पंचायत चुनावों से जनजातीय उत्थान

12 जनवरी 2010 को उच्चतम न्यायालय ने जनजातीय क्षेत्रों में पंचायत विस्तार (पेसा -  Panchayat Extension to Scheduled Areas) एक्ट, 1996 के तहत झारखण्ड में पंचायत चुनाव कराने का फैसला दिया. फैसले में जनजातीय क्षेत्रों के मुखिया के लिए 100 फीसदी जनजातीय आरक्षण की विवेचना है.

Created On: Oct 23, 2010 16:17 ISTModified On: Oct 23, 2010 16:29 IST

12 जनवरी 2010 को उच्चतम न्यायालय ने जनजातीय क्षेत्रों में पंचायत विस्तार (पेसा -  Panchayat Extension to Scheduled Areas) एक्ट, 1996 के तहत झारखण्ड में पंचायत चुनाव कराने का फैसला दिया. फैसले में जनजातीय क्षेत्रों के मुखिया के लिए 100 फीसदी जनजातीय आरक्षण की विवेचना है.


झारखण्ड उच्च न्यायालय ने 2005 में एक याचिका की सुनवाई करते हुए अपने फैसले में पेसा एक्ट के प्रावधानों में कटौती की बात की थी. पेसा एक्ट जनजातीय बहुल क्षेत्रों के पंचायत चुनावों में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारी पर अंकुश लगाता है. उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के उस फैसले को ख़ारिज करते हुए कहा कि ऐसे क्षेत्रों में जनजातियों का मुखिया बनना उनका संवैधानिक अधिकार है.

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