कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने निगमित सामाजिक दायित्व के नियमों को अधिसूचना जारी की

कॉरपोरेट मामलों के केंद्रीय मंत्रालय ने निगमित सामाजिक दायित्वय (सीएसआर) नियमों की अधिसूचना 27 फरवरी 2014 को जारी की.

Created On: Mar 1, 2014 11:58 ISTModified On: Mar 1, 2014 12:05 IST

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने निगमित सामाजिक दायित्वय (सीएसआर) नियमों की अधिसूचना 27 फरवरी 2014 को जारी की. यह नियम 1 अप्रैल 2014 से प्रभावी होने हैं.

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ये नए नियम कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 135 और VII वीं अनुसूची को प्रभावी बनाएगा जो कंपनियों को सीएसआर संबंधी खर्चों से जोड़ता है.
 
इस नए नियम के अनुसार वैसी कंपनियां जिन्हें भारी मुनाफा होता है उन्हें अपने मुनाफे का कम– से–कम 2% सीएसआर गतिविधियों पर खर्च करना होगा जो समाज की भलाई के लिए होगा. 500 करोड़ रुपये की न्यूनतम निवल मूल्य वाली कंपनियां या 5 करोड़ रुपये के शुद्ध मुनाफा वाली कंपनियां या 1000 करोड़ रुपये का कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए सीएसआर गतिविधियों में 2% खर्च करना अनिवार्य होगा. हालांकि, मुनाफे की गणना करते समय विदेशी शाखाओं से होने वाले लाभ और भारत में दूसरी कंपनियों से मिलने वाला लाभांश को मुनाफे से बाहर रखा गया है.

प्रावधान
• दायरे में आने वाली कंपनियों को अपने तीन वर्ष के औसत वार्षिक शुद्ध लाभ का 2% हिस्सा सीएसआर गतिविधियों पर हर वित्त वर्ष में खर्च करना होगा. वित्त वर्ष 2014– 15 से यह लागू होगा.
• कंपनियों को अपनी सीएसआर नीतियों की घोषणा करनी होगी. इस नीति में योजनाओं/ गतिविधियों/ कार्यक्रमों और परियोजनाओं का उल्लेख करना होगा. ये कार्य नियमित व्यापार गतिविधियों का हिस्सा नहीं होने चाहिए.
• कंपनियां सीएसआर गतिविधियां सीएसआर नीतियों के अनुसार कंपनी के बोर्ड और सीएसआर समीति के फैसले के अनुसार शुरु कर सकते हैं.
• नियमों में सीएसआर समिति के गठन और सीएसआर नीतियों की निगरानी , बोर्ड के निदेशकों की भूमिका को भी परिभाषित किया गया है.
•  कंपनियों को दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर सीएसआर गतिविधियां करने की अनुमति होगी लेकिन उन्हें अपनी सीएसआर रिपोर्ट अलग– अलग प्रस्तुत करनी होगी.
• कंपनियों को एक वित्त वर्ष में सीएसआर गतिविधियों को संचालित करने में लगने वाले मानवशक्ति पर सीएसआर खर्च का सिर्फ 5% खर्च करने की अनुमति होगी. मानवशक्ति में कंपनी के लोग और कार्यान्वयन एजेंसियों के लोग ही शामिल हो सकते हैं .
• सीएसआर गतिविधियों को कंपनियां किसी सोसायटी या पंजीकृत ट्रस्ट के जरिए भी करा सकती हैं.
• सीएसआर गतिविधियों से बचा पैसा कंपनी के मुनाफे का हिस्सा नहीं होगा.
• किसी भी राजनीतिक दल को किसी भी प्रकार का दिया गया योगदान सीएसआर गतिविधि में शामिल नहीं होगा.
• कंपनी के कर्मचारियों के लाभ के लिए खर्च करना भी सीएसआर गतिविधि का हिस्सा नहीं माना जाएगा.
• सभी सीएसआर गतिविधियां भारत में ही करना होगा.
• नए नियम भारत में पंजीकृत विदेशी कंपनियों के लिए भी लागू होगी.
 
VIIवीं अनुसूची में शामिल सीएसआर गतिविधियां
• राष्ट्रीय धरोहर, कला और संस्कृति की सुरक्षा जिसमें ऐतिहासिक महत्व वाली इमारतें और स्थल एवं कला शामिल हैं.
• पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प को बढ़ावा देना और इनका विकास.
• सार्वजनिक पुस्तकालयों की स्थापना.
• अनाथों के लिए घर और छात्रावास की स्थापना.
• वृद्धाश्रम की स्थापना.
• डे केयर केंद्रों की स्थापना.
• महिलाओं के लिए घरों और छात्रावासों की स्थापना.
• ग्रामीण खेलों, राष्ट्रीय मान्यताप्राप्त खेलों, ओलंपिक खेलों और पैरालम्पिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण मुहैया कराना.  
• केंद्र सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त शैक्षणिक संस्थानों में स्थित प्रौद्योगिकी इनक्यूबेटरों के लिए फंड मुहैया कराना.
• शुद्ध पेयजल के उपलब्ध कराने के लिए काम करना.
• मिट्टी, हवा औऱ जल के गुणवत्ता बनाए रखने के लिए काम करना.
• प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण.
• पारिस्थितिक संतुलन को सुनिश्चित करना.
• वनस्पतियों, जीव संरक्षण, पशु कल्याण, कृषि वानिकी का संरक्षण.
• ग्रामीण विकास परियोजनाएं.
• जीविका वृद्धि संबंधी परियोजनाएं.
• स्वास्थ्य एवं स्वच्छता को बढ़ावा देना.
• असामानता का दंश झेल रहे सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों के लिए काम करना.
• युद्ध में मारे गए शहीदों की विधवाओं, सशस्त्र बलों के वीरों और उनके आश्रितों के लाभ से जुड़े काम.

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