आईएईए के साथ भारत के अतिरिक्त प्रोटोकॉल को अनुमोदन मिला

अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ भारत के अतिरिक्त प्रोटोकॉल को 22 जून 2014 को अनुमोदन मिला.

Created On: Jun 30, 2014 16:38 ISTModified On: Jun 30, 2014 16:40 IST

अंतरराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ भारत के अतिरिक्त प्रोटोकॉल को 22 जून 2014 को अनुमोदन मिला. इसके तहत आईएईए द्वारा निगरानी सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा और हथियारों के निर्माण के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले गैर–रक्षा सुविधाओँ पर इसका कोई असर नहीं होगा.

अतिरिक्त प्रोटोकॉल जुलाई 2005 में दिए गए इंडो– अमेरिका संयुक्त वक्तव्य में दी गई भारतीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करता है जिसमें स्पष्ट तौर पर कहा गया था कि नई दिल्ली आईएईए  के साथ अतिरिक्त प्रोटोकॉल समाप्त करेगी.

अतिरिक्त प्रोटोकॉल

अतिरिक्त प्रोटोकॉल की वजह से ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और बड़े परमाणु तकनीकों के आयात में वृद्धि होगी. यह भारत के परमाणु निर्यात के आंकड़ों का संग्रह सुनिश्चित करेगा और इस बाद की गारंटी देगा कि सामानों को अनधिकृत उपयोग के लिए नहीं बांटा जा रहा. नई व्यवस्था में आईएईए कर्मियों को

बहु–प्रवेश वीजा मुहैया कराकर उनके नियमित आगमन और प्रस्थान की सुविधा भी होगी.

पृष्ठभूमि

मार्च 2009 में आईएईए ने भारत के निगरानी समझौते के लिए अतिरिक्त प्रोटोकॉल को मंजूरी दी थी. इस समझौते ने 45 देशों के समूह को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) को भारत को नागरिक परमाणु क्षेत्र में अन्य देशों के साथ उसके व्यावसायिक संबंधों के लिए विशेष छूट देने के लिए मार्ग प्रशस्त किया है. यह छूट भारत के लिए जरूरी है क्योंकि परमाणु शक्तिसंपन्न होने के बाद भी भारत ने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किया है.

आईएईए के साथ हुए निगरानी समझौते में 20सुविधाएं मिलेंगी जिसमें हैदराबाद में परमाणु ईंधन परिसर, तारापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र, राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन, कुडनकुलम की दोनों इकाई और काकरापार परमाणु ऊर्जा स्टेशन शामिल है.

इस समझौते से भारत अपनी ऊर्जा कमी और महंगे जीवाश्म ईंधन आयात से निबट सकेगा.

भारत 19 चालू रिएक्टरों की मदद से अपने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को विस्तार करने की योजना बना रहा है. इनमें से पांच का निर्माण कार्य चल रहा है औऱ कम–से–कम 16और की योजना है. लेकिन विस्तार करने के लिए ईंधन के तौर पर आयातित यूरेनियम, विदेशी पूंजी के साथ– साथ 1000मेगावाट या इससे अधिक के बड़े रिएक्टरों को बनाने के लिए विशेषज्ञता की भी आवश्यकता है.

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