मराठी के कवि माणिक गोडघाटे उर्फ ग्रेस का कैंसर के कारण पुणे में निधन

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Created On: Mar 27, 2012 18:12 ISTModified On: Mar 27, 2012 18:12 IST

मराठी के कवि माणिक गोडघाटे उर्फ ग्रेस का कैंसर के कारण पुणे में 26 मार्च 2012 को निधन हो गया. वह वर्ष 75 के थे. अपनी अलग काव्य शैली के लिए प्रसिद्ध ग्रेस अपनी कविताओं में मानव जीवन के मनोभावों को रहस्य के तत्व के साथ प्रस्तुत करते थे. महाराष्ट्र सरकार ने इनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने का निर्णय लिया है. 

माणिक गोडघाटे ने ग्रेस उपनाम से साहित्यिक रचना की. वर्ष 2011 के लिए उन्हें उनकी पुस्तक वरयाने हलते रान के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 

माणिक गोडघाटे के कविता संग्रहों में संध्याकलच्या कविता, राजपुत्र एंड डार्लिंग, संजभयाच्य साजनी और चंद्रमाधविचे प्रदेश जैसी रचनाएं शामिल हैं.गद्य शैली में लिखी गयीं ग्रेस की अन्य कृतियों में चर्चबेल और मितवा जैसी रचनाएं प्रसिद्ध हैं.

माणिक गोडघाटे ने व्यक्तिपरक लेखों के कई संग्रहों की रचना की. काव्य शैली के साथ प्रयोग के लिए प्रशंसित ग्रेस को अपने समय में लीक से हटकर काम करने वाला मराठी कवि माना जाता था. उनका जन्म नागपुर में हुआ था.

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