राइटेरिया के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है तो आप उक्त कोर्स के लिए बड़ी सरलता से अप्लाई कर सकते हैं. इसलिए, फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्स में अप्लाई करने के लिए हरेक लेवल के लिए निर्धारित एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के बारे में आइये जानकारी प्राप्त करें:

डिप्लोमा लेवल

आप 10+2 क्लास पास करने के बाद फाइनेंशल मैनेजमेंट में डिप्लोमा कोर्स कर सकते हैं. इस डिप्लोमा लेवल कोर्स में फाइनेंशल मार्केट्स, कॉरपोरेट फाइनेंस और बिजनेस करने के लिए जरुरी फिक्स्ड और वर्किंग कैपिटल के बारे में बेसिक डिटेल्स शामिल हैं.

अंडरग्रेजुएट लेवल

अंडरग्रेजुएट लेवल कोर्स में भी आप अपनी 10+2 क्लास किसी भी विषय में पास करने के बाद एडमिशन ले सकते हैं. आमतौर पर जिन स्टूडेंट्स ने 12वीं क्लास कॉमर्स विषय सहित पास की होती है, उन्हें एडमिशन में वरीयता दी जाती है.

पोस्टग्रेजुएट लेवल

किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी/ कॉलेज से कम से कम 50% कुल प्रतिशत के साथ ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद आप फाइनेंशल मैनेजमेंट में पोस्टग्रेजुएट कोर्स करने के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

डॉक्टोरल लेवल

फाइनेंशल मैनेजमेंट के क्षेत्र में आप हाईएस्ट लेवल की डिग्री के तौर पर डॉक्टोरल कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं. किसी मान्यताप्राप्त यूनिवर्सिटी/ कॉलेज से पीएचडी की डिग्री प्राप्त करने के बाद आप अपने नाम के आगे ‘डॉक्टर’ का टाइटल इस्तेमाल कर सकते हैं.

भारत में फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज करने के लिए टॉप इंस्टिट्यूट्स

फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज भारत में विभिन्न बी-स्कूल्स द्वारा करवाये जाते हैं. प्रत्येक यूनिवर्सिटी द्वारा ऑफर किया गया कोर्स करिकुलम अन्य यूनिवर्सिटीज के कोर्स करिकुलम से अलग हो सकता है. अगर आप फाइनेंशल मैनेजमेंट में अपना करियर बनाना चाहते हैं तो आप नीचे उल्लिखित विभिन्न एमबीए इंस्टिट्यूट्स की लिस्ट देखें. इन इंस्टिट्यूट्स की रैंकिंग एनआईआरएफ, मानव संसाधन और विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) द्वारा जारी की गई है और ये रैंकिंग्स छात्रों को आईआईएमज द्वारा प्रदान की जाने वाली एजुकेशन की क्वालिटी को उचित ठहरती हैं.

क्रम संख्या

इंस्टिट्यूट

लोकेशन

1

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट

अहमदाबाद

2

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट

बैंगलोर

3

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट

कलकत्ता

4

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट

लखनऊ

5

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

बॉम्बे

6

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट

कोझीकोड़

7

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

खड़गपुर

8

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

दिल्ली

9

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी

रुड़की

10

ज़ेवियर लेबर रिलेशन्स इंस्टिट्यूट

जमशेदपुर

सोर्स: एनआईआरएफ रैंकिंग्स

फाइनेंशल मैनेजमेंट में इंडियन ग्रेजुएट्स के लिए सैलरी प्रॉस्पेक्ट्स

जब आप अपने लिए कोई करियर चुनते हैं तो सैलरी एक महत्वपूर्ण फैक्टर साबित होती है. फाइनेंस मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स के लिए, सैलरी को लेकर कोई चिंता करने की बात नहीं है क्योंकि इंडस्ट्री स्किल्ड और टैलेंटेड कैंडिडेट्स को अच्छी सैलरी देती है बशर्ते कि वे अपने कार्य-क्षेत्र में एक्सपर्ट हों और वे लेटेस्ट अपडेट्स से भी पूरी तरह वाकिफ हों. फाइनेंस ग्रेजुएट्स को दी जाने वाली सैलरी का विवरण निम्नलिखित है:

