परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन 2014 हेग में आयोजित किया गया

नीदरलैंड के हेग में 24 से 25 मार्च 2014 तक तीसरा परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन (एनएसएस) का आयोजन किया गया.

Created On: Mar 27, 2014 09:57 ISTModified On: Mar 27, 2014 14:43 IST

नीदरलैंड के हेग में 24 से 25 मार्च 2014 तक तीसरा परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन (एनएसएस) का आयोजन किया गया. इसमें विश्व के 58 देशों ने भाग लिया. शिखर सम्मेलन में नेताओं ने आतंकवादियों के हाथ परमाणु सामग्री पहुंचने पर रोक लगाने के समझौते पर सहमति जताई जिसके जरिए वे परमाणु हथियार बना सकते हैं. इससे भविष्य में होने वाले परमाणु हमले के खतरे को भी कम किया जा सकेगा.

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एनएसएस 2014 में हुए नए समझौते

नए समझौते वाशिंगटन (2010) और सियोल (2012) में आयोजित पूर्व शिखर सम्मेलनों के परिणामों पर आधारित हैं.

•    खतरनाक परमाणु सामग्रियों (अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम और प्लूटोनियम) की मात्रा को विश्व में कम करना जिसका इस्तेमाल आतंकवादी परमाणु हथियार बनाने में कर सकते हैं.

•    रेडियोधर्मी सामग्रियों की सुरक्षा बढ़ाना (कम संवर्धित यूरेनियम समेत) जिसका इस्तेमाल खतरनाक बम बनाने में किया जा सकता है.

•    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाओं और सहयोग को बढ़ाना.

•    एनएसएस देशों ने परमाणु समाग्रियों की मात्रा को यथासंभव कम रखने और जहां संभव हो वहां उन्हें कम करने को राजी हुए हैं. वैसे देश जो अत्यधित संवर्धित यूरेनियम या प्लूटोनियम का इस्तेमाल बिजली पैदा करने के लिए ईंधन के तौर पर करते हैं वे भी इस्तेमाल किए जाने वाली मात्रा को यथासंभव सीमित करने को तैयार हुए हैं.

•    समझौते में अन्य रेडियोधर्मी पदार्थ जैसे कम संवर्धित यूरेनियम, कोबाल्ट– 60, स्ट्रोन्टियम– 90 और सीजियम– 137 को भी शामिल किया गया है. इनका इस्तेमाल अस्पताल उद्योग, अनुसंधान कार्य में होता है. साथ ही इसका इस्तेमाल साधारण विस्फोटकों के साथ कर बम भी बनाया जा सकता है.

इन समझौतों के अलावा पहल को मजबूती प्रदान करने के लिए भी एक समझौता किया गया है. इस पहल का उद्देश्य वैश्विक परमाणु सुरक्षा संरचना को बढ़ाना है.

इस पहल के तहत 35 देश आईएईए के दिशानिर्देशों को अपने राष्ट्रीय कानून में शामिल करने को सहमत हो गए हैं. ये दिशानिर्देश बाध्यकारी हो सकते हैं और इसके अलावा ये आईएईए टीम को परमाणु पदार्थों की सुरक्षा का आकलन करने की अनुमति भी देंगे.

साथ ही इन देशों ने यह भी वादा किया है कि ये अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम को परमाणु पदार्थों की सुरक्षा प्रक्रिया के मूल्यांकन करने की इजाजत देंगें. वे 35 देश जिन्होंने दूरगामी समझौते के लिए प्रतिबद्धता दिखाई है वे हैं– अल्जीरिया, अरमेनिया, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, चिली, चेक गणराज्य, डेनमार्क, फिन्लैंड, फ्रांस, जॉर्जिया, जर्मनी, हंगरी, इस्राइल, इटली, जापाल, कजाकिस्तान, लूथियाना, मैक्सिको, मोरक्को, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नॉर्वे, फिलिपिंस, पोलैंड, द रिपब्लिक ऑफ कोरिया, रोमानिया, स्पेन, स्वीडन, तुर्की, यूक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिकी और वियतनाम.

एनएसएस शिखर सम्मेलन के बारे में

परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन का प्रादुर्भाव अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साल 2009 में चेक गणराज्य के पैरागुए में दिए भाषणा के बाद हुआ. अपने भाषण में बराक ओबामा ने परमाणु आतंकवाद के खतरे को रोकने के लिए परमाणु सुरक्षा व्यव्स्था बनाने की बात कही थी.

परमाणु सामग्रियों की सुरक्षा और परमाणु आतंकवाद से बचने के उद्देश्य के साथ पहला एनएसएस वाशिंगटन डीसी में 2010 में आयोजित हुआ था. इस शिखर सम्मेलन में राजनीतिक समझौते बने थे.
दूसरा एनएसएस सियोल में 2012 में आयोजित हुआ था और इसका फोकस पहले शिखर सम्मेलन में हुए समझौतों के विकास पर था. संयुक्त राज्य अमेरिका साल 2016 में होने वाले अंतिम शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा.

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