अंतरराष्ट्रीय न्यायल का फैसला–बाल्कन युद्ध के दौरान क्रोएशिया और सर्बिया ने नहीं किया था नरसंहार

अंतरराष्ट्रीय न्यायलय ने 3 फरवरी 2015 को अपने एक फैसले में कहा कि भूतपूर्व युगोस्लाविया के विघटन से हुए 1990 के दशक के बाल्कन युद्ध में क्रोएशिया और सर्बिया ने एक दूसरे की आबादी पर नरसंहार नहीं किया.

Created On: Feb 5, 2015 16:48 ISTModified On: Feb 5, 2015 16:54 IST

अंतरराष्ट्रीय न्यायलय (इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस – आईसीजे) ने 3 फरवरी 2015 को अपने एक फैसले में कहा कि भूतपूर्व युगोस्लाविया के विघटन की वजह से हुए 1990 के दशक के बाल्कन युद्ध में क्रोएशिया और सर्बिया ने एक दूसरे की आबादी पर नरसंहार नहीं किया.

जज पीटर टोमका की अध्यक्षता में 17 जजों के पैनल ने यह फैसला सुनाया कि विद्रोही सर्बों ने अपने क्षेत्र को वापस हासिल करने के लिए वर्ष 1995 में हुए क्रोएशिया आक्रमण में बहुत गंभीर अपराधों को अंजाम दिया गया लेकिन वह नरसंहार की स्तर तक नहीं पहुंचा था.

इसके अलावा अदालत ने कहा कि सर्ब सेना ने क्रोएशिया में बड़े पैमाने पर अपराधों को अंजाम दिया लेकिन उन्होंने भी नरसंहार नहीं किया. क्रोएशिया और सर्बिया के अपराधों को अदालत ने इसलिए नरसंहार नहीं कहा क्योंकि विनाश का इरादा जातीय सफाई में मौजूद नहीं था जिसे नरसंहार योजना का तत्व माना जाता है.

जजों के पैनल ने क्रोएशिया के दावे को दो के मुकाबले पंद्रह वोटों से खारिज कर दिया. क्रोएशिया ने जातीय सफाई के लिए विद्रोही सर्ब अल्पसंख्यकों का समर्थन खासतौर पर पूर्वी शहर वैंकूवर में, करने के लिए सर्बिया के खिलाफ क्षतिपूर्ति का दावा किया था.


सर्बिया के दावे को भी सर्वसम्मति से खारिज कर दिया गया. सर्बिया ने दावा किया था कि कर्जीना के ऑपरेशन स्ट्रोम के तहत वर्ष 1995 में क्रोएशिया से 200000 से अधिक जातीय सर्बों को निष्कासित किया गया था.

अदालत ने अपना यह फैसला भूतपूर्व युगोस्लाविया के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण पर आधारित मामलों के आधार पर सुनाया है जिसमें यह साबित किया गया था कि ऑपरेशन के तहत लोगों के पलायन का पता तो चलता है लेकिन वर्ष 1948 के नरसंहार समझौते के मुताबिक नरसंहार का आशय स्थापित नहीं होता.

युगोस्लाविया का विघटन
मामले बाल्कन युद्ध जो कि 1990 के दशक के अधिकांश समय जारी था,  में युगोस्लाविया के सात देशों में टूटने की वजह से चली लंबी कानूनी लड़ाई का हिस्सा थे और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के सबसे बुरी लड़ाई में 130000 से अधिक लोगों की मौत हो गई.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद युगोस्लाविया समाजवादी देश बन गया था. इसमें छह गणराज्य– बोस्निया– हर्जेगोविना, क्रोएशिया, मैसिडोनिया, मोंटेनेग्रो, सर्बिया औऱ स्लोवानिया थे. 1990 के दशक के शुरुआत में महासंघ टूटना शुरु हो गया था.

स्लोवानिया, क्रोएशिया, बोस्निया और मैसिडोनिया ने खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया जिसकी वजह से सर्ब–बहुल यूगोस्लाव सेना के साथ संघर्ष बढ़ गया. वर्ष 2006, मोंटेनेग्रो भी भूतपूर्व सर्बिया और मोंटेनेग्रो संघ से अपने रिश्ते खत्म कर संप्रभु देश के रूप में उभरा.

वर्ष 1948 का नरसंहार समझौता

यह समझौता वर्ष 1951 में लागू किया गया और उसमें निम्नलिखित में से किसी भी कृत्य जिसे राष्ट्रीय, जातीय या धार्मिक समूह को पूरी तरह या उसके कुछ हिस्सों को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया हो, नरसंहार कहलाएगा.

•    समूह के सदस्यों की हत्या
•    समूह के सदस्यों को शारीरिक या मानसिर रूप से गंभीर क्षति पहुंचाना
•    जानबूझ कर समूह की स्थितियों का प्रयोग उसके पूर्ण या आंशिक भौतिक विनाश करने पर.
•    समूह में जन्म रोकने के लिए किए गए इरादतन उपाय
•    समूह के बच्चों को जबरदस्ती दूसरे समूह में भेजना.

 

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