प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत वाराणसी के जयापुर गांव को गोद लिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में जयापुर गांव को औपचारिक रूप से सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत 7 नवंबर 2014 को गोद लिया.

Created On: Nov 10, 2014 14:38 ISTModified On: Nov 10, 2014 14:44 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में जयापुर गांव को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत 7 नवंबर 2014 को गोद लिया. वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र (लोकसभा) है.

जयापुर गांव वाराणसी शहर के केंद्र से 32 किमी दूर रोहनिया विधानसभा क्षेत्र में स्थित है. यह गांव अरजीलाइन ब्लॉक में स्थित है. इस गांव की आबादी 4000 जिसमें 2700 मतदाता हैं. यहां भूमिहारों और पटेल समुदाय के लोगों का बाहुल्य है. प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी की यह पहली यात्रा थी.

यह गांव पहले से ही आदर्श गांव योजना 2002 के तहत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा अपनाया गया था. संघ ने गांवों के लिए तीन श्रेणियां बनाई और पशुपालन को बढ़ावा देने और पौधे लगाने पर ध्यान केंद्रित किया. सांसद आदर्श ग्राम योजना परियोजना के तहत प्रत्येक सांसद को एक गांव गोद लेना है और उस गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करना है.


‘सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई)’ के बारे में

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गावों के समग्र विकास के लिए ‘सांसद आदर्श ग्राम योजना (एसएजीवाई)’ की शुरूआत 11 अक्टूबर 2014 को की. एसएजीवाई का क्रियान्वन केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की देख-रेख में किया जाना है.

सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत हर सांसद वर्ष 2019 तक तीन गांवों में बुनियादी एवं संस्थागत ढांचा विकसित करने की जिम्मेदारी उठायेंगे, जिनमें से एक आदर्श गांव को वर्ष 2016 तक विकसित किया जाना है. इसके बाद पांच ऐसे आदर्श गांवों (हर साल एक गांव) का चयन किया जाएगा और उनके विकास के काम को वर्ष 2024 तक पूरा किया जाएगा.

सांसद आदर्श ग्राम योजना के उद्देश्य
लोक नायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के अवसर पर आरंभ की गयी एसएजीवाई परियोजना का उद्देश्य है गांवों में रहने वाले लोगों को उन्नशत बुनियादी सुविधाएं और बेहतर अवसर मुहैया कराना, जिससे वे अपना भाग्य खुद बनाने में समर्थ हों.

महात्मा गांधी के सिद्धांतों एवं मूल्यों से प्रेरित होकर एसएजीवाई योजना के तहत राष्ट्रीय गौरव, देशभक्ति, सामुदायिक भावना एवं आत्मविश्वास के मूल्यों को अपनाने और आवश्यक ढांचा विकसित करने पर भी समान जोर दिया गया है.


सांसद आदर्श ग्राम योजना से संबंधित मुख्य तथ्य

  • इस योजना के तहत चयनित गांवों में कृषि, स्वास्थ्य, साफ-सफाई, आजीविका, पर्यावरण, शिक्षा इत्यादि क्षेत्रों का एकीकृत विकास किया जाएगा.
  • जन भागीदारी, अंत्योदय, महिलाओं के साथ समानता का भाव, महिलाओं का सम्मान, सामाजिक न्याय, सामुदायिक सेवा की भावना, स्वच्छता, पर्यावरण अनुकूलता का ध्यान रखना, शांति व सद्भाव का ख्याल रखना, आपसी सहयोग, स्थानीय स्तर पर स्वशासन, पारिस्थि‍तिकी संतुलन, आत्मनिर्भरता और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही इत्यादि इन मूल्यों में शामिल हैं.
  • ग्राम पंचायत विकास के लिए बुनियादी इकाई होगी. इसकी आबादी मैदानी क्षेत्रों में 3000-5000 और पहाड़ी, जनजातीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में 1000-3000 होगी. जिन जिलों में इकाई का आकार उपलब्ध नहीं है, वहां अपेक्षित आबादी वाली ग्राम पंचायतों का चयन किया जा सकता है.
  • सांसद आदर्श ग्राम के तौर पर विकसित करने के लिए किसी भी उपयुक्तग ग्राम पंचायत का चयन अपनी मर्जी से कर सकेंगे. इसमें सांसद का अपना या उनकी पत्नी /पति का गांव शामिल नहीं होगा. भारत में 2,65,000 ग्राम पंचायत हैं.
  • इसके तहत हर गरीब परिवार को गरीबी के चंगुल से बाहर निकलने लायक बनाया जाएगा. इस लक्ष्यं को पाने में जितनी भी राशि की आवश्यकता होगी, उसकी पूर्ति निर्वाचन क्षेत्र कोष ‘एमपीएलएडी’ से की जाएगी.
  • हर गांव में नियोजन की प्रक्रिया को सहभागिता के जरिए अंजाम दिया जाएगा, जिसमें समन्वीयता स्थापित करने का काम जिलाधिकारी करेंगे. सांसद इस मुहिम को सफल बनाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे.

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