'श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान 2014' से साहित्यकार मिथिलेश्वर सम्मानित

केंद्रीय संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हिन्दी के उपन्यासकार मिथिलेश्वर को वर्ष 2014 का 'श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान' दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में 31 जनवरी 2015 को प्रदान किया. क्रम में यह तीसरा ‘श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान’ है.

Created On: Feb 3, 2015 17:45 ISTModified On: Feb 3, 2015 17:49 IST

हिन्दी उपन्यासकार मिथिलेश्वर को वर्ष 2014 का 'श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान' 31 जनवरी 2015 को दिया गया. केंद्रीय संचार व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उन्हें यह सम्मान दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में प्रदान किया.

मिथिलेश्वर ने अपने छह उपन्यासों और 11 कहानी संग्रहों के माध्यम से हिन्दी कथा-साहित्य को समृद्ध किया. इनमें 'प्रेम न बाड़ी उपजै', 'यह अंत नहीं', 'सुरंग में सुबह', 'माटी कहे कुम्हार से' (उपन्यास) और 'बाबूजी', 'तिरिया जनम', 'हरिहर काका' (कहानी संग्रह) प्रमुख हैं.  इसके आलावा झुनिया (1980) और युद्ध स्थल (1981) भी इनकी प्रमुख रचनाओं में शामिल है.

मिथिलेश्वर को वर्ष 1976 में अखिल भारतीय मुक्तिबोध पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके आलावा उन्हें उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा वर्ष 1981 का यशपाल पुरस्कार दिया गया.  

मिथिलेश्वर की आत्मकथा के दो खंड - 'पानी बीच मीन पियासी' और 'कहां तक कहें युगों की बात' प्रकाशित ही चुकी है जबकि तीसरा खंड 'जाग चेत कुछ करौ उपाई' शीघ्र प्रकाशित होने वाला है.

क्रम में यह चौथा ‘श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान’ है. पहला श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान विद्यासागर नौटियाल (2011) को और दूसरा शेखर जोशी (2012) को और तीसरा संजीव (2013) को दिया गया था.

श्रीलाल शुक्ल 1968 में लिखे अपने व्यंग्य उपन्यास 'राग दरबारी' की वजह से ज्यादा जाने जाते हैं. उन्होंने 'बिसरामपुर का संत', 'मकान', 'आदमी का जहर', 'बब्बर सिंह और उसके साथी', 'राग विराग', 'सीमाएं टूटती हैं' और 'सूनी घाटी का सूरज' जैसे उपन्यास भी लिखे हैं.

श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान
'श्रीलाल शुक्ल इफको साहित्य सम्मान' की स्थापना सहकारी संस्था इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) द्वारा वर्ष 2011 में हिन्दी के कथाकार पद्मभूषण श्रीलाल शुक्ल के नाम पर किया गया था. इस पुरस्कार के तहत पर विजेता को 11 लाख रुपये की सम्मान राशि, प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र और शॉल भेंट किया जाता है.

यह सम्मान प्रतिवर्ष उस साहित्यकार को प्रदान किया जाता है, जिसका हिंदी भाषा एवं साहित्य के संव‌र्द्धन में महत्वपूर्ण अवदान रहा हो. साथ ही उसने भारतीय कृषि एवं किसान और ग्रामीण जीवन से जुड़ी समस्याओं, आकांक्षाओं व संघर्षो को अपने साहित्य के माध्यम से मुखरित किया हो.

श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान की शुरुआत इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) ने अपने कार्यव्यवहार और कार्य प्रकृति के अनुरूप गांव, किसान व कृषि जीवन से संबंधित यथार्थवादी एवं उत्कृष्ट कलात्मक साहित्य को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की थी.

इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड (इफको)
इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर को-ऑपरेटिव लिमिटेड (इफको) उर्वरकों का उत्पादन और विपणन करने वाली विश्व की सबसे बड़ी सहकारी संस्था है.

 

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