वित्तवर्ष 2013-14 की दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 4.8 प्रतिशत रही

वित्तवर्ष 2013-14 की दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मामूली सुधार के साथ 4.8 प्रतिशत रही.

Created On: Nov 30, 2013 12:22 ISTModified On: Nov 30, 2013 12:25 IST

वित्तवर्ष 2013-14 की दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर मामूली सुधार के साथ 4.8 प्रतिशत रही. देश की सकल घरेलू उत्पाद दर (विकास दर) वित्तवर्ष 2013-14 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2013 की) में 4.4 प्रतिशत रही थी. वित्तवर्ष 2013-14 की दूसरी तिमाही में यह सुधार कृषि, कारखाना उत्पादन, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के कारण हुआ. यह आंकड़े आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम ने नई दिल्ली में 29 नवंबर 2013 को जारी किए.

जुलाई-सितम्बर 2013 की अवधि लगातार चौथी तिमाही है जब वृद्धि दर पांच प्रतिशत से कम रही. वर्ष 2013 की जुलाई-सितम्बर की अवधि में कारखाना उत्पादन की वृद्धि दर में वर्ष 2012 की इसी अवधि की तुलना में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. वर्ष 2012 की इसी अवधि में यह 5.2 प्रतिशत रही थी.

वित्तीय, बीमा और अचल संपत्ति सहित सेवा क्षेत्र में वृद्धि दर दस प्रतिशत रही, जबकि वर्ष 2012-13 की इसी तिमाही में में यह दर 8.3 प्रतिशत थी. निर्माण क्षेत्र में वर्ष 2013-13 के 3.1 प्रतिशत के मुकाबले विकास दर 4.3 प्रतिशत रही.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.6 प्रतिशत रही जो इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 1.7 प्रतिशत थी. वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितम्बर) में कृषि क्षेत्र की वृद्धि 3.6 प्रतिशत रही जबकि पूर्व वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 2.3 प्रतिशत रही थी.

विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर आलोच्य तिमाही में 1.0 प्रतिशत रही जो एक वर्ष पूर्व इसी तिमाही में केवल 0.1 प्रतिशत थी. हालांकि, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल-सितम्बर) में उत्पादन में 0.1 प्रतिशत की गिरावट आई जो पिछले साल की इसी तिमाही में 0.5 प्रतिशत थी.

जुलाई से सितम्बर 2013 की तिमाही में बिजली गैस और जलापूर्ति में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि वित्तवर्ष 2012-13 की इसी  अवधि में इन क्षेत्रों में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.

जुलाई-सितम्बर 2013 की अवधि में सुधार की चमक औद्योगिक श्रमिकों के लिए खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी से धीमी पड़ गई जो कि बढ़कर 11.06 प्रतिशत हो गई.
 
देश का राजकोषीय घाटा वित्तवर्ष 2013-14 के पहले सात महीने में बढ़कर 4.57 लाख करोड़ रुपए हो गया जो कि बजटीय अनुमान (वित्तवर्ष 2013-14 के बजट का) का 84.4 प्रतिशत है. वर्ष 2012 की इसी अवधि में यह 71.6 प्रतिशत रहा था.
 
भारतीय रिजर्व बैंक को अगली मौद्रिक नीति समीक्षा 18 दिसम्बर को करनी है और नीतिगत ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की अपेक्षा की जा रही है.
 
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन ने वृद्धि में मंदी के लिए वैश्विक कारणों को जिम्मेदार बताया है. साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई है कि दूसरी छमाही इस लिहाज से अच्छी रहेगी.

आर्थिक मामलों के सचिव अरविंद मायाराम ने कहा कि तीसरी और चौथी तिमाही में विकास दर में धीरे-धीरे और सुधार होगा.

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