विमानन पर्यावरण संरक्षण समिति द्वारा विमानन उद्योग के लिए बाध्यकारी कार्बन उत्सर्जन मानकों का प्रस्ताव

सीएईपी ने सुनिश्चित किया कि वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय विमानन में इस्तेमाल किए जाने वाले सभी आकार और प्रकार वाले विमानों को मानकों के प्रस्ताव के समय कवर किया जाएगा और इसमें व्यापक रूप से सभी तकनीकी व्यवहार्यता, उत्सर्जन में कमी की क्षमता और लागत पर विचार किया जाएगा.

Created On: Feb 15, 2016 07:30 ISTModified On: Feb 15, 2016 18:44 IST

संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय नागरिक विमानन संगठन (आईसीएओ) की विमानन पर्यावरण संरक्षण समिति (सीएईपी) ने 8 फरवरी 2016 को विमानन उद्योग के लिए बाध्यकारी कार्बन उत्सर्जन मानकों का प्रस्ताव पेश किया. इस प्रकार इसने आईओसीए शासी परिषद द्वारा इसे अपनाए जाने के लिए रास्ता साफ किया.

सीएईपी ने सुनिश्चित किया कि वर्तमान समय में अंतरराष्ट्रीय विमानन में इस्तेमाल किए जाने वाले सभी आकार और प्रकार वाले विमानों को मानकों के प्रस्ताव के समय कवर किया जाएगा और इसमें व्यापक रूप से सभी तकनीकी व्यवहार्यता, उत्सर्जन में कमी की क्षमता और लागत पर विचार किया जाएगा.

कार्बन उत्सर्जन मानकों (सीईएस) पर सीएईपी की सिफारिशें–

• नई CO2 मानक न सिर्फ 2020 के नए विमान टाइप डिजाइनों पर लागू होगा बल्कि यह 2023 से वर्तमान में जिस प्रकार के विमानों का उत्पादन चल रहा है उन पर भी लागू होगा.
• विमानों के उत्पादन के लिए मानकों का पालन नहीं करने वालों के लिए 2028 की कट–ऑफ तारीख की भी सिफारिश की गई थी.
• अपने वर्तमान स्वरूप में मानक मानता है कि समान CO2 कटौती संभव प्रौद्योगिकी नवाचारों की सीमा से उत्पन्न हो रहा है चाहे वह संरचनात्मक हो या

वायुगतिक या प्रणोदन– आधारित.

• प्रस्तावित वैश्विक मानक खासतौर पर उन स्थानों पर जहां सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा– बड़े विमानों के लिए सख्त हैं.
• 60टन से अधिक वजन उठाने वाले विमानों का संचालन अंतरराष्ट्रीय विमानन उत्सर्जन में 90% से अधिका का योगदान करता है.
• इनकी पहुंच उत्सर्जन कम करने वाले प्रौद्योगिकियों जिसे मानक मान्यता प्रदान करता है, के व्यापक रेंज तक भी है.

प्रस्तावित कार्बन उत्सर्जन मानकों का लक्ष्य

इस प्रक्रिया का अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि जब अगली पीढी के विमान सेवा क्षेत्र में प्रवेश करें तो अंतरराष्ट्रीय CO2 उत्सर्जन में जरूर कमी आए. वर्तमान में विमानन क्षेत्र दुनिया के वार्षिक CO2 उत्सर्जन में 2 प्रतिशत से थोड़ा अधिक का योगदान कर रहा है.

अनुमान के अनुसार 2030 तक वैश्विक यात्रियों और उड़ानों की संख्या दुगनी हो जाएगी जिन्हें जिम्मेदारी और टिकाऊ तरीके से प्रबंधित किया जाना चाहिए.

अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) के बारे में

• यह संयुक्त राष्ट्र की विशेष एंजेसी है जिसकी स्थापना 1944 में अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन सम्मेलन (शिकागो सम्मेलन) के प्रशासन और शासन के प्रबंध के लिए की गई थी.
• यह सुरक्षित, प्रभावी, आर्थिक रूप से स्थायी और पर्यावरण के लिहाज से जिम्मेदार नागरिक उड्डयन क्षेत्र के समर्थन से अंतरराष्ट्री नागर विमानन मानकों और अनुशंसित प्रथाओं (एसएआरपी) एवं नीतियों पर आम सहमति के लिए सम्मेलन के 191 सदस्य देशों और उद्योग समूहों के साथ काम करता.

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