चीन ने औपचारिक रूप से एक बच्चे की नीति में ढील दी और श्रम शिविरों को समाप्त किया

चीन के शीर्ष विधानसभा ने देश में एक बच्चे की नीति को आसान बनाने वाले प्रस्ताव को 28 दिसंबर 2013 को पारित कर दिया.

Created On: Dec 28, 2013 18:04 ISTModified On: Dec 28, 2013 18:13 IST

चीन के शीर्ष विधानसभा ने देश में एक बच्चे की नीति को आसान बनाने वाले प्रस्ताव को 28 दिसंबर 2013 को पारित कर दिया. यह प्रस्ताव नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (एनपीसी) की स्थायी समिति द्वारा पारित किया गया.

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इस प्रस्ताव के पास हो जाने के बाद चीन में दम्पति में से अगर कोई भी एक अपनी मां– पिता की इकलौती संतान होगा तो उसे दूसरा बच्चा पैदा करने की अनुमति होगी. इससे पहले, सिर्फ उन्हीं दम्पति को दूसरा बच्चा पैदा करने की इजाजत थी जो अपनी मां– पिता के इकलौते होते थे.
 
समिति ने श्रम शिविरों के माध्यम से पुनः शिक्षा को समाप्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी. नीति एक अपवाद है जिसमें वैसे जातीय अल्पसंख्यक और दम्पति शामिल हैं जिनके भाई– बहन नहीं हैं.
 
नीति में परिवर्तन की घोषणा नवंबर 2013 में शीर्ष कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों की बैठक के बाद की गई थी. ये सुधार देश के कुछ हिस्सों में परीक्षण के बाद कांग्रेस के छह दिवसीय सम्मेलन के आखिर में सामने आया. प्रभाव में लाने के लिए इसे सिर्फ विधायिका द्वारा अनुमोदन की जरूरत है.
 
चीन में एक बच्चे की नीति 1979 में आई थी. तेजी से बढ़ती जनसंख्या पर अंकुश लगाने के लिए फैसला किया गया था. नीति के अनुसार शहरों में दम्पति सिर्फ एक बच्चा पैदा कर सकते थे जबकि गांवों में दूसरा बच्चा तभी पैदा करने की इजाजत मिलती जब पहली संतान लड़की हो.
 
नीति के अनुसार चीन के 1.3 अरब लोगों की कुल आबादी की लगभग एक तिहाई आबादी, बिना आर्थिक दंड दिए दूसरा बच्चा पैदा नहीं कर सकती थी. इसकी वजह से चीन में लिंग–असंतुलन के हालात पैदा हो गए क्योंकि लोग लड़का पैदा करना पसंद करते थे.

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