केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2013 जारी की

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु राज्य मंत्री प्रकाश जावडेकर ने 8 जुलाई 2014 को इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2013 (आईएसएफआर) जारी की.

Created On: Jul 31, 2014 14:31 ISTModified On: Jul 31, 2014 14:40 IST

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रकाश जावडेकर ने 8 जुलाई 2014 को इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2013 (आईएसएफआर) जारी की. यह इस श्रृंखला की 13वीं रिपोर्ट है.

प्रकाश जावडेकर ने यह रिपोर्ट नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में जारी की. इस रिपोर्ट में वन क्षेत्र, वृक्षों की संख्या, सदाबहार वन और वन के भीतर और बाहर के इलाकों में बढ़ रहे स्टॉक की जानकारी दी गई है.

इस रिपोर्ट में दी गई जानकारियां

  • वन क्षेत्र, वृक्षों की संख्या, सदाबहार वनों (4628 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह इलाका भारत में विश्व के सदाबहार वनस्पति का लगभग तीन फीसदी होने की बात बताता है) और वन क्षेत्र के अंदर और बाहर बढ़ते स्टॉक की जानकारी देता है.
  • इस रिपोर्ट में विशेष विषयगत जानकारी जैसे आदिवासी जिलों, पहाड़ी जिलों और उत्तर पूर्वी इलाकों के बारे में अलग से जानकारी दी गई है.
  • पिछले मूल्यांकन के संबंध में वर्तमान मूल्यांकन और बदलावों हेतु सभी राज्यों और जिलों के लिए वन आवरण क्षेत्र के बारे में भी सूचना प्रदान की गई है.

रिपोर्ट में तीन नए अध्याय भी शामिल किए गए हैं.

  • भारत के वनों की महत्वपूर्ण विशेषताएं– इस अध्याय में उत्थान स्थिति, विभिन्न चोटों के लिए खतरा, फसल रचना, उसका मूल, वन मृदा गुण और अन्य महत्वपूर्ण विशेषताओं का वर्णन किया गया है.
  • कृषि वानिकी प्रणाली में पेड़– इस अध्याय में इलाके, बढ़ते स्टॉक और कार्बन स्टॉक एवं कृषि वानिकी के तहत आने वाली अन्य चीजों के बारे में बताया गया है.
  • शहरी पेड़ संसाधन– यह अध्याय हरित कवर और शहरी इलाकों में बढ़ते लकड़ी के स्टॉक के बारे में जानकारी देता है.
  • अपने आकलन में रिपोर्ट बताती है कि देश का कुल वन और पेड़ क्षेत्र 87.92 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है जो कि भारत के भौगोलिक इलाके का 24.01 फीसदी है. वर्ष 2011 के मूल्यांकन से तुलना करें तो देश का वन क्षेत्र 5871 वर्ग किलोमीटर बढ़ा है.

आकलन के आधार पर वैसे राज्य जहां वनों की अधिकतम वृद्धि हुई है.

  • पश्चिम बंगाल– 3810 वर्ग किलोमीटर
  • ओडीशा– 1444 वर्ग किलोमीटर
  • केरल– 622 वर्ग किलोमीटर

इसके अलावा, आकलन सबसे बड़े वन क्षेत्र वाले राज्यों पर भी प्रकाश डालता है और वे हैं–

  • मध्य प्रदेश– क्षेत्रफल के लिहाज से देश का सबसे बड़ा वन क्षेत्र यहां हैं. यह 77522 वर्ग किलोमीटर में फैला है.
  • अरुणाचल प्रदेश– 67321 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र

भौगोलिक क्षेत्र के प्रतिशत के तौर पर वन क्षेत्र के मामले में मिजोरम अपने कुल भौगोलिक इलाके का 90.38 फीसदी के साथ भारत का सबसे बड़ा वन क्षेत्र है. इस मामले में मिजोरम के बाद 84.56 फीसदी के साथ लक्ष्यद्वीप आता है.

इसके अलावा, रिपोर्ट बताती है कि 15 राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में उनके भौगोलिक इलाके का 33 फीसदी से अधिक इलाका वन क्षेत्र में आता है. हालांकि ये राज्य और केंद्र शासित प्रदेश मिजोरम, लक्ष्यद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा कुल वन क्षेत्र का 75 फीसदी से अधिक बनाते हैं. जबकि गोवा, सिक्किम, केरल, उत्तराखंड, दादर एवं नगर हवेली, छत्तीसगढ़ और असम, ये सात राज्यों  में वन क्षेत्र 33 से 75 फीसदी के बीच है.

रिपोर्ट के अनुमान ने भारत के वन और वनों के बाहर के पेड़ों से कुल 5658.046 मिलियन के बढ़ते स्टॉक पर भी प्रकाश डाला है जिसमें 4173.326 मिलियन वनों के भीतर से जबकि 1484.68 मिलियन वनों के बाहर से बढ़ा है.

इसने भारत के वनों से कार्बन स्टॉक के 6941 मिलियन टन होने के अनुमान पर भी प्रकाश डाला है. जबकि, यह देश क कार्बन स्टॉक में वर्ष 2004 की तुलना में 278 मिलियन टन की बढ़ोतरी का सुझाव देता है.

इंडियन स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2013 के बारे में
आईएसएफआर 2013 स्वदेशी संसाधनों के एलआईएसएस III 23.5 मीटर के साथ अक्टूबर 2010– जनवरी 2012 के बीच न्यूनतम मैपेबल क्षेत्र में सेप्टियल रिजोल्यूशन एट II उपग्रहों की व्याख्या पर आधारित है.

सेटेलाइट की व्याख्या के अलावा रिपोर्ट में व्यापक और कठोर जमीनी हकीकत को भी ध्यान में रखा गया है. इसके अलावा, जमीन पर काम करने वाली पार्टियों द्वारा आवधिक आंकड़ों और अन्य स्रोंतों की सूचनाओं का इस्तेमाल सटीकता औऱ छवि की व्याख्या करने के लिए किया गया है. वर्तमान रिपोर्ट में दर्ज चेंज मैट्रिक्स को पिछली रिपोर्ट यानि आईएसएफआर 2011 के साथ परिवर्तन के लिए देखें.

भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई) को वर्ष 1987 के बाद से द्विवार्षिक आधार पर हमारे देश के वन और पेड़ संसाधनों के आकलन करने को कहा गया है. आकलन का परिणाम इसके द्विवार्षिक रिपोर्ट इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) में प्राकशित किया जाता है.

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