एसटीएपी तकनीक : एक पुनर्संरचित कोशिकीय घटना

उत्तेजना प्रेरित प्लुरीपोटेंसी (एसटीएपी) प्राप्त करने की  तकनीक चर्चा में रही.
Created On: Dec 30, 2014 14:51 ISTModified On: Dec 31, 2014 12:09 IST

उत्तेजना प्रेरित प्लुरीपोटेंसी प्राप्त करने की तकनीक (Stimulus-triggered acquisition of pluripotency, एसटीएपी) एक अद्वितीय पुनः संरचित  कोशिकीय घटना है. यह तकनीक चर्चा में रही क्योंकि इससे जुड़े कोशिका वैज्ञानिक हरुको ओबो काटा ने स्टेम कोशिका कांड के कारण आरआईकेईएन अनुसंधान संस्थान, जापान से इस्तीफा दे दिया था.

एसटीएपी तकनीक में न तो नाभिक हस्तांतरण की आवश्यकता है और न ही प्रतिलेखन कारक की. बल्कि इसमें प्रतिबद्ध दैहिक कोशिकाओं द्वारा चयन के बजाय पुनः संरचित कोशिकीय क्रियाओं से एसटीएपी कोशिकाओं को जन्म दिया जाता हैं.

एसटीएपी कोशिकाओं को शुद्ध लिम्फोसाइटों और साथ ही जीन पुनर्व्यवस्था विश्लेषण से उत्पादित किया जा सकता हैं.

यह प्लुरीपोटेंट स्टेम सेल पैदा करने की एक  विधि है जिसमें साधारण कोशिकाओं पर कुछ प्रकार के तनाव जैसे कि एक जीवाणु विष के अनुप्रयोग, तनु अम्ल में डूबा कर या शारीरिक दबाव डालकर इनका निर्माण किया जाता हैं.

इस तकनीक में मजबूत बाहरी उत्तेजनाओं जैसे की क्षणिक कम पीएच तनाव से पुनः संरचित स्तनधारी दैहिक कोशिकाओं का उपयोग प्लुरीपोटेंट स्टेम सेल के निर्माण के लिए किया जाता हैं.

एसटीएपी कोशिकाओं पर अनुसंधान के तहत डीएनए मेथिलिकरण में प्लुरीपोटेंसी मार्कर जीन की विनियामक क्षेत्रों में पर्याप्त कमी का पता चला है. ब्लास्टोसिस्ट इंजेक्शन से ज्ञात हुआ है कि एसटीएपी कोशिकाएं चिमेरिक भ्रूण को संतानों के लिए जर्मलाइन संचरण के माध्यम से योगदान देती हैं.

 

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