केंद्र सरकार ने सीएसआर गतिविधियों की रूपरेखा सुझाने के लिए अनिल बैजल पैनल बनाया

3 फरवरी 2015 को केंद्र सरकार ने कंपनियों द्वारा किए गए कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (निगमित सामाजिक दायित्व, सीएसआर) गतिविधियों के आकलन हेतु एक रूपरेखा का सुझाव देने के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक उच्चस्तरीय पैनल का गठन किया.

Created On: Feb 6, 2015 04:03 ISTModified On: Feb 6, 2015 17:35 IST

3 फरवरी 2015 को केंद्र सरकार ने कंपनियों द्वारा किए गए कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (निगमित सामाजिक दायित्व, सीएसआर) गतिविधियों के आकलन हेतु एक रूपरेखा का सुझाव देने के लिए कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक उच्चस्तरीय पैनल का गठन किया.
इस पैनल के अध्यक्ष भूतपूर्व केंद्रीय गृह सचिव अनिल बैजल होंगे. इसमें सार्वजनिक उद्यम विभाग और कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के सदस्य होंगे जिनमें शामिल हैं–
•दीपक नैय्यर, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर
•ओंकार एस कंवर, अपोलो टायर्स के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
•किरण कार्निक, नैसकॉम की भूतपूर्व अध्यक्ष  
कॉरपोरेट मामलों के केंद्रीय मंत्रालय और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) पैनल को संयुक्त रूप से सचिवालयी एवं तकनीकी सहायता प्रदान करेगें.
अनिल बैजल पैनल के संदर्भ की शर्तें
•कंपनियों द्वारा सीएसआर गतिविधियों पर खर्च की गई धनराशि का मूल्यांकन.
•सीएसआर प्रावधानों के अनुपालन की निगरानी के लिए उपयुक्त तरीके की सिफारिश करना.
•कंपनियों द्वारा उनके खुद के सीएसआर पहलों की व्यवस्थित निगरानी और मूल्यांकन के लिए उपाय सुझाना.
•विशेषज्ञ एजेंसियों के जरिए सीएसआर पहलों की निगरानी एवं मूल्यांकन के लिए रणनीतियों की पहचान और सीएसआर खर्च की प्रभावकारिता के संबंध में सरकार को पर्याप्त फीडबैक देना.
•इस बात पर गौर करना कि क्या सीएसआर कार्यों के लिए सरकारी कंपनियों के लिए अलग निगरानी तंत्र की जरूरत है. अगर ऐसा जरूरी पाया जाता है तो आवश्यक सुझाव दिया जाएगा.
भारत में निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के बारे में
निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) नियम कंपनी अधिनियम, 2013 के सातवीं अनुसूची के खंड 135 के तहत परिभाषित हैं जो कि 1 अप्रैल 2014 से प्रभाव में आया.
सीएसआर मानदंड उन कंपनियों पर लागू है जिनका सालाना टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये या इससे अधिक का है या जिसका निवल मूल्य 500 करोड़ रुपयों या उससे अधिक का है या शुद्ध लाभ पांच करोड़ रुपये या उससे अधिक है.
सीएसआर मानदंड़ों के अनुसार कंपनियों को एक सीएसआर समिति स्थापित करनी होगी जिसमें उनके बोर्ड के सदस्य होंगे और कम से कम एक स्वतंत्र निदेशक होगा.
यह कंपनियों को बीते तीन वर्षों में हुए उनके औसत शुद्ध लाभ का कम से कम 2 फीसदी सीएसआर गतिविधियों में खर्च करने को भी प्रोत्साहित करता है.
साल 2015,16 में सीएसआर गतिविधियों पर कंपनियों द्वारा करीब 14000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की उम्मीद की जा रही है.

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