फोरेंसिक विज्ञान में विकास: फिंगर प्रिंट की पहचान अब कपड़ों से

फोरेंसिक विज्ञान में एक अहम विकास के तहत अब परिधानों, पर्दों और सोफे के कपड़ों जैसे घरेलू वस्त्रों से अंगुलियों के निशान (Finger Print) लिए जा सकते हैं. स्कॉटलैंड के एबर्टे डुंडी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और स्कॉटिश पुलिस सेवा प्राधिकरण प्रयोगशाला द्वारा वैक्यूम मेटल डिपोजिशन तकनीक के जरिये यह सफलता पाई गई.

Feb 1, 2011 14:39 IST

फोरेंसिक विज्ञान में एक अहम विकास के तहत अब परिधानों, पर्दों और सोफे के कपड़ों जैसे घरेलू वस्त्रों से अंगुलियों के निशान (Finger Print) लिए जा सकते हैं. स्कॉटलैंड के एबर्टे डुंडी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और स्कॉटिश पुलिस सेवा प्राधिकरण प्रयोगशाला द्वारा वैक्यूम मेटल डिपोजिशन तकनीक के जरिये यह सफलता पाई गई. फोरेंसिक विज्ञान में पहले केवल ठोस चीजों से ही अंगुलियों के निशान लिए जा सकते थे. वैक्यूम मेटल डिपोजिशन तकनीक का अध्ययन प्रोफेसर डेविड ब्रेमनर के नेतृत्व में किया गया और यह शोध जनवरी 2011 के आखिरी सप्ताह में प्रकाशित किया गया.


वैक्यूम मेटल डिपोजिशन तकनीक

इस तकनीक के तहत अंगुलियों के निशान वाले कपड़े के टुकड़े को वैक्यूम चेंबर में रखा जाता है और उस पर सोने की पतली परत बिछा दी जाती है. फिर उसमें जस्ता मिलाया जाता है जो सोने से चिपक जाता है. पर जहां दरार या अंगुलियों के निशान होते हैं वहां जस्ता नहीं चिपकता. रासायनिक प्रतिक्रिया के तहत जस्ता और स्वर्ण मिला कपड़ा फोटोग्राफ के नेगेटिव की तरह लगता है. उसमें अंगुलियों के निशान के हिस्से को छोड़ बाकी हिस्सा भूरा नजर आता है. हालांकि शोध में पाया गया कि जिस वस्त्र में प्रति मिलीमीटर धागे की संख्या तीन से ज्यादा ( रेशम या नायलॉन) है सिर्फ उसमें ही पूरी छाप आती है.

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