ग्रीन बैंक टेलिस्कोप से अंतरिक्ष में हाइड्रोजन की नदी बहती दिखाई दी

खगोलविदों ने 28 जनवरी 2014 को अंतरिक्ष में बहती हाइड्रोजन की एक नदी की खोज की.

Created On: Jan 31, 2014 12:47 ISTModified On: Jan 31, 2014 12:54 IST

खगोलविदों ने 28 जनवरी 2014 को अंतरिक्ष में बहती हाइड्रोजन की एक नदी की खोज की. वैज्ञानिकों ने नेशनल साइंस फाउंडेशंस रॉबर्ट सी. बायर्ड की ग्रीन बैंक टेलिस्कोप (जीबीटी) का इस्तेमाल कर अभी तक कभी न देखी गयी इस नदी की खोज की.

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नदी एनजीसी 6946 नामक आकाशगंगा के निकट बह रही है और पृथ्वी से लगभग 22 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर है. वैज्ञानिकों के दल का नेतृत्व वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के डी.जे. पिसानो ने किया.  

इससे वैज्ञानिकों को यह स्पष्ट करने सहायता मिलेगी कि कुछ सर्पिल आकाशगंगाएँ किस तरह तारों के निर्माण की अपनी स्थिर गति बनाए रखती हैं.

अभी तक वैज्ञानिकों ने पाया कि तारों के निर्माण के लिए कहीं से ईंधन आना जरूरी है. मिल्कीवे जैसी आकाशगंगाएँ तारों के निर्माण के लिए विशिष्ट प्रकार से एक अपेक्षाकृत शांत किंतु नियमित गति बनाए रखती हैं.    

शीत प्रवाहों के रूप में जानी जाने वाली हाइड्रोजन-नदियाँ अंतर-आकाशगंगाई अंतरिक्ष में चलती-फिरती रह सकती हैं और तारों के निर्माण को ईंधन प्रदान कर सकती हैं, किंतु अब तक यह इतना छितरा हुआ था कि पता चलना मुश्किल था.

सीफियस और साइग्नस नक्षत्रसमूहों की सीमा पर पृथ्वी से लगभग 22 मिलियन प्रकाशवर्ष दूर एनजीसी 6946 जैसी अन्य आकाशगंगाएं कहीं ज्यादा सक्रिय हैं, हालाँकि एक्सट्रीम स्टारबर्स्ट (परम तेजी से तारों का निर्माण करने वाली) आकाशगंगाओं जितनी नहीं.

इससे यह प्रश्न उठता है कि इस आकाशगंगा और ऐसी अन्य सर्पिल आकाशगंगाओं में तारों के सतत निर्माण के लिए ईंधन कहाँ से आ रहा है?

जीबीटी के इस्तेमाल से पिसानो एनएसजी 6946 को उसके ब्रह्मांडीय पड़ोसियों से जोड़ने वाली न्यूट्रल हाइड्रोजन गैस से उत्सर्जित लालिमा का पता लगाने में सफल रहे. यह संकेत अन्य टेलिस्कोपों की खोज-देहरी से ठीक नीचे था.

जीबीटी की विशाल एकल डिश, अनवरुद्ध छिद्र और नेशनल रेडियो क्वाइट जोन में अवस्थिति जैसी विशिष्ट क्षमताओं ने उसे इस सूक्ष्म रेडियो-लाइट का पता लगाने में सक्षम बनाया.

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खगोलविदों ने लंबे समय से यह सिद्धांत प्रतिपादित किया है कि विशालतर आकाशगंगाएँ शीत हाइड्रोजन का सतत प्रवाह, उसकी कम स्थूल सहचरों के साथ संगति बिठाकर, प्राप्त कर सकती हैं.एनजीएस 6946 पर दृष्टिपात कर जीबीटी ने  एक शीत प्रवाह में उपस्थित रहने वाली फिलेमेंट्री संरचना जैसी चीज पाई, हालाँकि देखी गई चीज का दूसरा संभावित स्पष्टीकरण भी है. यह भी हो सकता है कि अतीत में किसी समय इस आकाशगंगा की करीबी मुठभेड़  हुई हो और वह अपने पीछे एक न्यूट्रल एटोमिक हाइड्रोजन की पट्टी छोड़ते हुए अपने पड़ोसियों के निकट से गुजरी हो.

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