भारतीय रिज़र्व बैंक ने वित्तीय समावेशन पर दीपक मोहंती समिति की मध्यावधि पथ संबंधी रिपोर्ट जारी की

इस समिति की स्थापना आरबीआई द्वारा 15 जुलाई 2015 को वित्तीय समावेशन हेतु मध्यावधि (पांच वर्ष) कार्य योजना तैयार करने के लिए की गयी

Created On: Dec 29, 2015 17:25 ISTModified On: Dec 30, 2015 17:07 IST

भारतीय रिज़र्व बैंक ने 28 दिसंबर 2015 को वित्तीय समावेशन पर दीपक मोहंती समिति की मध्यावधि पथ संबंधी रिपोर्ट जारी की. इस समिति की स्थापना आरबीआई द्वारा 15 जुलाई 2015 को वित्तीय समावेशन हेतु मध्यावधि (पांच वर्ष) कार्य योजना तैयार करने के लिए की गयी.

14 सदस्यों वाली इस समिति की अध्यक्षता दीपक मोहंती ने की.

समिति की मुख्य सिफारिशें

•    बैंकों को महिलाओं के लिए खाते खोलने को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे और सरकार बालिकाओं के लिए जमा योजना - सुकन्या शिक्षा - पर कल्याणकारी उपाय के रूप में विचार कर सकती है.
•    व्यक्तिगत खाताधारण के प्रभाव (कुल ऋण खातों का 94 प्रतिशत) को देखते हुए, आधार जैसा विशिष्ट बायोमीट्रिक अभिज्ञापक प्रत्येक व्यक्तिगत ऋण खाते और ऋण सूचना कंपनियों के साथ शेयर की गई सूचना के साथ जोड़ा जाना चाहिए ताकि ऋण प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित हो सके और पहुंच में सुधार किया जा सके.
•    ‘अंतिम समय’ (लास्ट माइल) की सेवा डिलीवरी में सुधार करने और बढ़ी हुई सुविधा तथा उपयोग में वित्तीय पहुंच को अंतरित करने के लिए संभावित अधिकाधिक जी2पी भुगतानों के लिए मोबाइल बैंकिंग सुविधा के उपयोग द्वारा न्यून-लागत सल्यूशन विकसित किया जाना चाहिए.
•    शीघ्र चुकौती रिकार्ड वाले ऋणदाताओं के लिए उच्चतर लचीलेपन के साथ स्वर्ण किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की योजना शुरू करना जिसे सरकार प्रायोजित व्यक्तिगत बीमा से सही ढंग से मॉनिटर किया जा सकता है एवं व्यय पैटर्न का पता लगाने के लिए केसीसी का डिजीटलीकरण करना.
•    सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) के लिए विशिष्ट क्षेत्रों में क्रेडिट गारंटी प्रदान करने के लिए बहु-गारंटी एजेंसियों को प्रोत्साहित करना तथा काउंटर गारंटी और पुनर्बीमा की संभावना तलाशना.
•    बैंकों के कारोबारी मॉडल उचित निगरानी वाली नामित संपर्क शाखाओं के साथ व्यापार प्रतिनिधि (बीसी) विशेषकर आम आदमी का विश्वास प्राप्ता करने के लिए निश्चित स्थान वाले  व्यापार प्रतिनिधियों (बीसी) को समेकित करें.
•    कॉरपोरेट्स द्वारा अपने निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) पहलों के भाग के रूप में स्वयं सहायता समूहों का पोषण करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.
•    भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) गैर स्मार्ट फोन का उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिए, विशेष रूप से राष्ट्रीय एकीकृत यूएसएसडी प्लेनटफार्म (एनयूयूपी) के उपयोगकर्ताओं के लिए, एक बहुभाषी मोबाइल अनुप्रयोग विकसित करें.
•    वित्तीय साक्षरता केंद्र (एफएलसी) नेटवर्क को मजबूत किया जाए ताकि बुनियादी स्तर पर वित्तीय साक्षरता प्रदान की जा सके.
•    बैंकों द्वारा अग्रणी साक्षरता अधिकारियों की पहचान की जाए जिन्हेंत रिजर्व बैंक द्वारा अपने कृषि बैंकिंग महाविद्यालय (सीएबी) में प्रशिक्षित किया जाएगा और जो वित्तीवय साक्षरता केंद्र चलानेवाले लोगों को प्रशिक्षित कर सकते हैं.
•    दूसरी पीढ़ी के सुधारों के एक हिस्से के रूप में, सरकार एक प्रत्यक्ष आय अंतरण योजना द्वारा मौजूदा कृषि इनपुट सब्सिडी का स्थाकन खाद, बिजली और सिंचाई के साथ बदल सकता है.

इसके अतिरिक्त समिति ने कई अन्य सिफारिशें की हैं ताकि शासन प्रणाली में सुधार हो, क्रेडिट का बुनियादी ढांचा मजबूत बने और सरकारी सामाजिक नकद हस्तांतरण बढ़ें ताकि गरीबों की व्यक्तिगत प्रयोज्य आय बढ़े और अर्थव्यवस्था को मध्यावधि के लिए एक धारणीय समावेशक पथ पर स्थापपित किया जा सके.

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