भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग की 6वीं बैठक विज्ञान एवं सूचना प्रौद्योगिकी पर सहमति के साथ संपन्न

International/World Current Affairs 2011. भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग की 6वीं बैठक के लिए किंगडम ऑफ थाईलैंड के विदेश मंत्री डा सूरापोंग तोवीचकचैकुल 26-27 दिसम्बर 2011 तक...

Created On: Dec 29, 2011 18:55 ISTModified On: Dec 29, 2011 18:59 IST

भारत-थाईलैंड संयुक्त आयोग की 6वीं बैठक के लिए किंगडम ऑफ थाईलैंड के विदेश मंत्री डा सूरापोंग तोवीचकचैकुल 26-27 दिसम्बर 2011 तक एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत की राजकीय यात्रा पर आए. विदेश मंत्री एसएम कृष्णा की सह-अध्यक्षता में संयुक्त आयोग की बैठक 27 दिसम्बर 2011 को नई दिल्ली में आयोजित की गई. बैठक के दौरान दोनों देशों के मध्य निम्नलिखित बिंदुओं पर सहमति एवं चर्चा हुई.

1. दोनों पक्षों ने वर्ष 2012-14 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया. भारत और थाईलैंड ने भारत-थाईलैंड फाउंडेशन की स्थापना के विचार का स्वागत किया तथा शीघ्र अति शीघ्र फाउंडेशन की कार्यविधि तैयार करने पर सहमत हुए. वर्ष 2011 में लगभग 10 लाख भारतीय पर्यटन के लिए थाईलैंड गए. दोनों पक्ष द्विपक्षीय वीजा और कांसुली मामलों से संबंधित विभिन्न मसलों पर विचार-विमर्श के लिए एक तदर्थ कार्य समूह के गठन पर सहमत हुए हैं.

2. सूचना प्रौद्योगिकी और सेवाओं में सहयोग के संबंध में द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन को पुनर्जीवित करने पर सहमति हुई. थाईलैंड ने वर्ष 2012 में कृषि सहयोग के संबंध में संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक की मेजबानी करने का प्रस्ताव किया. शिक्षा से संबंधित संयुक्त कार्य समूह की अगली बैठक भारत में होगी. भारत और थाईलैंड ने द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन के अंतर्गत नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक संयुक्त समिति का गठन किया. 

 3. दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में वृद्धि के रुख पर ध्यान दिया. पिछले दशकों में द्विपक्षीय व्यापार में लगभग 6 गुना वृद्धि हुई और यह वर्ष 2010 में 6.6 अरब अमरीकी डालर तक पहुंच गया. वर्ष 2011 में इसके 8 अरब अमरीकी डालर तक पहुंच जाने की संभावना है. दोनों देश एक द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते पर भी वार्ता कर रहे हैं.

4.दोनों पक्षों ने आसियान, ईएएस, बिम्सटेक और एमजीसी के साथ भारत के प्रगाढ़ होते रिश्तों के संदर्भ में अपनी बहुमूल्य भागीदारी और सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने की अपनी इच्छा व्यक्त की. थाईलैंड अपनी पूर्व की ओर देखो नीति का एक महत्वपूर्ण घटक है. थाईलैंड के विदेश मंत्री ने भारत के साथ अपने बढ़ते संबंधों का थाईलैंड की पश्चिम की ओर देखो नीति के रूप में उल्लेख किया.

5. दोनों विदेश मंत्रियों ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर व्यापक विचार-विमर्श किया. दोनों नेताओं ने भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत द्विपक्षीय रिश्तों की पुष्टि की तथा व्यापार, निवेश, सुरक्षा और रक्षा सहयोग, पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, अवसंरचना तथा नागर विमानन आदि जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत बनाने के तरीकों पर चर्चा की.

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