बीजिंग वैज्ञानिकों ने सफेद बंगाल बाघों के रहस्य से पर्दा उठाया

बीजिंग के विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान के माध्यम से सफेद बाघ के रहस्य को सुलझाया.

Created On: May 30, 2013 18:20 ISTModified On: May 31, 2013 11:52 IST
बीजिंग के पेकिंग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मई 2013 में कुछ बाघों में पाए जाने वाले सफेद फर या गहरी काली-भूरी पट्टियों के रहस्य को सुलझा लिया है. जीन (एसएलसी45ए2) के एक रंजकता (पिगमेंटेशन) में एकल अमीनो अम्ल (ए477वी) में परिवर्तन के कारण ऐसा हो पाता है. वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुँचने के लिए तीन अलग-अलग जनकों वाले 16 सफेद बाघों का अध्ययन किया.वैज्ञानिकों ने  बाघों के शरीर पर पट्टियों, आखों एवं फर के रंगों की पहचान करने के लिए फियोमेलानिन (Pheomelanin) एवं यूमेलानिन (Eumelanin) नामक दो मेलानिन का उपयोग किया. सफेद बाघ के मामले में फियोमेलानिन, जो कि लाल एवं पीला रंगी उत्पन्न करता है, प्रभावित हुआ। अनुसंधान के अनुसार, अमीनो अम्ल में परिवर्तन एक विशेष चैनल को आंशिक रूप से बाधित करता है. रंजकता से सम्बंधित जीन (एसएलसी45ए2) में इसी तरह के परिवर्तन के परिणामस्वरूप यूरोपीय लोगों, चूहों, मुर्गों एवं घोड़ों में भी त्वचा के रंग का अंतर संभव हो पाता है.
बीजिंग के पेकिंग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मई 2013 में कुछ बाघों में पाए जाने वाले सफेद फर या गहरी काली-भूरी पट्टियों के रहस्य को सुलझा लिया है. जीन (एसएलसी45ए2) के एक रंजकता (पिगमेंटेशन) में एकल अमीनो अम्ल (ए477वी) में परिवर्तन के कारण ऐसा हो पाता है. वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुँचने के लिए तीन अलग-अलग जनकों वाले 16 सफेद बाघों का अध्ययन किया.
वैज्ञानिकों ने  बाघों के शरीर पर पट्टियों, आखों एवं फर के रंगों की पहचान करने के लिए फियोमेलानिन (Pheomelanin) एवं यूमेलानिन (Eumelanin) नामक दो मेलानिन का उपयोग किया. सफेद बाघ के मामले में फियोमेलानिन, जो कि लाल एवं पीला रंगी उत्पन्न करता है, प्रभावित हुआ.
अनुसंधान के अनुसार, अमीनो अम्ल में परिवर्तन एक विशेष चैनल को आंशिक रूप से बाधित करता है. रंजकता से सम्बंधित जीन (एसएलसी45ए2) में इसी तरह के परिवर्तन के परिणामस्वरूप यूरोपीय लोगों, चूहों, मुर्गों एवं घोड़ों में भी त्वचा के रंग का अंतर संभव हो पाता है.

बीजिंग के पेकिंग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मई 2013 में कुछ बाघों में पाए जाने वाले सफेद फर या गहरी काली-भूरी पट्टियों के रहस्य को सुलझा लिया है. जीन (एसएलसी45ए2) के एक रंजकता (पिगमेंटेशन) में एकल अमीनो अम्ल (ए477वी) में परिवर्तन के कारण ऐसा हो पाता है. वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुँचने के लिए तीन अलग-अलग जनकों वाले 16 सफेद बाघों का अध्ययन किया.वैज्ञानिकों ने  बाघों के शरीर पर पट्टियों, आखों एवं फर के रंगों की पहचान करने के लिए फियोमेलानिन (Pheomelanin) एवं यूमेलानिन (Eumelanin) नामक दो मेलानिन का उपयोग किया. सफेद बाघ के मामले में फियोमेलानिन, जो कि लाल एवं पीला रंगी उत्पन्न करता है, प्रभावित हुआ। अनुसंधान के अनुसार, अमीनो अम्ल में परिवर्तन एक विशेष चैनल को आंशिक रूप से बाधित करता है. रंजकता से सम्बंधित जीन (एसएलसी45ए2) में इसी तरह के परिवर्तन के परिणामस्वरूप यूरोपीय लोगों, चूहों, मुर्गों एवं घोड़ों में भी त्वचा के रंग का अंतर संभव हो पाता है.

बीजिंग के पेकिंग विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मई 2013 में कुछ बाघों में पाए जाने वाले सफेद फर या गहरी काली-भूरी पट्टियों के रहस्य को सुलझा लिया है. जीन (एसएलसी45ए2) के एक रंजकता (पिगमेंटेशन) में एकल अमीनो अम्ल (ए477वी) में परिवर्तन के कारण ऐसा हो पाता है. वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुँचने के लिए तीन अलग-अलग जनकों वाले 16 सफेद बाघों का अध्ययन किया.

वैज्ञानिकों ने  बाघों के शरीर पर पट्टियों, आखों एवं फर के रंगों की पहचान करने के लिए फियोमेलानिन (Pheomelanin) एवं यूमेलानिन (Eumelanin) नामक दो मेलानिन का उपयोग किया. सफेद बाघ के मामले में फियोमेलानिन, जो कि लाल एवं पीला रंगी उत्पन्न करता है, प्रभावित हुआ.

अनुसंधान के अनुसार, अमीनो अम्ल में परिवर्तन एक विशेष चैनल को आंशिक रूप से बाधित करता है. रंजकता से सम्बंधित जीन (एसएलसी45ए2) में इसी तरह के परिवर्तन के परिणामस्वरूप यूरोपीय लोगों, चूहों, मुर्गों एवं घोड़ों में भी त्वचा के रंग का अंतर संभव हो पाता है.

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