आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक-2013 लोकसभा में ध्वनिमत से पारित

महिलाओं के यौन उत्पीड़न के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करने के उद्देश्य से आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक-2013 लोकसभा में पारित.

Created On: Mar 20, 2013 17:58 ISTModified On: Mar 20, 2013 18:05 IST

आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक-2013 लोकसभा में 19 मार्च 2013 को पास हो गया. इसका उद्देश्य महिलाओं के यौन उत्पीड़न के लिए कड़ी सजा का प्रावधान करना है. विपक्ष के संशोधनों को नामंजूर किये जाने के बाद इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. इसके बाद आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक-2013 को राज्यसभा में पास होने के लिए रखा जाना है. राज्यसभा में पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. वहां से पास होने के बाद यह विधेयक क़ानून बन जाएगा. यह क़ानून (आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक-2013) राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा 3 फरवरी 2013 को जारी अध्यादेश का स्थान लेगा.

आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक-2013 की मुख्य विशेषताएं:

• विधेयक में बलात्कार की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है.
• इस विधेयक में पीड़िता की मौत या उसके स्थायी रूप से मृत प्रायः हो जाने के मामलों में सजा को बढ़ाकर मृत्युदंड का प्रावधान.
• सामूहिक बलात्कार के मामले में कम से कम सजा बीस वर्ष होगी और इसे बढ़ाकर आजीवन करने का प्रावधान.
• महिलाओं के खिलाफ अपराध की एफआईआर दर्ज नहीं करने वाले पुलिसकर्मियों को दण्डित करने का प्रावधान.
• दुष्कर्म की झूठी शिकायत करने वाली महिलाओं को सजा का प्रावधान.
• महिला अपराध की सुनवाई में बंद कमरे में.
• सहमति से सेक्स की उम्र 18 वर्ष रखी गई.
• विधेयक में तेजाब फेंककर गंभीर नुकसान पहुंचाने, बुरी नियत से पीछा करने या देखने और यौन उत्पीड़न के अन्य मामलों में विशिष्ट सजाओं का प्रावधान.

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