मंत्रिमंडल ने सामाजिक-आर्थिक और जातीय गणना 2011 के वर्गीकरण के लिए विशेषज्ञ समूह गठित किया

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2011 के सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना में सामने आयीं जातियों के नामों के वर्गीकरण के लिए एक विशेषज्ञ दल के गठन को 16 जुलाई 2015 को मंजूरी प्रदान की.

Created On: Jul 17, 2015 15:06 ISTModified On: Jul 17, 2015 15:13 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2011 के सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना (Socio Economic and Caste Census, SECC) में सामने आयीं जातियों के नामों के वर्गीकरण के लिए एक विशेषज्ञ दल के गठन को 16 जुलाई 2015 को मंजूरी प्रदान की.

इस विशेषज्ञ दल का अध्यक्ष अरविन्द पानगढिया को बनाया गया. अरविन्द पानगढिया नीति आयोग (NITI Aayog) के उपाध्यक्ष हैं.
विशेषज्ञ दल, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा जनजातीय कल्याण मंत्रालय से सम्ब्द्ध होगा. विशेषज्ञ दल के अन्य सदस्यों को दोनों मंत्रालय नियुक्त करेंगे.

एसईसीसी (Socio Economic and Caste Census, SECC) द्वारा यह आंकड़े 3 जुलाई 2015 को जारी किए गए. इससे 46 लाख जातीय/उपजातीय नामों/उपनामों/वंश/गोत्र नामों की गणना होगी. पहली जाति जनगणना 1932 में की गई थी.

केंद्र सरकार ने 19 मई 2011 को तत्कालीन मंत्रिमंडल की मंजूरी से सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना के माध्यम से जातियों के बारे में आंकड़े जमा करने का फैसला किया. सम्बद्ध राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों ने यह जनगणना की. जनगणना से करीब 46 लाख जाति, उपजाति, समानार्थक, उपनाम, वंश और गोत्र नाम सामने आए हैं. यह विशेषज्ञ दल इनका वर्गीकरण करेगा.  वह उपयुक्त समय पर जाति जनगणना के आंकड़े जारी करेगी.

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