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रिटेल मैनेजमेंट में करियर

Sep 11, 2018 10:08 IST

Retail Management

परिचय

आज की बेहद कठिन व प्रतिस्पर्धी होती व्यवसायिक परिस्थितियों में सुपरमार्केट या हाइपरमार्केट का मैनेजमेंट ही खुदरा प्रबंधन (रिटेल मैनेजमेंट) कहलाता है.  पिछले दशक में इस इंडस्ट्री ने भारत में काफी विकास किया है. नयी मार्केटिंग नीति बनाने से लेकर बिजनेस को विभिन्न क्षेत्रों में फ़ैलाने तक कम्पनियां ग्राहकों को लुभाने के सभी हथकंडे आजमा चुकी हैं. 
यह एक ऐसा इंडस्ट्री है जो "ग्राहक सर्वोपरि है" के सिद्धांत पर कार्य करता है. अगली बार जब आप रिलाइंस फ्रेश अथवा बिग बाज़ार जैसे किसी हाइपर मार्केट या सुपरमार्केट से अपने पसंद की कोई वस्तु खरीदने जाएँ तो उस पर प्राप्त होने वाली छूट का विश्लेषण अवश्य करें.  आज बाज़ार डायनेमिक है तथा यहाँ उपस्थित तंत्र पूरी तरह कप्यूटराइज्ड़ है.  वो दिन लद गए जब आप ऊंची कीमत पर पास के किराना स्टोर से सामान लाते थे.  आज लगभग हर चीज़  छूट के साथ उपलब्ध है. वास्तव में यह सेल सीज़न है वो भी बिना किसी कारण के. आज लगभग सभी ब्रांड्स बाज़ार में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए अपनी फैक्ट्री आउटलेट से लेकर सुपरमार्केट तक सभी जगह छूट प्रदान कर रहे हैं. 
अतः रिटेल मैनेजमेंट  एक ऐसा विषय है जिसके लिए सभी ब्रांड्स, उनकी मार्केटिंग  नीति तथा ग्राहकों को जीतने की रिटेल फिलोसोफी के बारे में जानकारी होना आवश्यक है.

स्टेप बाई स्टेप

इस फील्ड  में करियर बनाने के लिए आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए कैट (कॉमन एडमिशन टेस्ट) परीक्षा पास करनी होगी तथा विदेशी यूनिवर्सिटीज से एमबीए करने के लिए जीमैट परीक्षा पास करनी होगी .

रिटेल मैनेजमेंट कोर्स कराने वाले कुछ अच्छे इंस्टीट्यूट हैं- एमडीआई, गुड़गांव व एनएमआईएमएस यूनिवर्सिटी, मुंबई. इनमें एडमिशन के लिए आपको एंट्रेंस एग्जाम पास करनी होगी. 

एक छात्र के रूप में रिटेल मैनेजमेंट पाठ्यक्रम से आपको निम्न विषयों को समझने में मदद मिलेगी  

  1. रिटेल मैनेजमेंट का परिचय एवं संकल्पना
  2. रिटेल ट्रेंड्स
  3. रिटेल मार्केट डिविजन
  4. रिटेल प्राइसिंग एवं मर्चेंडाइजिंग
  5. रिटेलिंग में रिलेशनशिप मार्केटिंग
  6. रिटेलिंग में इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का योगदान
  7. बाकी सभी विषय या तो इन विषयों के उप-विषय हैं या किसी न किसी रूप में इनसे जुड़े हुए हैं.

अपनी शुरुआत अति शीघ्र करें

रिटेल मैनेजमेंट सिर्फ कहने के लिए ट्रेडिशनल सब्जेक्ट है.यह एक ऐसा विकल्प है जिसे आपको तभी अपनाना चाहिए जब आपमें रिटेल मैनेजमेंट में रूचि तथा एडवरटिजमेंट के प्रति झुकाव हो.इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह एक बेहद ही सम्मानित करियर है

क्या यह मेरे लिए सही करियर है?

जैसा ऊपर बताया गया है, रिटेल मैनेजमेंट उन लोगों के लिए सही या बेहतर करियर है जो वस्तुओं, सेल्स मार्केट्स , मार्केट सिग्मेंट्स, बिजनेस की विविधता, एडवरटिजमेंट और कंपेन और मार्केटिंग रिसर्च के प्रति रुचि रखते हैं. यह प्रोफेशन बाजार में  नई कंपनियों की खोज के लिए व्यापक अवसर प्रदान करता है. आप एक असिस्टेंट रिटेल मैनेजर या स्टोर मैनेजर के रूप में अपनी शुरुआत कर सकते हैं. इस फील्ड में सफल होने के लिए आपको डायनेमिक और टीम लीडर होना जरुरी है.

