अस्थायी रूप से 240 दिन से अधिक काम करने वाला कर्मचारी स्थायी नौकरी का हकदार

India Current Affairs 2011. सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली और न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर की पीठ ने निर्णय दिया कि अस्थायी रूप से 240 दिन से अधिक...

Created On: Nov 25, 2011 16:26 ISTModified On: Nov 25, 2011 16:26 IST

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक कुमार गांगुली और न्यायमूर्ति जगदीश सिंह केहर की पीठ ने निर्णय दिया कि अस्थायी रूप से 240 दिन से अधिक काम करने वाला कर्मचारी स्थायी नौकरी का हकदार है. पीठ ने मैसूर स्टेट बैंक के कर्मचारी एचएस राजशेखर की याचिका स्वीकार करते हुए बैंक को उसे स्थायी नौकरी पर रखने का आदेश दिया, तथा बैंक के इस तर्क को खारिज कर दिया कि 240 दिन की गणना एक कलेंडर वर्ष में की जाती है.

पीठ ने कहा कि बैंक और उसकी यूनियन के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते में साफतौर पर कहा गया है कि कलेंडर वर्ष के अलावा एक ब्लॉक में किए गए काम को भी 240 दिन की गणना करते समय मान्यता दी जाएगी. कलेंडर वर्ष और एक ब्लॉक के 12 महीने परिवर्तनीय हैं. बैंक ने 1988 में यह नियम लागू किया था और इस संबंध में कर्मचारी संघ से समझौता भी किया था.

 एचएस राजशेखर को स्थायी करने के  पूर्व बैंक ने देवराजू को 240 दिन के आधार पर अधीनस्थ स्टाफ में समायोजित कर लिया था. इस आधार पर भी पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार तहत भी राजशेखर के दावे को सही ठहराया.

पीठ  ने कहा कि श्रमिक संबंधी मामलों में कलेंडर वर्ष और ब्लॉक के 12 महीने समान अर्थ रखते हैं. 12 महीनों के ब्लॉक में 240 दिन तक किया गया काम नियमों के तहत वैध है.
विदित हो कि कर्नाटक उच्च न्यायलय की एकल और खंडपीठ ने एचएस राजशेखर की याचिका खारिज कर दी थी.

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