आईटी क्षेत्र की कराधान समीक्षा के लिए एन रंगाचारी की अध्यक्षता में समिति का गठन

Economy Current Affairs 2012. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र और अनुसंधान एवं विकास केंद्रों पर करों में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्रीय...

Created On: Jul 31, 2012 06:43 ISTModified On: Jul 31, 2012 18:48 IST

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र और अनुसंधान एवं विकास केंद्रों (रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर) पर करों में पारदर्शिता लाने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के पूर्व अध्यक्ष एन रगांचारी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया. समिति को 2010 के बजट में घोषित सेफ हार्बर प्रावधानों को अंतिम रूप देना है.

महानिदेशक आईटी अनिता कपूर और डीआईटी (टीपी) रश्मि सहानी सक्सेना को इस चार सदस्यीय समिति का सदस्य बनाया गया. इसके अतिरिक्त समिति के अध्यक्ष आयकर विभाग के किसी भी अधिकारी को इसमें सदस्य के रूप में शामिल कर सकेंगे. समिति संबंधित पक्षों और उससे जुडे़ सरकारी विभागों से विचार-विमर्श कर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र और उसके अनुसंधान और विकास केंद्रों (आरएंडडी सेंटर) पर कर संबंधी प्रावधानों को अंतिम रूप देगी.

इस समिति को 31 अगस्त 2012 तक अपने सुझाव व सिफारिशें सरकार को सौंपना है. सेफ हार्बर प्रावधानों के लिए समिति को तीन क्षेत्रों पर 30 सितंबर 2012 तक सुझाव का पहला सेट जारी करना है.  यह सुझाव हर महीने जारी किए जाने हैं और 31 दिसंबर 2012 तक ‘सेफ हार्बर’ के सभी प्रावधानों को अंतिम रूप दे दिया जाना है. यह समिति गार के प्रावधानों की समीक्षा के लिए गठित समिति से अलग है.

कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां उत्पाद विकास, विश्लेषण कार्य, सॉफ्टवेयर विकास जैसे कार्य अपनी सहायक इकाइयों के माध्यम से कर रही हैं. यह कारोबार आईटी साफ्टवेयर, आईटी हार्डवेयर, फर्मास्युटिकल्स शोध एवं विकास, ऑटोमोबाइल शोध एवं विकास और वैज्ञानिक शोध एवं विकास आदि शामिल हैं. ये केंद्र  विकास केंद्र के रूप में जाने जाते हैं. देश में 750 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियों के 1100 स्थानों पर इस तरह के केंद्र हैं.


विकास केंद्रों की वजह से भारत की पहचान ग्लोबल बनी हुई है, लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के आरएंडडी सेंटरों के मामले में देश को दूसरे कई देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. इसके मद्देनजर विकास केन्द्रों और आईटी सेक्टर पर कराधान को स्पष्ट करने की आवश्यकता है.

सेफ हार्बर अंतरराष्ट्रीय खुलासे की प्रक्रिया है ताकि ट्रांसफर प्राइसिंग से जुड़े कानूनी मामलों में कमी की जा सके. ट्रांसफर प्राइसिंग एक लेखा प्रक्रिया है जिसका उपयोग बहुराष्ट्रीय कंपनियां कर देनदारी कम करने के लिए करती हैं.


विदित हो कि इससे पहले प्रधानमंत्री ने जनरल एंटी एवायडेंस रूल्स (गार) की समीक्षा के लिए जुलाई 2012 के प्रारम्भ में विशेषज्ञों की समिति गठित की जोकि संबंधित पक्षों के साथ विचार विमर्श के बाद गार के दिशा-निर्देश को अंतिम रूप देगी. यह समिति का कार्य गार प्रावधान को लेकर व्याप्त आशंकाओं को दूर करना और निवेशकों को भारतीय कर प्रावधानों को लेकर आश्वस्त करना है.

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