इसकी पढ़ाई में कुल कितना खर्च होगा ?

कॉलेज या इंस्टीट्यूट के चुनाव के आधार पर रिटेल मैनेजमेंट में किसी कोर्स की वार्षिक फीस 1 से 3 लाख हो सकती है. यदि आप यह कोर्स टियर-1 के बी-स्कूलों जैसे आईआईएम इत्यादि से करते हैं तो फीस उपरोक्त बताई गयी सीमा में अधिकतम होगी. यदि आप किसी ऐसी अंतर्राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी का चुनाव करते हैं जो कि आपको विदेश में शिक्षा का अवसर प्रदान करे, तो उसकी फीस इससे भी ज्यादा हो सकती है.

ग्रांट्स / स्कॉलरशिप

शिक्षा ऋण लेने का सबसे अच्छा विकल्प स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया है जो कि 7.5 लाख तक का ऋण प्रदान करता है. दूसरे बैंक भी ये सुविधा प्रदान करते हैं परन्तु ऋण लेने से पहले उनकी ब्याज दर के बारे में जानकारी अवश्य करें.

कई कॉलेज अच्छे छात्रों को स्कॉलरशिप भी देते हैं. हालाँकि भारत में यह कम प्रचलित है परन्तु विदेशी संस्थान कैट अथवा जीमैट में अच्छा स्कोर करने वाले छात्रों को पूरी स्कॉलरशिप प्रदान करते हैं. हालाँकि यहाँ भी आपको अतिरिक्त खर्चों जैसे रहने-खाने का प्रबंध स्वयं ही करना होगा.  विदेशी संस्थान जीमैट व कैट स्कोर के आधार पर ही स्कॉलरशिप प्रदान करते है.

नौकरी की संभावनाएं

ग्रेजुएट्स  छात्रों के लिए इस क्षेत्र में रोज़गार की काफी संभावनाएं हैं. आप सेल्स एग्जीक्युटिव से अपने करियर की शुरूआत कर सकते हैं या सीधे सेल्स मैनेजर अथवा मार्केटिंग मैनेजर भी बन सकते हैं. यहाँ तक कि आप किसी बड़े रिटेल ब्रांड की फ्रेंचाईज़ लेकर अपना खुद का काम शुरू कर सकते हैं.

सैलरी

कार्य के परिमाण के आधार पर आप सेल्स एग्जीक्युटिव अथवा फ्लोर मैनेजर के तौर पर 15000 से 25000 रूपये तक मासिक वेतन प्राप्त कर सकते हैं. यहाँ आपकी ज़िम्मेदारी होती है- ग्राहकों को फ्लोर पर मैनेज करना व उन्हें खरीददारी में सहायता करना.  कॉर्पोरेट लेवल पर जाकर आप बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर भी बन सकते हैं.

डिमांड एंड सप्लाई

सुपरमार्केट और हाइपरमार्केट के बढ़ते बिजनेस के कारण फ्लोर पर्सन और रिटेल मैनेजर की मांग हमेशा बहुत हाई होती है. कभी-कभी बाजार जाने वाले कस्टमर्स को संभालने के लिए स्टार्टअप रिटेल चेन कॉलेज से फ्रेशर्स स्टूडेंट्स को पार्ट टाइम जॉब के लिए हायर करते हैं.कभी कभी तो ये 12 वीं पास स्टूडेंट्स का भी चयन कर लेते हैं. इसके लिए शैक्षणिक योग्यता न्यूनतम 10+2 ही होती है. रिटेल मैनेजमेंट में एमबीए पूरा करने वाले छात्रों के लिए बिजनेस रिसर्च,मार्केट रिसर्च और प्राइसिंग स्ट्रेटेजिस्ट आदि की बहुत जरुरत है.  वैसे भारत में इनकी सप्लाई ठीक है लेकिन रिटेल प्रोफेशनल्स की मांग हमेशा बनी रहती है.

मार्केट वाच

रिलायंस, बिग बाजार, विशाल मेगा मार्ट और नए स्टार बाजार जैसी कंपनियां अपने बेचने वाले प्रोडक्ट्स और वस्तुओं की भारी मात्रा के कारण प्रति दिन लाखों रुपये कमाती हैं. इन कंपनियों के अलावा, वेस्टसाइड और पैंटलून जैसे क्लॉथ सेल कंपनी,रीगल, मेट्रो और बाटा जैसे शूमेकर अपने प्रोडक्ट्स का मार्केटिंग करने के लिए विभिन्न स्ट्रेटेजी का उपयोग करते हैं और अपने ब्रांड बेचने के लिए नए नये क्रिएटिव्स के साथ मार्केट में अपने प्रोडक्ट को लॉंच करते हैं.

