राज्यसभा ने प्रशिक्षु (संशोधन) विधेयक 2014 पारित किया

राज्यसभा में 27 नवंबर 2014 को प्रशिक्षु (संशोधन) विधेयक 2014 को ध्वनि मत से पारित किया गया.

Created On: Dec 29, 2014 12:40 ISTModified On: Jan 3, 2015 12:49 IST

राज्यसभा में 27 नवंबर 2014 को प्रशिक्षु (संशोधन) विधेयक 2014 को ध्वनि मत से पारित किया गया. यह विधेयक, प्रशिक्षु अधिनियम 1961 का संशोधित रूप है. यह विधेयक लोकसभा में 7 अगस्त 2014 को पारित किया गया.
प्रशिक्षु संशोधन विधेयक 2014 से संबंधित मुख्य बिंदु
•    यह विधेयक चार या इससे अधिक राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा तय होने वाले सरकार के स्थापित प्रतिष्ठानों की परिभाषा में संशोधन करता है.
•    यह  विधेयक (i)  प्रतिष्ठापित व्यापार (ii) स्नातक अथवा तकनीशियन प्रशिक्षु (iii)  व्यापारिक प्रशिक्षु (iv)    उद्योग और (v)  कामगारों की परिभाषा में संशोधन करता है और दो नई परिभाषाएं (i)  वैकल्पिक व्यापार और (ii)  पोर्टल- साइट को शामिल करता है.
•    इस विधेयक के अनुसार, प्रतिष्ठापित व्यापार से जुड़े खतरनाक उद्योगों में प्रशिक्षु की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए, हालांकि अधिनियम में एक प्रशिुक्षु के तौर पर शामिल होने की उम्र 14 वर्ष तय करता है.
•    यह बताता है कि काम के घंटे और अवकाश नियोक्ता के विवेक के आधार पर तय होंगे. काम के घंटे और अवकाश की स्थिति पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार हो.
•    यह विधेयक जुर्माने की अधिकतम राशि को निर्धारित करता है और इस प्रकार के अपराधों के लिए सजा के प्रावधानों को हटाता है. इससे पहले इस प्रकार के अपराधों में छह माह तक की जेल अथवा जुर्माना (मात्रा अनिर्धारित) अथवा दोनों का प्रावधान नियमों के अंतर्गत था.
•    यह विधेयक बताता है कि, केंद्र सरकार को प्रतिष्ठापित और वैकल्पिक व्यापार में प्रशिक्षुओं को शामिल करने की संख्या निर्धारित करने का अधिकार होगा. इससे पहले केंद्र सरकार को न्यूनतम प्रशिक्षु संख्या कानून के अंतर्गत स्थापित केंद्रीय प्रशिक्षु परिषद (सीएसी) से इस बारे में विचार विमर्श करना होता था.
•    यह विधेयक एक से अधिक नियोक्ताओं को एक साथ आने की अनुमति देता है, या तो उनके अथवा अधिकृत संस्था (अधिनियम में दिए गए केवल उनके द्वारा के विरुद्ध) के द्वारा, उनके अधीन आने वाले प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए (अधिनियम में दिए गए व्यवहारिक प्रशिक्षण के विरुद्ध) प्रशिक्षुओं के व्यवहारिक प्रशिक्षण के लिए सलाहकार की स्वीकृति को इस अधिनियम में हटा दिया गया है, जैसा कि पहले के नियम में यह जरूरी था.
•    यह विधेयक स्पष्ट करता है कि प्रशिक्षु को आधारभूत किसी भी संस्था द्वारा उपयुक्त सुविधाओं के साथ दिया जा सकता है.
•    यह विधेयक इस बात को भी शामिल करता है कि, अधिकृत संस्था द्वारा प्रशिक्षुओं के लिए दक्षता परीक्षा आयोजित करने के साथ ही प्रमाण पत्र भी बांटे जा सकते हैं. यह नेशनल वोकेशनल प्रशिक्षण परिषद  ( एनसीवीटी ) द्वारा आयोजित होने वाली दक्षता परीक्षा व प्रमाणपत्र वितरण के अतिरिक्त है.
•    यह अधिनियम बताता है कि राष्ट्रपति द्वारा इस अधिनियम को अपनी स्वीकृति देने के बाद अथवा विधेयक शक्तियों के नियमों का पालन पारित होने की तिथि से प्रभावी होगा. यदि कोई नियम जिससे व्यक्ति के हित प्रभावित होते हैं, जो उस व्यक्ति पर लागू हो सकता है, तो कोई भी नियम प्रभावी नहीं होगा.

प्रशिक्षु अधिनियम 1961
यह अधिनियम 1961 में अधिनियमित किया गया और 1962 से प्रभावशील हुआ. यह कंपनी में प्रशिक्षुओं के रूप में काम कर रहे कर्मचारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को विनियमित करने के लिए बनाया गया था.
प्रशिक्षु अधिनियम 1961 में पहली बार संशोधन स्नातक प्रशिक्षु के तौर पर प्रशिक्षु (संशोधन ) अधिनियम 1973 के रूप में वर्ष 1973 में किया गया. आगे इस अधिनियम में संशोधन प्रशिक्षु (संशोधन) विधेयक 1986 के तौर पर किया गया, जो 10+2 के लिए वोकेशनल विषयों में तकनीशियन (वोकेशनल ) प्रशिक्षु के रूप में था.

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