कार्य अनुभव के वर्ष

सैलरी (लाख रूपये)

एक वर्ष से कम

190000 –700000

1-4 वर्ष

240534 – 1211501

5-9 वर्ष

487126 – 1530296

10-19 वर्ष

401482 – 2014703

20 वर्ष  और इससे अधिक वर्ष

481653 – 2442522

सोर्स: पेस्केल.कॉम

भारत में फाइनेंस मैनेजर्स के लिए टॉप रिक्रूटिंग ऑर्गेनाइजेशन्स

फाइनेंस के डोमेन में स्पेशलाइजेशन करने वाले कैंडिडेट्स के लिए आजकल जॉब के ढेरों अवसर मौजूद हैं. चाहे वह कोई फर्म हो या कोई कंपनी या फिर, बैंक्स, सरकारी विभाग और एजेंसीज, एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स आदि ही क्यों न हों, उक्त सभी इंस्टिट्यूशन्स में फाइनेंस डोमेन से संबद्ध प्रोफेशनल्स के लिए अत्यधिक जॉब ऑप्शन्स मौजूद हैं. इसलिए यहां ‘ब्रांडफाइनेंस.कॉम’ द्वारा दी गई रैंकिंग के अनुसार फाइनेंशल फील्ड में सबसे ख़ास इंडियन ब्रांड्स की एक लिस्ट पेश है. आप इस लिस्ट में से अपने लिए एक बेहतरीन ब्रांड्स चुन सकते हैं. आइये पढ़ें: 

  1. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया
  2. एलआईसी
  3. आईसीआईसीआई बैंक
  4. एचडीएफसी बैंक
  5. कोटक महिंद्रा बैंक
  6. आईडीबीआई बैंक
  7. कैनरा बैंक
  8. यूनियन बैंक ऑफ इंडिया
  9. इंडियन ओवरसीज बैंक
  10. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
  11. एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड
  12. बजाज कैपिटल लिमिटेड
  13. डीएसपी मेरिल लिंच लिमिटेड
  14. एल एंड टी फाइनेंस लिमिटेड
  15. कार्वी ग्रुप

भारत में फाइनेंशल मैनेजमेंट कोर्सेज से संबद्ध करियर स्कोप

फाइनेंशल मैनेजमेंट के क्षेत्र में स्किल्ल्ड प्रोफेशनल्स के लिए जॉब के ढेरों अवसर मौजूद हैं ताकि संगठनों की खाली पोस्ट्स को भरा जा सके. आपने चाहे वह कोई डिप्लोमा, डिग्री या डॉक्टोरल कोर्स किया हो, आपको इंडस्ट्री में डेसिग्नेशन और सैलरी आपके एजुकेशन लेवल और कार्य-अनुभव के आधार पर दी जाती है. इसलिये, समस्त बिजनेस वर्ल्ड में फाइनेंशल मैनेजमेंट के क्षेत्र में वर्तमान हायरिंग ट्रेंड के बारे में आइये चर्चा करें:

भारत में फाइनेंशल मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स के लिए प्रमुख जॉब टाइटल्स

किसी फ्रेशर के लिए, किसी फाइनेंशल फर्म, कंपनी या मार्केट में जॉब प्राप्त करना उसके करियर का बेसिक आधार होता है. फाइनेंस ग्रेजुएट का रोल बहुत गतिशील है क्योंकि उनके लिए संगठन के अन्य डिपार्टमेंट्स के साथ सहयोग करना आवश्यक होता है और अगर जरूरी हो तो उन्हें सामने आकर कस्टमर के साथ बातचीत करनी पड़ती है. यहां कुछ ऐसे लोकप्रिय जॉब डेसिग्नेशन दिए जा रहे हैं जो फाइनेंस ग्रेजुएट अपना कोर्स पूरा करने के बाद ज्वाइन कर सकते हैं:

  1. फाइनेंस मैनेजर
  2. फाइनेंशल प्लानर
  3. फाइनेंशल एनालिस्ट
  4. फाइनेंशल ऑडिटर
  5. इंवेस्टमेंट बैंकिंग एनालिस्ट
  6. एक्चुअरी
  7. अकाउंटेंट
  8. इंवेस्टर रिलेशन्स एसोसिएट

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