देवयानी खोबरागडे संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में स्थानांतरित

न्यूयार्क में भारत की उप-वाणिज्य दूत देवयानी खोबरागडे को 18 दिसंबर 2013 को संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में स्थानांतरित कर दिया गया.

Created On: Dec 20, 2013 10:00 ISTModified On: Dec 20, 2013 10:03 IST

न्यूयार्क में भारत की उप वाणिज्यदूत देवयानी खोबरागडे को 18 दिसंबर 2013 को न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में स्थानांतरित कर दिया गया. ऐसा भारत ने उनकी राजनयिक निरापदता बढ़ाने के लिए किया. इससे पूर्व देवयानी खोबरागडे पर अमेरिका ने फौजदारी अपराधों का आरोप लगाया था.

आईएफएस अधिकारी देवयानी को न्यूयार्क में उप महावाणिज्यदूत के पद पर स्थानांतरित किया गया था. संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी मिशन न्यूयार्क में स्थित है.  

उन्हें संयुक्त राष्ट्र में इस डर से भेजा गया कि उन्हें फिर से निरुद्ध किया जा सकता है, क्योंकि अमेरिका ने उन्हें दिसंबर 2013 के दूसरे हफ्ते में गिरफ्तार कर लिया था. संयुक्त राष्ट्र की पदाधिकारी के रूप में उन्हें पूर्ण राजनयिक सुरक्षा प्राप्त होगी, जो उन्हें वाणिज्यदूतावास के अधिकारी के रूप में प्राप्त नहीं थी.

वर्तमान में भारत चाहता है कि अमेरिका माफी माँगे और देवयानी खोबरागडे के ऊपर से फौजदारी अपराध के आरोप वापस ले तथा उन्हें घर वापस आने दे.  

अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने 18 दिसंबर 2013 को भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन से बात कर इस प्रकरण पर खेद किया था.  

दौत्य संबंधों पर वियना संधि, 1963

राजनयिक संबंधों पर वियना संधि 1961 में की गई थी. यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जो स्वतंत्र देशों के बीच राजनयिक संबंधों की रूपरेखा परिभाषित करती है. यह राजनयिकों के आचरण को नियंत्रित करती है और उन्हें विदेशों में कार्य करने पर प्राप्त होने वाली सुरक्षाओं को परिभाषित करती है. राजनयिक संबंधों पर वियना संधि के ये तीन अनुच्छेद महत्त्वपूर्ण हैं :  

अनुच्छेद 40 : वाणिज्यदूतावास अधिकारियों की सुरक्षा

प्राप्तकर्ता देश वाणिज्यदूतावास अधिकारियों को उचित आदर देगा और उन पर, उनकी स्वतंत्रता पर तथा उनकी गरिमा पर कोई हमला होने से रोकने के लिए समस्त उपयुक्त कदम उठाएगा.

अनुच्छेद 40 : वाणिज्यदूतावास अधिकारियों की निजी अलंघ्यता

1. वाणिज्यदूतावास अधिकारी मुकदमा लंबित रहने के दौरान गिरफ्तार या निरुद्ध नहीं किए जाएँगे, सिवाय किसी घोर अपराध के और सक्षम न्यायिक अधिकारी के निर्णय के अनुसरण में.  

2.इस अनुच्छेद के पैरा 1 में निर्दिष्ट मामले को छोड़कर वाणिज्यदूतावास अधिकारी जेल में नहीं डाले जाएँगे या किसी अन्य प्रकार से अवरुद्ध नहीं किए जाएंगे, सिवाय अंतिम प्रभाव वाले न्यायिक निर्णय के.    

3. यदि किसी वाणिज्यदूतावास अधिकारी के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाती है, तो उसे सक्षम अधिकारी के समक्ष अवश्य उपस्थित होना चाहिए. इसके बावजूद कार्रवाई उसकी आधिकारिक स्थिति को देय आदर के साथ, और इस अनुच्छेद के पैरा 1 में निर्दिष्ट मामले को छोड़कर, इस तरह संचालित की जाएगी कि वाणिज्यदूतावास के कार्य कम से कम बाधित हों. जब, इस अनुच्छेद के पैरा 1 में उल्लिखित परिस्थितियों में, किसी वाणिज्यदूतावास अधिकारी को निरुद्ध करना आवश्यक हो जाए, तो उसके विरुद्ध कार्यवाही न्यूनतम देरी के साथ शुरू की जाएगी.      

अनुच्छेद 40 : क्षेत्राधिकार से सुरक्षा

1. वाणिज्यदूतावास अधिकारी और वाणिज्यदूतावास कर्मचारी वाणिज्य दूतावास के कार्य करने के संबंध में प्राप्तकर्ता देश के न्यायिक और प्रशासनिक प्राधिकरणों के क्षेत्राधिकार के प्रति जवाबदेह नहीं होंगे.

2. किंतु इस अनुच्छेद के पैरा 1 के उपबंध ऐसे किसी नागरिक कार्य पर लागू नहीं होंगे, जो :

(a) वाणिज्यदूतावास अधिकारी या वाणिज्यदूतावास कर्मचारी द्वारा निष्पादित किसी संविदा से पैदा हुआ हो, जिसमें उसने प्रेषक देश के एजेंट के रूप में स्पष्ट या निहित रूप से संविदा न की हो.   

(b) प्राप्तकर्ता देश में किसी वाहन, समुद्री यान या वायुयान द्वारा किसी दुर्घटना के फलस्वरूप किसी तृतीय पक्ष द्वारा पैदा किया गया हो.

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