वित्तवर्ष 2012-13 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए जीडीपी में 5.5 प्रतिशत की वृद्धि

Economy Current Affairs 2012. सांख्यिकी और क्रियान्वयन मंत्रालय के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने स्थिर...

Created On: Aug 31, 2012 05:24 ISTModified On: Aug 31, 2012 17:27 IST

सांख्यिकी और क्रियान्वयन मंत्रालय के केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने स्थिर (2004-05) और वर्तमान मूल्यों पर 2012-13 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए सकल घरेलू उत्पाद के अनुमान 31 अगस्त 2012 को जारी किए.  
 
वर्ष 2012-13 की पहली तिमाही के लिए स्थिर (2004-05) मूल्यों पर वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य निर्धारण के आधार पर तिमाही जीडीपी 1306276 करोड़ रूपये होने का अनुमान लगाया गया है जबकि वित्तवर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में यह 1238738 करोड़ रूपये था जो 5.5 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है.
 
वित्तवर्ष 2011-12 की पहली तिमाही की तुलना में 2012-13 की पहली तिमाही में जिन क्षेत्रों में आर्थिक दृष्टि से पर्याप्त बढ़ोत्तरी दर्ज की गई, उनमें निर्माण क्षेत्र में 10.9 प्रतिशत, वित्त, बीमा, रीयल इस्टेट और बिजनेस सेवाओं में 10.8 प्रतिशत और समुदाय, सामाजिक तथा निजी सेवाओं में 7.9 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है. इस अवधि के दौरान अन्य क्षेत्रों जैसे कृषि, वन्य और मत्स्य पालन में 2.9 प्रतिशत, खनन और उत्खनन में 0.1 प्रतिशत, निर्माण, 0.2 प्रतिशत, बिजली, गैस और जलापूर्ति में 6.3 प्रतिशत और व्यापार, होटलों, परिवहन और दूरसंचार में 4.0 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
 
वर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में कृषि से जीडीपी के अनुमान एकत्र करने के लिए इस्तेमाल किए गए, कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कृषि वर्ष 2011-12 (जून 2012 में समाप्त) के रबी मौसम के दौरान अनाजों के उत्पादन में पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि चावल के उत्पादन में 16.6 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है। व्यवसायिक फसलों में, तिलहनों के उत्पादन में 2011-12 के रबी मौसम के दौरान 12.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जबकि कपास और गन्ने के उत्पादन में क्रमश: 6.7 प्रतिशत और 4.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई.
 
आधार वर्ष 2004-05 के साथ औद्योगिकी उत्पादन के सूचकांक के अनुसार 2012-13 की पहली तिमाही के दौरान खनन, निर्माण और विद्युत सूचकांक में क्रमश: (-) 1.1 प्रतिशत, 0.7 प्रतिशत और 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जबकि 2011-12 की पहली तिमाही के दौरान इन क्षेत्रों में क्रमश: 0.6 प्रतिशत, 7.7 प्रतिशत और 8.3 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई.
 
निर्माण क्षेत्र के प्रमुख संकेतकों खासतौर से सीमेंट के उत्पादन में 11.0 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई और तैयार इस्पात की खपत में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
 
सेवा क्षेत्रों में, रेलवे के प्रमुख संकेतकों जैसे कुल टन किलोमीटर और यात्री किलोमीटरों में क्रमश: 1.2 प्रतिशत और 6.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई. परिवहन क्षेत्र में व्यवसायिक वाहनों की बिक्री, प्रमुख बंदरगाहों में लाए ले जाए गए सामान, नागर विमानन द्वारा लाए ले जाए गए सामान और विमानों से आने जाने वाले यात्रियों की संख्या में क्रमश: 6.1 प्रतिशत, (-) 5.5 प्रतिशत, (-) 4.7 प्रतिशत और 2.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. अन्य प्रमुख संकेतकों जैसे बैंक जमा खातों और बैंक कर्जों में जून 2012 तक क्रमश: 15.9 प्रतिशत और 18.6 प्रतिशत की बढोत्तरी हुई.


वित्तवर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में वर्तमान मूल्यों पर वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य निर्धारण पर जीडीपी 2178778 करोड़ रूपये होने का अनुमान लगाया गया है जो वित्तवर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में 1919286 करोड़ रूपये था. यह 13.5 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी को दर्शाता है.
 
खाद्य वस्तुओं, निर्मित उत्पादों, विद्युत और अन्य वस्तुओं के संबंध में थोक मूल्य सूचकांक में क्रमश: 10.8 प्रतिशत, 5.2 प्रतिशत, 4.0 प्रतिशत और 7.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई. औद्योगिकी श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 10.1 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई.
 
वर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में वर्तमान मूल्यों पर निजी अंतिम उपभोग व्यय (पीएफसीई) 1281799 करोड़ रूपये का अनुमान लगाया गया है जबकि वित्तवर्ष 2011-12 की पहली तिमाही में यह 1138337 करोड़ रूपये था. वर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में स्थिर (2004-05) मूल्यों पर पीएफसीई 815319 करोड़ रूपये होने का अनुमान लगाया गया है जबकि 2011-12 की पहली तिमाही में यह 784113 करोड़ रूपये था. बाजार मूल्यों पर जीडीपी के संदर्भ में, वर्तमान और स्थिर मूल्यों पर पीएफसीई की दरें 56.0 प्रतिशत और 59.5 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है जबकि 2011-12 की पहली तिमाही में यह क्रमश: 55.8 प्रतिशत और 59.5 प्रतिशत थी.
 
वित्तवर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में वर्तमान मूल्यों पर सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफसीई) 267337 करोड़ रूपये होने का अनुमान लगाया गया है जबकि 2011-12 की पहली तिमाही में यह 224124 करोड़ रूपये था. वर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में स्थिर (2004-05) मूल्यों पर जीएफसीई 151747 करोड़ रूपये होने का अनुमान लगाया गया है जबकि 2011-12 की पहली तिमाही में यह 139179 करोड़ रूपये था. बाजार मूल्यों पर जीडीपी के संदर्भ में, वर्तमान और स्थिर मूल्यों पर जीएफसीई की दरें क्रमश: 11.7 प्रतिशत और 11.1 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है जबकि 2011-12 की पहली तिमाही में यह क्रमश: 11.0 प्रतिशत और 10.6 प्रतिशत थी.
 
वित्तवर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में वर्तमान मूल्यों पर सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) 684893 करोड़ रूपये होने का अनुमान लगाया गया है जबकि 2011-12 की पहली तिमाही में यह 636371 करोड़ रूपये था. वर्ष 2012-13 की पहली तिमाही में स्थिर (2004-05) मूल्यों पर जीएफसीएफ 449701 करोड़ रूपये होने का अनुमान लगाया गया है जबकि 2011-12 की पहली तिमाही में यह 446754 करोड़ रूपये था. बाजार मूल्यों पर जीडीपी के संदर्भ में, वर्तमान और स्थिर मूल्यों पर जीएफसीएफ की दरें क्रमश: 29.9 प्रतिशत और 32.8 प्रतिशत होने का अनुमान लगाया गया है जबकि 2011-12 की पहली तिमाही में यह क्रमश: 31.2 प्रतिशत और 33.9 प्रतिशत थी.
 
स्थिर (2004-05) और वर्तमान मूल्यों पर 2010-11, 2011-12 और 2012-13 की पहली तिमाही के लिए व्यय और आर्थिक गतिविधियों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य निर्धारण पर जीडीपी अनुमान 1 से 4 पत्रक में दिये जा रहे हैं.

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