भारत-रुस-चीन के विदेश मंत्रियों की त्रि–देशीय बैठक की संयुक्त विज्ञप्ति जारी

भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों की 13 वीं बैठक 2 फरवरी 2015 को चीन के बीजिंग में आयोजित की गई थी.

Created On: Feb 4, 2015 06:03 ISTModified On: Feb 4, 2015 18:37 IST

भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों की 13 वीं बैठक 2 फरवरी 2015 को चीन के बीजिंग में आयोजित की गई थी.
तीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (भारत), वांग यी (चीन) और सर्गेई लावरोव (रूस) ने बैठक के बाद संयुक्त विज्ञप्ति जारी की. इसमें देशों के बीच ऐसे सहयोग पर जोर दिया गया है जो अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को बनाए रखने और वैश्विक आर्थिक विकास एवं समृद्धि को बढ़ावा देने के अनुकूल है.
संयुक्त विज्ञप्ति की मुख्य बातें
•वे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों, शांतिपूर्ण सह– अस्तित्व (पंचशील) के पांच सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अन्य बुनियादी मानदंडों के अनुपालन में निष्पक्ष एवं स्थिर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था बनाने पर सहमत हुए.
•वे वैश्विक मुद्दों पर समन्वय को मजबूत करने और खुलेपन की भावना में एकजुटता, आपसी समझ औऱ विश्वास बनाने पर भी सहमत हुए.
•वे थिंक– टैंक, व्यापार, कृषि, आपदा न्यूनीकरण और राहत, चिकित्सा सेवाओं एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए.
•उन्होंने तेल एवं प्राकृतिक गैस उत्पादन एवं परिवहन के क्षेत्र के साथ– साथ ऊर्जा, उच्च तकनीक, पर्यावरणीय सुरक्षा और संपर्क के अन्य क्षेत्रों में सहयोग की क्षमता का पता लगाया.
•उन्होंने संसदीय, मीडिया, सांस्कृतिक और युवा राजनयिकों की यात्राओं समेत युवाओं के आदान– प्रदान को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई.
•चीन और रूस ने भारत के शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) में पूर्ण सदस्यता के आवेदन का स्वागत किया और भारत द्वारा सभी जरूरी बातचीत एवं कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा कर लिए जाने के बाद SCO में शामिल होने के लिए भारत का समर्थन किया.
•रूस और भारत ने 2016 में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन का चीन द्वारा मेजबानी किए जाने का स्वागत और समर्थन किया और इसके सफल परिणाम में योगदान करने की अपनी तत्परता को दुहराया.
•उन्होंने 2015 के दूसरी छमाही में अगले त्रिपक्षीय बैठक आयोजित किए जाने पर सहमति जताई.

भारत– रुस– चीन के विदेश मंत्रियों की त्रि–देशीय बैठक की संयुक्त विज्ञप्ति जारी
भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों की 13 वीं बैठक 2 फरवरी 2015 को चीन के बीजिंग में आयोजित की गई थी.
तीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (भारत), वांग यी (चीन) और सर्गेई लावरोव (रूस) ने बैठक के बाद संयुक्त विज्ञप्ति जारी की. इसमें देशों के बीच ऐसे सहयोग पर जोर दिया गया है जो अंतरराष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को बनाए रखने और वैश्विक आर्थिक विकास एवं समृद्धि को बढ़ावा देने के अनुकूल है.
संयुक्त विज्ञप्ति की मुख्य बातें
•वे संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों, शांतिपूर्ण सह– अस्तित्व (पंचशील) के पांच सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अन्य बुनियादी मानदंडों के अनुपालन में निष्पक्ष एवं स्थिर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था बनाने पर सहमत हुए.
•वे वैश्विक मुद्दों पर समन्वय को मजबूत करने और खुलेपन की भावना में एकजुटता, आपसी समझ औऱ विश्वास बनाने पर भी सहमत हुए.
•वे थिंक– टैंक, व्यापार, कृषि, आपदा न्यूनीकरण और राहत, चिकित्सा सेवाओं एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए.
•उन्होंने तेल एवं प्राकृतिक गैस उत्पादन एवं परिवहन के क्षेत्र के साथ– साथ ऊर्जा, उच्च तकनीक, पर्यावरणीय सुरक्षा और संपर्क के अन्य क्षेत्रों में सहयोग की क्षमता का पता लगाया.
•उन्होंने संसदीय, मीडिया, सांस्कृतिक और युवा राजनयिकों की यात्राओं समेत युवाओं के आदान– प्रदान को बढ़ावा देने पर भी सहमति जताई.
•चीन और रूस ने भारत के शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) में पूर्ण सदस्यता के आवेदन का स्वागत किया और भारत द्वारा सभी जरूरी बातचीत एवं कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा कर लिए जाने के बाद SCO में शामिल होने के लिए भारत का समर्थन किया.
•रूस और भारत ने 2016 में होने वाले जी20 शिखर सम्मेलन का चीन द्वारा मेजबानी किए जाने का स्वागत और समर्थन किया और इसके सफल परिणाम में योगदान करने की अपनी तत्परता को दुहराया.
•उन्होंने 2015 के दूसरी छमाही में अगले त्रिपक्षीय बैठक आयोजित किए जाने पर सहमति जताई.
अंतरराष्ट्रीय संबंधों में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका
•ये संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों पर आधारित निष्पक्ष एवं न्यायोचित अंतरराष्ट्रीय क्रम की रक्षा करने, युद्ध और संघर्षों को रोकने एवं मानवजाति की प्रगति और विकास को बढ़ावा देने पर सहमत हुए.
•उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र के एजेंडे में " द्वितीय विश्व युद्ध के समाप्त होने की सत्तरवीं वर्षगांठ" के आइटम को शामिल किए जाने का स्वागत किया और संयुक्त राष्ट्र एवं सदस्य देशों के स्मरणीय घटनाओं की शुरुआत और आयोजित किए जाने का समर्थन किया.
•उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और नियमों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के मजूबत कार्यान्वयन एवं वैश्विक आतंकवाद– रोधी रणनीति के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में आतंकवाद से मुकाबला करने के प्रयासों में शामिल होने की जरूरत पर सहमति व्यक्त की.
एशिया– प्रशांत मामले
•एशिया– प्रशांत क्षेत्र पर, वे एशिया– प्रशांत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग को मजबूत बनाने एवं संयुक्त प्रयास किए जाने पर सहमत हुए. इसके लिए उन्होंने त्रिपक्षीय रूस– भारत– चीन परामर्श तंत्र स्थापित करने पर हामी भरी. इसकी पहली बैठक जल्द– से– जल्द कराई जाएगी.
इस्राइल– फिलिस्तीन संघर्ष
 
