श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघन पर अमेरिका का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में मंजूर

यूएनआरएचसी ने श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में अमेरिका का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में और पाकिस्तान ने विरोध में मत दिए.

Created On: Mar 23, 2013 11:16 ISTModified On: Mar 23, 2013 11:22 IST

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनआरएचसी) ने श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघन के बारे में अमेरिका का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. प्रस्ताव के संदर्भ में जिनेवा में 21 मार्च 2013 को मतदान हुआ. 25 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में और 13 देशों ने प्रस्ताव के विरोध में मत दिया. 8 देश मतदान से अनुपस्थित रहे. भारत ने प्रस्ताव के पक्ष में जबकि पाकिस्तान ने प्रस्ताव के विरोध में मत दिए. मानवाधिकार परिषद में कुल 47 देश सदस्य हैं. यूएनआरएचसी के एक सदस्य देश गैबन के मताधिकार के मुद्दे को लेकर विवाद रहा जिसके कारण वह मतदान में हिस्सा नहीं ले सका.

इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने वाले देशों में भारत, अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और नार्वे बेनिन, लीबिया, सिएरा लियोन, अर्जेंटीना, ब्राजील, आस्ट्रिया, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, स्पेन, स्विट्जरलैंड और दक्षिण कोरिया शामिल रहे. अमेरिका समर्थित प्रस्ताव के विरोध में मतदान करने वाले देशों में पाकिस्तान, कांगो, मालदीव, थाईलैंड, यूएई, कतर, कुवैत और इक्वाडोर शामिल थे. कीनिया, जापान, मलेशिया, कजाकिस्तान, इथोपिया और बोस्सवाना जैसे देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया.

संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश करने के दौरान भारत ने कहा कि श्रीलंका में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों और नागरिकों के मारे जाने की स्वतंत्र और विश्वसनीय जांच होनी चाहिए. भारत ने प्रस्ताव में सात लिखित संशोधन पेश किए.

प्रस्ताव पर भारत का दृष्टिकोण
भारत ने अपने प्रस्ताव में इस बात की चिंता व्यक्त की कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के गंभीर उल्लंघनों के निवारण के लिए (श्रीलंका में) राष्ट्रीय कार्य योजना और आयोग (एलएलआरसी) के रिपोर्ट को सही ढंग से लागू नहीं किया गया. इसमें श्रीलंका में मानवाधिकारों के जारी उल्लंघन को लेकर आ रही रिपोर्ट पर भी चिंता जताई गई. श्रीलंका में सुलह और जवाबदेही को बढ़ावा देने से जुड़े प्रस्ताव को लेकर भारत ने मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों और नागरिकों के मारे जाने को लेकर स्वतंत्र एवं विश्वसनीय जांच का अपना आह्वान दोहराया.
भारत ने वर्ष 2009 में मानवाधिकार परिषद में श्रीलंका की ओर से किए गए वादे को पूरा करने में हुई अपर्याप्त प्रगति का उल्लेख किया. भारत ने  श्रीलंका को अपनी सार्वजनिक प्रतिबद्धताओं पर आगे बढ़ते रहने का आह्वान किया. इनमें 13वें संशोधन के पूर्ण कार्यान्वयन के द्वारा राजनीतिक शक्ति के विकेंद्रीकरण की बात भी शामिल है.

भारत का हमेशा मानना रहा है कि श्रीलंका में विवाद के खत्म होने से एक ऐसे स्थायी राजनीतिक समाधान की ओर बढ़ने का एक महत्त्वपूर्ण अवसर मिला है जो तमिलों सहित सभी श्रीलंकाई नागरिकों को स्वीकार्य हो. भारत एलएलआरसी की रिपोर्ट में की गई सभी रचनात्मक अनुशंसाओं को प्रभावी ढंग से और समय पर लागू करने का आह्वान करता हैं. भारत श्रीलंका से आग्रह करता हैं कि वह जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ें. इससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय संतुष्ट होगा.

प्रस्ताव पर श्रीलंका का दृष्टिकोण
श्रीलंका ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में पेश किए गए प्रस्ताव को स्पष्ट तौर पर अस्वीकार्य कर दिया. साथ ही इस प्रस्ताव की निंदा भी की. श्रीलंका की सरकार माननवाधिकार आयुक्त के कार्यालय और इस प्रस्ताव के समर्थकों के प्रयासों को पूरी तरह खारिज करती है. उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव हाल के वर्षों में श्रीलंका में हुई प्रगति को स्वीकार कर पाने में नाकाम रहा है.

अमेरिका ने प्रस्ताव का समर्थन किया और यह स्वीकार किया कि कुछ क्षेत्रों में प्रगति हुई है लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है. श्रीलंका को सार्थक कार्रवाई करनी चाहिए और बढ़ रही चिंता का निवारण करना चाहिए.

Take Weekly Tests on app for exam prep and compete with others. Download Current Affairs and GK app

एग्जाम की तैयारी के लिए ऐप पर वीकली टेस्ट लें और दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा करें। डाउनलोड करें करेंट अफेयर्स ऐप

AndroidIOS
Comment ()

Post Comment

2 + 9 =
Post

Comments

    Whatsapp IconGet Updates

    Just Now