इस सन्दर्भ में गर्मी,सर्दी और वसंत में लगने वाले सेल बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. इन इन ब्रांडों के शेयरों में उतार चढ़ाव पूरी तरह से मासिक और वार्षिक सेल पर निर्भर करता है.

 

इंटरनेशनल फोकस

सुपर मार्ट जैसे विदेशी ब्रांड के आधार पर ही भारत में सुपरमार्केट और हाइपरमार्केट की अवधारणा को विकसित किया गया है,वॉल मार्ट जैसी एक कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को बाजार में  बेचने के लिए एडवांस सप्लाई चेन स्ट्रेटेजी का उपयोग करती है.

भारतीयों की संतुष्टि के लिए फैशन प्रोडक्ट्स को बेचने वाले रे-यान, बोस, गुच्ची और मैंगो जैसे ब्रांडों ने क्वालिटी प्रोडक्ट के साथ लंबे समय पहले ही भारतीय बाजार में प्रवेश किया है.

इस परिवेश में रिटेल मैनेजमेंट के स्टूडेंट्स के लिए नौकरी के अवसर काफी उत्साहजनक हैं.

पॉजेटिव्स/ निगेटिव्स

पॉजेटिव्स

• जर्मनी, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से कई विदेशी रिटेल चेन हैं जो हर साल भारत में स्टोर खोल रही हैं. नतीजतन, इन्होंने नौकरी तलाशने वालों के लिए कई अवसर पैदा किए हैं.

• सामान्य रूप से रिटेल सिस्टम बहुत आकर्षक और रोमांचक होते हैं. इस इंडस्ट्री में नौकरी करने वाले व्यक्तियों को विभिन्न प्रकार के लोगों से बातचीत करने का अवसर मिलता है.

निगेटिव्स

• कुछ रिटेल शॉप्स में ऐसे व्यक्तियों को हायर किया जाता है जो ग्रेजुएट हैं. वे रिटेल मैनेजमेंट में एमबीए की डिग्री या किसी विशिष्ट योग्यता की मांग नहीं करते हैं.कभी-कभी  इससे लोगों के करियर में परेशानी आ सकती है.

• कुछ ब्रांड जो बाजार में अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं, कभी-कभी अपने एम्प्लॉयी की छंटनी करते हैं जो रिटेल इंडस्ट्री से जुड़ा एक रिस्ट फैक्टर है.

 

अलग अलग भूमिकाएं, अलग-अलग नाम

रिटेल  कंपनियों द्वारा हायर किये जाने वाले एम्प्लॉयी को आमतौर पर फ्लोर मैनेजर,फ्लोर ऑफिसर, लॉबी मैनेजर आदि के रूप में जाना जाता है. कॉर्पोरेट लेवल पर उन्हें सेल्स मैनेजर या मार्केटिंग मैनेजर कहा जाता है.

रिटेल इंडस्ट्री के विकास और विस्तार ने आम जनता के लिए मॉल, सुपरमार्केट, मूवी थिएटर और हाइपरमार्केट के हाई डिमांड का अनुभव किया है. हालांकि सबके अपने अलग अलग प्रोडक्ट होते हैं. लेकिन कस्टमर्स को आकर्षित करने की उन सबकी कार्यक्षमता और शैली लगभग समान होती है.

भारत की शीर्ष 10 रिटेल कम्पनियां हैं-

  1. शॉपर्स-टॉप,
  2. वेस्टसाईड,
  3. पेंटालूंस,
  4. लाईफ-स्टाईल,
  5. आरपीजी रिटेल,
  6. क्रॉसवर्ड,
  7. विल्स लाइफ स्टाईल,
  8. ग्लोबस,
  9. पीरामल्स एवं

10.  एबनी रिटेल होल्डिंग्स.

 

 

हायरिंग टिप्स

किसी रिटेल कम्पनी में नौकरी पाने के लिए निम्नांकित बातों पर ध्यान दें -

  1. एक ऐसा रिज्यूमे तैयार कीजिये जो कि आपकी ग्राहकों से बात करने की कला व उत्कृष्ट संवाद क्षमता को दर्शाता हो.
  2. स्कूल या कॉलेज में प्राप्त किये गए पुरस्कारों का ज़िक्र रिज्यूमे में अवश्य करें.
  3. कम से कम 5 से 7 कंपनियों में आवेदन करें जिससे कि आप बेहतर विकल्प चुन सकें.

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