रूस भारत के परमाणु दायित्व कानून पर सहमत

रूस 10 जून 2014 को सैद्धांतिक तौर पर भारतीय परमाणु दायित्व कानून के लिए सहमत हो गया.

Created On: Jun 28, 2014 13:06 ISTModified On: Jun 28, 2014 13:09 IST

रूस 10 जून 2014 को सैद्धांतिक तौर पर भारतीय परमाणु दायित्व कानून के लिए सहमत हो गया. इससे कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र की तीसरी और चौथी इकाई के लिए समझौते पर हस्ताक्षर का रास्ता खुल गया.
इससे पहले अप्रैल 2014 में, असैन्य परमाणु क्षति जवाबदेही अधिनियम 2010 की प्रारंभिक बाधाएं पार करने के बाद भारत और रूस ने अप्रैल में तीसरी और चौथी इकाई के संदर्भ में सामान्य मसौदा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. समझौते के दौरान अक्टूबर 2013 में हस्ताक्षर किए जाने थे. लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मास्को की यात्रा के दौरान सीएलएनडी अधिनियम, 2010 के कुछ खंड पर आपत्ति उठने की वजह से रूस ने हस्ताक्षर नहीं किया.
कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट (केएनपीपी) ने 8 जून 2014 को पूर्ण उत्पादन क्षमता हासिल कर ली. यह प्लांट 1,000 मेगावाट बिजली उत्पादन करने वाला देश का पहला न्यूक्लियर प्लांट बन गया है. केएनपीपी की दूसरी इकाई में 2014 से बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा.
तमिलनाडु मे बनी केएनपीपी की पहली और दूसरी इकाइयों का निर्माण रूस की मदद से किया गया जिसकी कुल लागत 17200 करोड़ रुपए है.

असैन्य परमाणु क्षति जवाबदेही अधिनियम 2010 का विवरण
संसद द्वारा अगस्त 2010 में असैन्य परमाणु क्षति जवाबदेही अधिनियम 2010 को परमाणु क्षति के मामले में ऑपरेटर के दायित्व और सीमा के बाद पारित कर दिया गया .यह ऑपरेटर कुछ निश्चित परिस्थितियों में आश्रय देने का अधिकार सुरक्षित करते है.
सीएलएनडी अधिनियम में भी परमाणु क्षति के पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए एक तंत्र बनाया गया है असैन्य परमाणु क्षति जवाबदेही अधिनियम को सिविल दायित्व 11 नवम्बर 2011 के तहत अधिसूचित किया गया था.

 

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