भारत के उत्तर-पूर्वी जंगलों में मेंढक की नई प्रजाति की खोज

फ्रॉग मैन ऑफ इण्डिया के नाम से लोकप्रिय प्रो. सत्यभामा दास बीजू और उनके शोधकर्ताओं की टीम ने भारत के उत्तर पूर्व और चीन के जंगलों में एक असाधारण मेंढक की प्रजाति ढूढी है. जो वृक्षों के छेद में जनन करती है.

Jan 21, 2016 18:05 IST

फ्रॉग मैन ऑफ इण्डिया के नाम से लोकप्रिय प्रो. सत्यभामा दास बीजू और उनके शोधकर्ताओं की टीम ने भारत के उत्तर पूर्व और चीन के जंगलों में एक असाधारण मेंढक की प्रजाति ढूढी है जो वृक्षों के सुराख  में जनन करती है.

  • शोधकर्ताओं के दल में  राष्ट्रीय सेल विज्ञान केंद्र (पुणे) के पीएचडी छात्र, पेरादेनिया विश्वविद्यालय (श्रीलंका), वृजे विश्वविद्यालय ब्रुस्सेल (बेल्जियम),  अमेरिकन म्यूजियम ऑफ़ नेचुरल हिस्ट्री (यूएसए) के छात्र शामिल थे.
  • शोध के परिणाम फ्रंकिक्सालुस नामक समाचार पत्र में 20 जनवरी 2016 को टैडपोल के साथ पेड़ में छेद करके प्रजनन करने वाले मेंढक की एक नई प्रजाति की खोज शीर्षक से प्रकाशित किया गया.
  • वृजे विश्वविद्यालय ब्रुस्सेल (बेल्जियम)  के प्रोफेसर फ्रंकी बूस्सुय्त ने इस उभयचर के अनुसंधान के बाद इस जीनस को फ्रेंकीजालुस जर्डोनी नाम दिया गया है.

फ्रेंकीजालुस की मुख्य विशेषताएं -

• इसका का उल्लेख पूर्व में संग्रहालय नमूनों के आधार पर 1876 में वर्णित प्रजातियों में मिलता हैं.
• गोल्फ़ की गेंद के आकार का यह मेंढक ज़मीन से क़रीब छह मीटर की ऊंचाई वाले पेड़ के सुराख  में रहता है. यह नस्ल - वैज्ञानिकों के राडार से दूर रहती है . इसी कारण इसका पता नहीं लग पाया.  
• टैडपोल, मेंढ़कों बीच यह एक आम बात है कि वे कम संसाधन वाले वातावरण में रहते हैं और यही वजह है कि वे जीविका के लिए अपनी माँ के अंडे खाते हैं.

मेंढ़क की खोज कैसे की गयी-

  • 1870 में ब्रिटेन के प्रकृतिवादी विज्ञानियों टीसी जेर्डोन ने दार्जिलिंग के जंगलों में एक पेड़ से मेंढक के दो नमूने एकत्र किए और पहली बार इनका पता लगाया. उन्हें प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय, लंदन में संरक्षित किया. प्रोफेसर बिजू ने इन्हें फिर खोज निकाला है.
  • यह जमीन से छह मीटर ऊंचे पेड़ के सुराख  में रहता है और पेड़ की टहनी पर बैठता है .
  • इनकी आंखें किनारे के बजाय सामने यानि माथे पर होती हैं.
  • यह मेंढक 150 से अधिक वर्षों से जंगली में नहीं मिला और वैज्ञानिक रूप से इस प्रजाती को विलुप्त मान लिया गया.
  • विलुप्त प्रजाति के बारे में लंदन के संग्रहालय में एक दल ने अध्ययन किया और टीम ने अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा, सिक्किम और दार्जिलिंग के जंगलों में तीन साल तक व्यापक रूप से क्षेत्र में इस प्रजाति की तलाश में कार्य किया और इसकी खोज की .
  • इसके नमूने पर दिल्ली विश्वविद्यालय की आनुववांशिकी प्रयोगशाला में विश्लेषण किया गया.
  • इस मेंढक को एक नया जींस  के रूप में मान्यता दी गयी.

  • 'फ्रॉग मैन इन इंडिया'-
    दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े बीजू को 'फ्रॉग मैन इन इंडिया' के नाम से जाना जाता  है और उन्होंने देश की लगभग 350 मेंढक की प्रजातियों में 89 की खोज की है.

    टर्राते ही नहीं, डांस भी करते हैं मेंढक-

  • विज्ञानियों के गहन शोध में पता चला है कि मेंढक की कई प्रजातियां भरपूर डांस करती हैं.
  • यह डांस वे  मादा को आकर्षित करने के लिए करते  है.
  • एक दूसरे को डराने, धमकाने के साथ नृत्य में पछाड़ने की कोशिश भी करते हैं ताकि मादा के सामने अपने को हीरो साबित कर सकें.
  • जितना बड़ा मेंढक होगा, उतना अधिक डांस करेगा.
  • ऐसे 80 प्रतिशत मेंढक संरक्षित क्षेत्र से बाहर पाए गए  हैं.
  • अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि वन क्षेत्र में मिट्टी की नमी कम हो रही है, साल भर बहने वाली नदियां तेजी से सूख रही हैं. यही कारण है की यह प्रजाति संसाधन के अभाव में रह रही हैं.
  • इन प्रजातियों में नर-मादा का लिंग अनुपात बेहद खराब है, एक मादा के मुकाबले सौ नर होते हैं.
  • विश्व में मेंढकों की छह हजार से अधिक प्रजातियां हैं लेकिन तापमान में बदलाव, प्रदूषण आदि के कारण अधिकतर पर विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है
  • भारत में ऐसी 14 प्रजातियों का पता चला है जो महाराष्ट्र से दक्षिण भारत तक फैले 1600 किलो मीटर लंबे पश्चिम घाट के वन क्षेत्र में वास करती हैं.

  • गाने वाला मेंढक-

  • उत्तरी वियतनाम में पाया गया मेंढक ग्रेसीक्साप्लस मादा को रिझाने के लिए मधुर आवाज में गाता है.
  • हर सुर अलग होता है.
  • यह भी पेड़ पर ही रहते हैं और प्रजनन का समय आते ही सुर निकालते हैं.
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