•इस्राइल– फिलिस्तीन संघर्ष पर, पूर्वी जेरुसलेम को इसकी राजधानी के साथ एक संप्रभु, स्वतंत्र, व्यवहार्य एवं संयुक्त फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के उद्देश्य के साथ जहां लोग सुरक्षित एवं मान्य सीमाओं के बीच रहें और साथ ही इस्राइल के साथ शांतिपूर्ण संबंध बने रहें, के लिए,  तीनों देशों के नेताओं ने इस्राइल– फिलिस्तीन संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र के प्रासंगित संकल्प, शांति के लिए भूमि सिद्धांत, अरब शांति पहल का समर्थन किया.
सीरिया
सीरिया के मुद्दे पर, उन्होंने कहा कि सीरिया संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है और सभी पक्षों से उन्होंने हिंसा छोड़ने और जून 2012 के "जेनेवा विज्ञप्ति" पर आधारित शांति वार्ता को फिर से बहाल करने का आग्रह किया.
•इसके अलावा, उन्होंने सीरिया के सभी दलों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रासंगिक संकल्पों को लागू करने और अपने मानवीय प्रयासों में संयुक्त राष्ट्र एवं प्रासंगिक अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ पूर्ण सहयोग करने को कहा.
•मानवीय सहायता पर संयुक्त राष्ट्र के मार्गदर्शक सिद्धांतों का पालन करने के लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की.
अफगानिस्तान
•वे अफगानिस्तान में व्यापक एवं समावेशी शांति एवं सुलह यानि अफगान– नीत और अफगान के स्वामित्व वाले, के समर्थन के साथ– साथ इस क्षेत्र में उसके विस्तारित व्यापार एवं परिवहन नेटवर्क एवं क्षेत्रीय संपर्क के जरिए अफगानिस्तान के एकीकरण में मदद पर सहमत हुए.
•उन्होंने अफगानिस्तान एवं इस क्षेत्र में सुरक्षा और समृद्धि के लिए बीजिंग घोषणा को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया.
यूक्रेन संकट
•उन्होंने अंतर– यूक्रेन संघर्ष पर सभी दलों को मिन्स्क प्रोटोकॉल को पूर्णतः लागू करने और गतिरोध को दूर करने के लिए कहा. साथ ही राजनीतिक बातचीत के जरिए संकट का शांतिपूर्ण समाधान खोजने को भी कहा.
•उन्होंने मलेशिया एयरालइंस की विमान संख्या एमएच17 की दुर्घटना की स्वतंत्र, वस्तुनिष्ठ, निष्पक्ष और पारदर्शी अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प 2166की रूपरेखा के भीतर सहयोग में शामिल किए जाने की भी बात की.
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली
•उन्होंने 2010 आईएमएफ कोटा के क्रियान्वयन और 2015 के अंत तक प्रशासन सुधारों पर फोकस के साथ उभरते हुए बाजारों और विकाससील देशों की आवाज एवं प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में तत्काल सुधार की बात की.
•उन्होंने जी20 की रूपरेखा के भीतर सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धताओं को दुहराया और जी20 के सभी सदस्यों से माइक्रोइकोनॉमिक नीति को मजबूत बनाने और संरक्षणवाद को अस्वीकार करने का आह्वाहन किया.
जलवायु परिवर्तन
•उन्होंने जलवायु परिवर्तन के मुद्दों पर तीनों देशों से जुड़े महत्व को दुहराया और जलवायु परिवर्तन और उसके प्रतिकूल प्रभाव से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाने की दिशा में साथ मिलकर काम करने की अपनी तत्परता व्यक्त की.
•मंत्रियों ने 20वें यूनाइटेड नेशन फ्रेमवर्क कंवेन्शन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) कॉन्फ्रेंस ऑफ द पार्टिज (COP20) द्वारा जलवायु एक्शन के लिए लीमा कॉल को अपनाए जाने का स्वागत किया.

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