संघीय सरकार ने कोल इंडिया लिमिटेड में अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची

संघीय सरकार ने 30 जनवरी 2015 को महारत्न के दर्ज़े वाले कोल इंडिया लिमिटेड में अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची

Created On: Feb 2, 2015 06:55 ISTModified On: Feb 2, 2015 18:48 IST

संघीय सरकार ने 30 जनवरी 2015 को महारत्न के दर्ज़े वाले कोल इंडिया लिमिटेड में अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची.सीआईएल में सरकार की हिस्सेदारी घटकर 79.65 हो गई.

सरकार ने ऑफर फॉर सेल के द्वारा 358 रूपये प्रति अंश की फ्लोर प्राइस पर सीआईएल में अपनी 10 प्रतिशत हिस्सेदारी यानी 63.16 करोड़ अंश बेच दिये. विनिवेश की इस प्रक्रिया से सरकार को राजस्व के तौर पर 22,557.63 करोड़ रूपए की प्राप्ति हुई.

बिक्री के लिए ऑफर की गई सीआईएल के कुल अंशों की सब्सक्रिप्शन करीब 5 प्रतिशत अधिक हुई.बिक्री के लिए ऑफर की गई 63.16 करोड़ अंशों के मुकाबले कुल 67.5 करोड़ अंशों के लिए बोली लगाई गई.

केंद्रीय लोक उद्यमों के बीच यह अब तक की सबसे बड़ी विनिवेश थी और इसमें बेची गई हिस्सेदारी वर्ष 2010 में सीआईएल की इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग से जुटाई गई 15,000 करोड़ रूपये की राशि से कहीं अधिक थी.

टिप्पणी
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विनिवेश के जरिये मिली इस बड़ी राशि की प्राप्ति से सरकार अपने राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.1 प्रतिशत तक करने के अपने निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति  कर सकती है . इस लक्ष्य का निर्धारण 2014-15 के बजट में किया गया था.

सरकार ने केंद्रीय बजट 2014-15 में सरकारी स्वामित्व वाली औद्योगिक ईकाईयों के विनिवेश से 43,425 करोड़ रूपये जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया था.
 
वित्तीय वर्ष 2014-15 के पहले विनिवेश में सरकार नें स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की स्टॉक बेचकर 1,700 करोड़ रूपये जुटाये. इसके अधिकांश स्टॉक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और भारतीय जीवन बीमा निगम ने खरीद लिया .

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