इसरो में सेमी-क्रायोजेनिक इंजन के प्रयोग पर विचार

केरोसीन ईंधन से चलने वाली सेमी-क्रायोजेनिक इंजन को अपने अंतरिक्ष यानों में प्रयोग करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान में एक कार्यक्रम बनाया गया. 3 जनवरी 2010 को संस्थान के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने भविष्य में अंतरिक्ष यानों के बूस्टर के लिए इन इंजनों की आवश्यकता बतायी.

Created On: Oct 18, 2010 16:17 ISTModified On: Oct 18, 2010 16:17 IST

केरोसीन ईंधन से चलने वाली सेमी-क्रायोजेनिक इंजन को अपने अंतरिक्ष यानों में प्रयोग करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान में एक कार्यक्रम बनाया गया. 3 जनवरी 2010 को संस्थान के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन ने भविष्य में अंतरिक्ष यानों के बूस्टर के लिए इन इंजनों की आवश्यकता बतायी.


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान अभी जियो-सिंक्रोनस सेटेलाइट लॉन्च वेह्किल (जीएसएलवी – मार्क III) का निर्माण कर रहा है. यह 2017 तक चार हज़ार किलोग्राम के मानव निर्मित उपग्रह को दो इंसान सहित अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम होगा.

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