भारत-दक्षिण कोरिया ने दोनों देशों के बीच वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने के समझौते पर हस्ताक्षर किया

International/World Current Affairs 2012. भारत के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दक्षिण कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली म्युंग बाक के निमंत्रण पर...

Created On: Mar 28, 2012 16:43 ISTModified On: Mar 28, 2012 16:43 IST

भारत के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने दक्षिण कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति ली म्युंग बाक के निमंत्रण पर कोरिया की चार दिवसीय राजकीय यात्रा की. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के साथ उनकी पत्नी गुरुशरण कौर और प्रतिनिधिमंडल भी साथ में गया. प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने इस यात्रा के दौरान 26-27 मार्च 2012 को सोल में आयोजित दूसरे परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन में भी भाग लिया.

यात्रा के दौरान भारत-कोरिया ने दोनों देशों के बीच वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने के समझौते पर सोल में 25 मार्च 2012 को हस्ताक्षर किए. दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति निवास ब्लू हाउस में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति ली म्यूंग बग के बीच शिखर वार्ता के बाद दोनों नेताओं की मौजूदगी में भारत के पूर्वी मामलों के विदेश सचिव संजय सिंह और दक्षिण कोरिया के विदेश उपमंत्री किम सुंग हैन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए.

दोनों देशों के बीच बातचीत में आपसी भागीदारी को अधिक उपयोगी और सार्थक बनाने के उपायों पर विचार किया गया. विचार विमर्श में भारत-कोरिया इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों के सुदृढ़ आर्थिक संबंध आपसी वार्तालाप का मूल आधार है. दोनों देशों के मध्य आर्थिक साझेदारी के क्रियान्वयन के दौरान वर्ष 2010 और 2011 में आपसी व्यापार में 65 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई. इसे देखते हुए वर्ष  2015 तक आपसी व्यापार को 40 अरब अमरीकी डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया. दोनों देशों के मध्य इस बात पर भी सहमति हुई कि आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में और प्रयास किए जाएं.

भारत ने भारतीय अन्तरिक्ष प्रक्षेपण यान से कोरियाई उपग्रह छोड़ने का प्रस्ताव किया. दोनों देश राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए.
प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति ली को वर्ष 2012 के अंत तक सिओल में भारतीय दूतावास में एक रक्षा आयुक्त नियुक्त करने के भारत के निर्णय की जानकारी दी.
 
दोनों नेताओं ने व्यापक संयुक्त राष्ट्र सुधारों तथा सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावशाली बनाने के लिए उसके विस्तार की जरूरत पर भी सहमति जताई.

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की दक्षिण कोरिया यात्रा द्विपक्षीय सहयोग की दिशा में मील का पत्थर साबित हुई. राष्ट्रपति की ली म्युंग बाक के साथ शिखर वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य को विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों का दस्तावेज कहा जा सकता है. दोनों देशों ने रक्षा अनुसंधान और विकास तथा सैन्य उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में संयुक्त उद्यम लगाने की संभावनाओं का पता लगाने का निश्चय किया.
 
दोनों नेताओं ने परमाणु निरस्त्रीकरण और व्यापक विनाश के हथियारों के प्रसार और उन्हें छोड़ने के साधनों के बारे में अपनी वचनबद्धता दोहराई.
वार्ता के बाद जारी संयुक्त वक्तव्य में उत्तर कोरिया की उपग्रह छोड़ने की योजना पर चिंता व्यक्त की गई है, क्योकि इससे इस प्रायद्वीप में तनाव बढ़ने की आशंका है. दोनों नेताओं ने आतंकवाद और समुद्री डाकुओं के खतरे पर गहरी चिंता जताई.

भारत ने परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह तथा परमाणु व्यापार से संबंधित अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की सदस्यता प्राप्त करने के लिए दक्षिण कोरिया से समर्थन मांगा.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विश्वभर में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में कोरियाई कंपनियों के योगदान की सराहना की और उन्हें भारत में राजमार्गों, बंदरगाहों, मेट्रो और बिजली घरों की निर्माण योजनाओं के लिए आमंत्रित किया.

प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने डॉ ली म्यूंग बग को भारत आने का निमंत्रण भी दिया. उन्होंने दक्षिण कोरिया के व्यापारियों से भी आग्रह किया कि वे भारत की यात्रा पर आयें. प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देना भी है.
इस समझौते के साथ दोनों देशों के व्यापारियों का एक दूसरे के यहां आना-जाना सुगम हो सकेगा.

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